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द बॉय हू लव्ड -33 in  | undefined undefined मे |  Audio book and podcasts

द बॉय हू लव्ड -33 in Hindi

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AuthorSaransh Broadways
मैं रघु गांगुली हूँ। आज मैं अपनी आपबीती लिखने बैठ ही गया हूँ। कागजों की सरसराहट और उस पर चलती हुई कलम की तीखी निब, धीरे-धीरे स्याही का सोखना तथा इन अजीब से लगने वाले मुड़े हुए अक्षरों को देखना निश्चित तौर पर संतुष्टि दे रहा है। मैं कह नहीं सकता कि मेरे जैसे मौनावलंबी (सिजोफ्रेनिक) के लिए इस डायरी लेखन में ही सारे सवालों के जवाब होंगे; पर मैं आज कोशिश कर रहा हूँ। मेरा सिर बुरी तरह से चकरा रहा है। पिछले दो साल से मैं जिंदगी की सबसे ऊँची लहरों पर सवार था। अधिकतर दिनों में मैंने जान देने के लिए तरह-तरह के साधनों की तलाश की—मेरे घर के आस-पास की सबसे ऊँची इमारत, रसोई का सबसे तेज धार चाकू, सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन, कोई केमिस्ट शॉप—जो बिना कोई सवाल किए सोलह बरस के लड़के को बीस या उससे ज्यादा नींद की गोलियाँ दे दे, एक पैकेट चूहे मारने की दवा और कभी-कभी तो यह भी चाहा कि माँ-बाबा से गणित के पेपर में अच्छे नंबर न लाने के लिए फटकार मिले। सुनिये क्या है पूरी कहानी| writer: दुर्जोय दत्ता Voiceover Artist : Ashish Jain Author : Durjoy Dutta
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सोलह जुलाई जब घर आया तो माँ बाबा घर पर ही थे और उन्होंने पिछले कुछ दिनों की तरह मेरी मौजूदगी को पूरी तरह से उपेक्षित । क्या मैं हल्का सा खासा आजकल थोडा ज्यादा खास रहा था ताकि माँ का ध्यान मेरी और जाए और उन्हें लगे मुझे टीवी का हल्का असर हो रहा है । उन्हें भूल का एहसास और वह माफी मांगे । दोनों ही तरह उनका बडता मेरी सहने की हद से बाहर जा रहा था । अगर उन्हें अपने बेटों से इतनी नफरत थी तो उन्हें अब भी दादा की शादी कितनी चिंता क्यों लगी हुई थी । आज वो दोनों ही बेचैनी से फोन के आसपास चक्कर काटते हुए किसी कॉल के इंतजार में थे । एक घंटे बाद फोन बजा और माँ ने उसे लाउड स्पीकर पर डाल दिया । विशेष चटर्जी हम आपकी कॉल की बात कर रहे थे । जैसे आप दूसरी ओर से टूटे और भरवारा इस्वर में । किसी ने कहा मैं ठीक हूँ, मैं ठीक हूँ । मैंने आपके बेटे और बहू की कुंडली देखी थी । मुझे डर है कि मेरे पास एक बुरी खबर है क्या? उन्होंने पूछा उस आदमी ने दूसरी ओर से यहाँ भरते हुए कहा अनिर्वान की शादी वृद्धि करते रहेंगे । मुझे नहीं लगता है । ज्यादा समय तक चलेगी । आप दोष दूर करने के लिए पूजा करवा सकते हैं । पर लडकी माने बीच में टोकते हुए कहा कुछ और पता नहीं आप को बताना चाहिए या नहीं । उधर से उस व्यक्ति ने बात को थोडा कमाया भरवानी करके बता दें । बाबा ने कहा मुझे एक और समस्या दिख रही है । ऐसी समस्या मैंने पूछा । अगर उनके घर कोई संतान हुई तो दो वर्ष से अधिक नहीं जी सकेगी । कुछ आदमी ने कहा आप मुझे लडकी के जन्म का सही समय नहीं दे सकें इसलिए मेरा अनुमान और गन्ना अलग भी हो सकते हैं । माँ बाप ने मुझसे कमरे से बाहर जाने को कहा । उसके बाद माँ कमरे में आई और एक लाइन में निर्देश दिया ज्यादा से कहो कि वो कोई और लात पैदा न करें ।

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मैं रघु गांगुली हूँ। आज मैं अपनी आपबीती लिखने बैठ ही गया हूँ। कागजों की सरसराहट और उस पर चलती हुई कलम की तीखी निब, धीरे-धीरे स्याही का सोखना तथा इन अजीब से लगने वाले मुड़े हुए अक्षरों को देखना निश्चित तौर पर संतुष्टि दे रहा है। मैं कह नहीं सकता कि मेरे जैसे मौनावलंबी (सिजोफ्रेनिक) के लिए इस डायरी लेखन में ही सारे सवालों के जवाब होंगे; पर मैं आज कोशिश कर रहा हूँ। मेरा सिर बुरी तरह से चकरा रहा है। पिछले दो साल से मैं जिंदगी की सबसे ऊँची लहरों पर सवार था। अधिकतर दिनों में मैंने जान देने के लिए तरह-तरह के साधनों की तलाश की—मेरे घर के आस-पास की सबसे ऊँची इमारत, रसोई का सबसे तेज धार चाकू, सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन, कोई केमिस्ट शॉप—जो बिना कोई सवाल किए सोलह बरस के लड़के को बीस या उससे ज्यादा नींद की गोलियाँ दे दे, एक पैकेट चूहे मारने की दवा और कभी-कभी तो यह भी चाहा कि माँ-बाबा से गणित के पेपर में अच्छे नंबर न लाने के लिए फटकार मिले। सुनिये क्या है पूरी कहानी| writer: दुर्जोय दत्ता Voiceover Artist : Ashish Jain Author : Durjoy Dutta
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