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‘बर्फखोर हवायें’ कहानियों का संग्रह है जिसमें 12 चुनिंदा कहानियां शामिल है। कहानियों की सबसे बड़ी खूबी है कि वे लिसनर्स को निराश नहीं करेंगे। इन कहानियों में समाज, रिश्‍तें, परिवार, सामाजिक संस्‍कर, रूढि़यों, सीख शामिल हैं, जो लिसनर्स को उनसे जोड़ता है। Voiceover Artist : Ashish Jain Author : Harpreet Sekha Script Writer : Subhash Neerav
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तो वो ही बोल सब जगह एक ही खबर की चर्चा थी उसे । खबर को अपने अंदर मतदाता तरसेम जब घर पहुंचा तो हमेशा की तरह टीवी के सामने बैठी उसकी आठ दस साल की बेटी गुरनीत और चार पांच वर्षीय पुत्र सुमित ने एक साथ कहा ससुर इकार्डी सस्ता निकाल का जवाब दिए बगैर गुरनीत की और क्रोध के साथ देखते हुए तरफ से बोला स्कूल से आते ही टीवी के सामने बैठ जाए करूँ और छोटे भाई को सिखाई उल्टी आती है । फिर वो बच्चों के साथ सोफे पर बैठी अपनी माँ और चाय बनाने के लिए स्टोर के पास खडी अपनी पत्नी मन दीन की तरफ बारी । बारिश देखकर बोला तुम भी ना हटाया करो डर से इनकी माने साखियों वाली किताब पर से ध्यान हटाकर तरसेम की और देखा और फिर अपना ध्यान किताब की तरफ कर लिया । मनदीप ने तरसेम की गुस्से में भरी नजर को देखकर अपना ध्यान वाले खा रही चाय की तरफ कर लिया । अपने लंच पेट को किचन काउंटर पर पटक कर ऍम में घुसकर टॉयलेट पर बैठ गया । यदि उसका मूड ऐसा होता तो वो काम पर से लौट कर बच्चों के साथ बैठी अपनी माँ के पैरों को हाथ लगता । गुरनीत के सर पर हाथ रखने के बाद सुमित को अपनी सात रस्ते हुए मंदीप की और देखता करीब छह महीने पहले तरसेम ने एक रेडियो प्रोग्राम में सुना था कि बच्चों को देश देने की अपेक्षा उन्हें रोलमॉडल बनकर दिखाओ तो बच्चों पर ज्यादा असर पडता है । तब से तरसेम अपनी माँ को चरण स्पर्श करने लगा था और कुछ दिनों बाद उसने गुरमीत से कहा था देखो मैं जब बाहर से आता हूँ कि माँ के पैर छोटा हूँ तू भी जब हम बाहर से आए तो सस्ती अकाल कहा का फिर गुरमीत की और देखा सुमिति ऐसे कहने लगा था । टॉयलेट सीट पर बैठे तरसेम को लगा जैसे बच्चों ने टीवी की आवाज ऊंची कर दी हो । फिर उसको लगा मानव शोर मचा रहे हो । उसको मन हुआ कि उठकर दोनों की एक एयर जड देंगे । उसने दाद पीछे और ऊंची आवाज में कहा आओ बाहर कैसे शोर मचा रखा है? कहाँ शोर मचा रहे डैडी गुरमीत की जोर की आवाज आई देख तो कैसे बोलती है बताऊँ कैसे बडो के साथ बात करते हैं तो सीन पडती आवाज में बोला अरे कोई शोर नहीं मचा रहे । बेटा आपस में खेल रहे हैं । अगर कहता है तो बाहर ले जाती हूँ । पता नहीं क्या हो जाता है तो ये भी कभी कभी माँ की आवाज उसके कानों में पडी । माँ बिगाडेगी नहीं सोच कर उसको अपनी वहाँ पर गुस्सा आया पर वह कुछ नहीं बोला । कहती है पता नहीं मुझे क्या हो जाता है तो बोलती नहीं दिखाई देती । कैसे जवाब देती है पता नहीं चला क्या होगा अभी से आंखे दिखाती है । बडी होकर पता नहीं क्या रंग दिखाएगी । उसको लगा जैसे गुरनीत एकदम बडी हो गई हो । उसके अंदर एक चीज झूठी ऍम को लगा मानो गुरमीत किसी गोरे लडके के हाथ में हाथ डाले नहीं जा रही हूँ और वह लोगों से नजरे बचा रहा हूँ । ये सोचकर तरसेम डर से कम था । तरसेम के अंदर से बाहर नहीं । उसने सोचा पता होता तो पहले ही टेस्ट टेस्ट करवा लेते हैं । अब जब तक बडी होकर ही नहीं जाती सूली पडेंगे रहेंगे । ये सोचते हुए तरसेम की निगाह अचानक सामने लगे शीर्ष से जा टकराई । शीशे पर गुस्सा निकालता उसने कमदी गाली निकाली । ॅ कल और उसने अपनी नजरें शीर्ष पर से हटा ली । उसको मंदी पर ही जाएगी । सहेलियों के साथ बतियाने बैठ जाती है । सामने यह नहीं देखती कि लडकी बडी हो रही है । ये शीशा तरसेम ने खुद ही टांगा था । एक दिन जब बेडरूम में बैठी मनदीप अपनी बहुत कम आ रही थी तो तस्वीरें खींच कर बोला था ये सबको सिखाएगी तो बच्ची को दरवाजा तो बंद कर लिया कर । ऐसा करने से पहले और थोडी मैं दूर बंद करना भूल गई । बीस ब्लॉक कर जाना । बाहर निकलते वक्त मंदिर बोली तरसेम बडबडाता दरवाजा बंद कर के कमरे में से बाहर निकल गया । अगले दिन उसने टॉयलेट के सामने शीर्षा तंग कर नरम आवास में मंदिर से कहा था एक बंदी गुरनीत अब बडी हो रही है । हमें ख्याल रखना पडेगा । मैंने टॉयलेट के सामने शीर्षक दिया है टॉयलेट बैठने के बहाने बना लिया कर अपने आइब्रो । ये बात हालांकि तरसेम ने धीमे स्वर में मनदीप से कहीं थी पर एक तरफ बैठी उसकी माँ के कानों तक पहुंची गई । उसने वहीं बैठे बैठे कहा वो वो कर पहर रखना पडेगा भाई, बच्चे तो तुम्हें जैसे करता देखेंगे वैसा ही करेंगे । अब पुराने जमाने तो है नहीं जब लडकियां सिर पर चुन्नी उतरने नहीं देती थी अब शर्म हया वाला आवा ही बिगड पडा है । माँ की ऐसी बातें तरसेम को और ज्यादा फिक्र बंद कर देती थी । उस दिन तो कुछ ज्यादा ही फिक्रमंद हो गया था । जिस दिन उस की माने गुरनीत को टोकते हुए कहा था लडकी अब तो बच्चे नहीं रही पैंट पहना कर लडकियाँ नंगी टांगे नहीं रखा करती । ॅ काम है उसका अगर गुरनीत बैकयार्ड वाली सीढियां उतर गई थी उनकी तो देख कैसे मेरी कभी आंख में डाले नहीं चुकती थी फिर अब अभी ये हाल है बडी होकर पता नहीं क्या चाम दिखाएगी । टाॅम की माँ और भी बहुत कुछ बोलती रही थी पर तरसेम के दिमाग में तो बडी होकर पता नहीं क्या चाम दिखाएगी ही अटक गया था । उसी शाम ग्रॉसरी लेकर लौटी । मंदी बोली थी पता नहीं क्या होगा? भेडाघाट हुआ पडा है । टाॅस मंदीप की और देखा जिसे पूछ रहा हूँ कि तुझे स्टोर में घूमती को कहाँ से सपना आ गया कि मैं भी पता नहीं क्या होगा को लेकर फिक्रमंद हूँ । बंदी बोली ये जो अपने सामने बस स्टॉप है ना वहाँ बैठे हैं, वोट से हो थोडे मुश्किल से बारह तेरह साल के होंगे । लडकी तो अपने लोगों की ही लगती है । मुझे तो बताते हुए भी शर्म आती है । लडके ने लडकी के ब्लाउज में हार डाला हुआ है । मेरा तो पूरा शरीर ही कंपनी लगा मेरे बच्चे जो कुछ देखेंगे वही तो करेंगे । सुनकर तहसीन और अधिक चिंतित हो उठा । पता नहीं क्या होगा सोचते हुए टाॅयलेट की सीट पर जाता था । जब किसी समस्या को मतलब होता है वैसा ही क्या करता है । उसके दिमाग में आया कि यदि ये मालूम होता की लडकियाँ पालनी इतनी कठिन होती हैं तो पहले गर्म टेस्ट करवा लेते हैं । पर अगले दिन जब गुरमीत स्कूल से अपना रिपोर्ट कार्ड लेकर आई थी तो सभी विषयों में एक्सीडेंट देखकर तरसेम को अपनी सोच पर शर्मिंदगी महसूस हुई थी और वो आईने के साथ आंख नहीं मिला सकता था । अब भी तरसेम के दिमाग में अगर टेस्ट वाली बात आने पर वो आईने से आंख नहीं मिला पा रहा था और उसने आएंगे कोई गंदी गाली बॅाल निकाल कर आंखें घुमा ली थी । आदमी क्या करेगी उसे ऐसा दिन ना देखना पडेगा । तब से हमने सोचा लेकिन उसके अपने अंदर के सवाल का जवाब ना मिला । उसको पहले की अपेक्षा बच्चों की धीमी आवाज और तेज जाती महसूस हुई । उसे तल्खी महसूस हुई । तरसेम ने सोचा कि ठंडे पानी का शौक चला दे । शौहर की आवाज बाहरी आवाजों को रोक लेती है और वो अपने अंदरूनी शोर में वो लग जाता है प्रदर्शन हमको पानी वाली मीटर का तुरंत ख्याल आ गया । नई जगह की साली सौ दूसरी मुसीबत हें उसे अपना पुराना मकान याद आया जहाँ पानी का साल भर का फ्लैट रेट था और ऐसे मौकों पर ठंडे पानी का शव ओवर चला दिया करता था । पुरानी बातों को छोडने में मेहनत तो करनी पडती है । दुख भी होता है । पहले पहले जब छूट जाती है तो सुख भी मिलता है । जीत मामा की कही बात तरसेम के दिमाग में कौन थे लेकिन अगले ही पल उसने सोचा हम आपको बातें बनानी आती हैं । दोनों बेटियां के डॉक्टर बन गई । ये लोगों को अखिल देने लग पडा है । तरसेम को जीत मामा आज दिन में भी याद आया था जब तरसेम काम पर खडा था । तरसेम को जीत मामा अपने घर के फैमिली रूम में सोफे पर बैठा वैसे ही दिखाई दिया था जैसे वो करीब दो वर्ष पहले दिखाई दिया था । जब वह कनाडा में नए आए तो अपनी बुआ के बेटी दामाद यानी तरसेन के माँ बाप को मिलने वैंकोवर आया था । खुद तो जीत करीब बीस सालों से मस्कट जून में रहता था । यहाँ वहाँ स्कूल में गणित पढाता था । बातचीत करते हुए उसने कहा था, बहन हम तब जिम्मेदारी और सब फ्री हो गए । बच्चियाँ दोनों डॉक्टर बन गई । दोनों की शादी हो गई तो भाई बहुत अच्छा हुआ कि दोनों लडकियों को डॉक्टर बना दिया तो बनना ही था । तो आप कौन सा काम पढा लिखा था लडकियों के फिर कहा कि रिश्ते तरसेम की मैंने पूछा । हमने कहा करने तो रिश्ते हम तो हाँ करने वालों में थे तो उनकी अपनी लाइफ है । जहाँ उन्होंने कहा विभाग करवाने को हमने हाँ कर दी । हम आज भी दोनों डॉक्टर ही हैं । यूनिवर्सिटी में दोनों के साथ पढते थे तो अब नहीं होंगे । ऍम की माँ ने हैरानी प्रकट करते हुए पूछा जीत है ऐसा? फिर बोला सारी दुनिया ही अपनी है और मुझे पता है बहन तो क्या पूछना चाहती है ना तो वो जब हैं और न ही फॅमिली अपने मामा के चेहरे की तरफ देखा । मामा के चेहरे की आभा देखकर तरसेम को आश्चर्य का हुआ जीतने बात पूरी की । दामाद अंग्रेज है और छोटा चीनी । कोई कुछ नहीं हुआ । ऍम की माने हिरानी के साथ आखिर सिकोडी मुझे क्या प्रॉब्लम होनी थी? लडके दोनों अच्छे हैं कि बेटियाँ भी कौनसी काम इंटेलिजेंट है हमारा पाकिस्तान को पढाना लिखाना बाकी उनकी लाइफ है जीतने कहा तू तो भाई बिलकुल ही गोरो जैसा बन गया । तकलीफ तो होती है ना लोग क्या कहते होंगे । तरसेम की माँ ने कहा जी फिर हजार बोला अरे नहीं बहन मुझे कोई तकलीफ हुई । असल में लोग दूसरों की परवाह नहीं क्या करते हैं बल्कि आदमी के अंदर ही कोई कॉम्प्लेक्स होता है जिसके असर पहले तो लोगों की परवाह क्या करता है । अगर आदमी के अंदर कोई गांठ हो तो वह किसी की परवाह नहीं क्या करता हम पंजाबियों ने अपनी जब को लडकियों के साथ जुडा हुआ है । देखो गोरे कभी परवाह नहीं करते की उनकी बेटी बहन किसके साथ उठती है । बैठती है के लिए ये सब का प्रश्न नहीं होता । हमारे बच्चों की किसी के संग छोटी मोटी बात हो जाए तो बहुत ज्यादा का चार लोगों में खडा होना दूबर कर देते हैं लोग कोई बढिया बातें नहीं हमारे लोगों की और इस समय के साथ हमें बदलना चाहिए । ये जो हमारे अंदर गांठे बंदी हुई है ना इन्हें खोलना पडेगा । टॉयलेट सीट पर बैठे तरसेम को अपने मामा की कई काट वाली ये बात याद हुआ । उसने सोचा तो माँ की बहुत ठीक लगती है पर बॅाल वो पता नहीं कब छोडेंगे ऐसा सोचना उन्हें छोड दिया । ऐसा सोचा तरसेम को लगा जैसे आईने के अंदर से उसके प्रतिबिंबन पूछा हूँ उसे कोई बात न सूची । फिर उसने सोचा भी ऐसे कैसे काटी खत्म हो जाती है । उसने अपना ध्यान आईने पर से हटा लिया । ये सवाल तरसेम के दिमाग में जीत मामा की बात सुनकर तब भी उपजा था पर उसने मामा से पूछा नहीं था बल्कि उस ने कहा था हाँ जी ये बडा कठिन काम है हमारे यहाँ पिछले दिनों अपने बजट की लडकी ने नाइयों के लडके से विवाह करवाया है । लोग विवाह तो उसे कहते ही नहीं थे कहते नाइयों के लडके के साथ भाग गई । अब ऐसे लोगों की बातों के पीछे अपने बच्चों की जिंदगी खराब करना कहाँ की समझदारी है? जीत मामा ने कहा था ऐसी बातें तो वही लोग क्या करते हैं जो अपनी बेटियाँ अपनी जात बिरादरी में भी आ चुके होते हैं जिनकी बेटियां नहीं होती । तरसेन के बापू ने गहरी आवास में कहा जैसे वो कहीं बहुत दूर से बोल रहा हूँ काम पर खडे तरसेम को बापू की कहीं ये बात याद आती है उसके दिमाग में गांव वाला तेजा नंबरदार घूम गया था । उसका ख्याल आते ही तरसेन के अंदर एक ही जुटी उसका कडवा कडवा हो गया । नंबर तारीख का बडा कर उसमें ठीक अंदर निकला । तेजा नंबरदार उसको दो आपने पोर्टा दिखाई दिया । मानव कह रहा हूँ अब भी राजी हुए ही हो । दीवार का आधा देने को अगर पहले मान जाते हैं तरसेम ने अपना सिर्फ झटका पर नंबर बार उसका दिमाग में से निकल ही नहीं रहा हूँ उसकी । कहीं हर बात तरसेम के अंदर था । ठाणे कर रही थी । बहुत साल पहले जब अभी तरह से तेरह चौदह साल का था । तेज नंबर आर के साथ तरसेम के बापू का बाहरी घर की चारदीवारी को लेकर झगडा होते होते चला था । तेजा नंबरदार घर की चारदीवारी करने के लिए साझी दीवार करनी चाहता था । पर थर्ड सेम का बापू पशुओं वाले कोठे की चारदिवारी करने को फालतू का खर्च ही समझता था । तरसेम के बापू का इनकार सुनकर नंबरदार के बिचौलियों के हाथ सन्देश आया था । उसने कहा था कोई बात नहीं, नहीं मानते तो नाम आने चारदीवारी को जब उस की लडकियाँ बाहर वाले घर में आया करेंगी तो मैं अपने लडकों को कह दिया करूंगा जो उनकी तरफ वो करके मुझे तो ये सुनते ही तरसेम का बापू एक कोने पर पडी कांदा सी की और बडा ऍम की माँ और बिचौले ने उसको पकडा दिया था । फिर उसको के साथ पंगा लेने में घाटा ही घाटा है कहकर उसे ठंडा कर दिया । पर वो बात जब तरसेम को याद आती तो उसके अंदर एक हलचल सी मचा देती । दिमाग में होती इस हलचल के साथ साथ तरसेम हाथों के साथ मशीन को फीड देता रहा । नहीं हो गई हो साले के बोते होती तो बहन के ऍम अंग हो करना । चाहूँ सोचते हुए तरसेम ने मशीन में से तैयार हुआ पीस बाहर निकालकर बेंच पर पटकता रखा और मैं पीस मशीन की वो इसमें कस दिया । नया पीस तैयार करते हुए तरसेम के सोचों में पर दलों का छाना आ गया तो तरसेम के गांव वाले घर के सामने पडी कटे हुए दरख्त की जड पर बैठ कर अंदर वाले घर से गाली बार करके बाहर वाले घर जाती तरसेम की बहन को घूरता रहता हूँ । आठवीं जमात में पढते तरसेन के हम उम्र जब छाने यापक दल का नाम लेते तो सीम को लगता जैसे उत्तर सेम को ही सुनाकर कह रहे हो उद्यानों तरसेन घर के बाहरी दरवाजे पर जाना भी भरोसा ना करता । जब भी थोडा सा खुलता वो तुरंत से बंद कर देता हूँ । तब से हम को लगा जैसे मशीन की चाय, चाय की आवाज छाना छाना कह रही हो । यदि किसी अच्छे मूड में होता तो मशीन की यही आवाज उसे किसी गीत की तर्ज लगती है और उसके साथ साथ वो भी गुनगुनाने लगता । इस तरह गुनगुनाते हुए वो मशीन को हाथ से फीट देता हुआ उसके साथ एक हो जाता है और उसे समय बीतने का खयाल ही नहीं रहता । ऐसा करते करते उसको मशीन की ऑटोमेटिक स्पीड के होते हुए भी हाथ से फील्ड देने की आदत पड गई थी । आज इस आवास को छाणा छाना महसूस करके तरसेम के अंदर में आग सी मच गई और वह झटके से मशीन को फिट दे बैठा । मैं कल गाली देते हुए तरसेम ने आसपास देखा की कुछ तो नहीं रहा फिर उस चीज की तरफ देखा जिसे इन मिल गढने के कारण निशान पड गया था । उसने पीस मशीन में से बाहर निकाला और उस की तरफ देखता रहा । उस ने सोचा कि इस स्क्रैप बिन में फेंक देंगे । फिर उसने सोचा कि हम आलू रेती से रगडने परेशान हो जाए लेकिन निशान गहरा था । मुझे लगा कि ये निशान इस तरह बैठने वाला नहीं है फिर भी उसने ऍम में नहीं फेंका । उसने सोचा ये कभी किसी दूसरे जॉब में काम आ जाएगा । ये सोच उसने इसे अपने बेंच के नीचे एक कोने में फेंक दिया जहां इस तरह की खराब हुए कई पीस सालों से बिल हुए पडे थे तरसेम के दिमाग में जीत मामा की कहीं बात आई गाठों को सारी उम्र साठ साठ मत उठाए फिरो अंदर के गोल्ड उठाकर बाहर है को मैं बढाकर तरह से हम ने नया पीस मशीन में फिट कर दिया और मशीन को ऑटोमेटिक फीट देकर एक तरफ होकर खडा हो गया । छाणा फिर उसका दिमाग में घूमने लगा लेकिन इस बार पहले वाला छाना नहीं था बल्कि पिछली बार जब उस साल भर पहले इंडिया गया था तब वाला छाना उसकी आंखों के आगे था । जब गली में से गुजर रहा था तो झाना उसको बहुत से पकडकर अपने घर ले गया था और फिर चाय पिलाते हुए अपनी बेटी की तरफ इशारा करते हुए बोला था ऍम ये अपनी बेटी कॉलेज में पडती है । उधर कनाडा में देखना अगर कोई जुगाड बनता हो तो कल रखियों हाँ लडकी तो तुम्हारी सच में कनाडा जाने वाली है । तरसेम ने कहा था जब अवैध छाना के घर से वापस लौटा तो उसके अंदर एक अजीब किस्म का सुकून का तो उसने कई बार अपने ख्यालों में छाने की बेटी को नैनी के तौर पर कनाडा मंगवाकर एक बेसमेंट में रखेल बना कर रखा है । छाणा की बेटी के साथ रासलीला के बारे में सोचकर तरसेम शरूर में आ जाता हूँ । उसके अंदर एक अलग किस्म कर्णशूल अच्छा जाता हूँ । लेकिन आज मशीन पर खडे तरसेम के खयाल जब छाना से होते हुए उसकी बेटी तक पहुंचे । उसके अंगों में कोई हरकत में हुई है और अगले ही पल उसे अपनी बेटी गुरमीत का चेहरा दिखाई दिया । उत्तर सिंह को जवान हो गई लगी । ऍम ने अपने सिर को झटका और पानी की बॉटल में से घूम खडा उल्टी सीधी बातें सोचकर आज कोई यूज ऍम करवा बैठा हूँ । ये खयाल आते ही तरसेम ने मशीन बंद कर दी और लंबी लंबी सांस लेने लगा । फिर उसने सोचा कि क्यों न लीड हैंड होने का लाभ उठाए और फिर उसने नए आए मैटीरियल और टुल्लू की देख रेख में अपने आपको उलझा लिया । लंच ब्रेक के समय भी उल्लंन शुरू में नहीं गया । वो अपने सहकर्मियों से बच रहा था । रात वाली खबर का जिक्र ना छेड बैठे सवेरे जब मुकाम पर पहुंचा था तभी ब्राइन ने जिक्र छेड दिया था ड्राइंग को मानो मुश्किल से वक्त मिला था अपनी दलीलों को सब साबित करने के लिए । ऍम और ड्राइंग बहुत बार अरेंज मैरिज पर बहस कर चुके थे । ब्राइन कि अरेंज मैरिज के खिलाफ दलीलों के जवाब जब तरसेम के पास खत्म हो जाते हैं तो वह बात खत्म करते हुए कहता, अच्छा बता तलाक । अरेंज मैरिज वाले हमारे लोगों के ज्यादा होते हैं तुम्हारे प्रेम विवाह वालों के । और आज जब ब्रायन ने तरसेन के काम पर पहुंचते ही खबर वाली बात शुरू कर दी तो तरसेम नहीं जल्दी जल्दी उसकी दो एक बातों का जवाब लेकर पीठ घुमारली । आज दिन भर ऐसी बातें होंगी । सोच कर तरह चीन की आंखें सुन लगने लगी । उसका मन हुआ की घर वापस चला जाए और अगले ही बाल उसने इस ख्याल को छोड दिया । कर दे रहे बातें दिहाडी जरूर खराब करनी है । ये सोचकर वह हॉस्टल में घुस गया । उसने अपनी आंखों पर ठंडे पानी के छींटे मारे और मशीन शॉप में जाकर घडी के आठ बजने से दो चार मिनट पहले ही एयर कंप्रेशर चला दिया, जिसके चलने की आवाज का मतलब था की बातों का समय समाप्त । उसके सहकर्मियों ने उसकी तरफ घूरकर देखा और उस ने किसी की परवाह किए बगैर अपनी मिलिंग मशीन चला दी । लेकिन काम पर से घर लौटते समय पंजाबी रेडियो पर फिर उसी खबर की चर्चा चल रही थी । रेडियो संचार बोल रहा था । ये बहुत दुर्भाग्य की बात है कि हम कनाडा जैसे बडे देश में रहते हुए भी अपनी संकीर्ण सोचों से पीछा नहीं छुडा सके । ऍम फॅस अगला वक्ता बोलने लगा । जवाब बात ऐसी है कि हमने इस देश में आकर दवाई तो बहुत कर रहे लेकिन बच्चों की तरफ ध्यान ही नहीं दे सके । अरे अगर हम ध्यान नहीं देंगे तो यहाँ के कल्चर को अडॉप्ट करेंगे ही । जब हमारी बच्चियां छोटी थी, हमने उन्हें इंडिया भेज दिया । मेरी पत्नी वही रही । गर्मियों की छुट्टियों में कभी कबार इधर आ जाते । बेटियाँ बडी होकर आई । इधर अपने कल्चर के बारे में जानती है । वह कुर्वानी तो करनी पडती है जी रेडियो संचालक बोला मेहरवानी जी कल्चर एक जगह खडा नहीं रहता । इंडिया में भी अब वो कल्चर नहीं रहा जो आप वहाँ छोड आए थे । बच्चों द्वारा अपनी इच्छानुसार जीवन साथी चुनने से कल्चर में विकास हुआ, निराश नहीं । तरसेम ये सब सुनता । घर पहुंचकर टॉयलेट सीट पर जा बैठा । उसका दिमाग में रेडियो वाले वक्ता की बात घुमाने लगी जो बच्चों के पालन पोषण के लिए उन्हें इंडिया भेजने की बात कर रहा था । इसी तरह एक दिन मनदीप ने कहा था जैसे मुस्लिम कराई थी की किसी की कुमारी लडकी बिना विवाह करवाए अपने बॉय फ्रेंड के साथ रहने लगी थी । उस दिन तरसेम कुछ देर सोचता रहा था । फिर बोला था माँ बाप दोनों ही चाहिए होते हैं । बच्चों को जब बडे हो रहे होते हैं तो यु ही बातें किया करते हैं । रेडियो पर ऑफ इंडिया में कौन सा सारे लगी निकलते हैं, तुम्हारी मर्जी है तो वही ज्यादा चिंता सताती रहती है जब किसी की बेटी बहन को लेकर बात सुना करते हैं । कुछ देर बाद फिर वो बोली थी पता नहीं क्या होगा ऐसा दिन दिखाना रब्बा किसी को टॉयलेट सीट पर बैठे तरसेम ने भी पता नहीं क्या होगा । सोच कर अपने हाथ ऊपर की और उठाए तो मुंबई बोला रक्षा करना । परमात्मा रात भी वही बोला था जब उसने टीवी पर ग्यारह बजे वाले समाचार में ये समाचार सुना था । फिर सारी रात करवटें बदलते बताई थी । जब भी आंखे बंद करता उसको समाचार वाले माँ बाप अपने और गुरनीत में बदलते महसूस होते हैं और वोटर कर छत से आके खोल देता । ऐसी रात के बाद जब सवेरे उठकर तरसेन काम पर पहुंचा तो ब्राइन मानो उसी का इंतजार कर रहा था । उसने तरसेम से कहा था और एक ये जो तेरे कंट्री मैंने अपनी बेटी का कत्ल किया है ना उसके बारे में क्या सोचता है ये क्या सोचना है । कहकर तरसेम चुप हो गया । वो बात को आगे नहीं बढाना चाहता था लेकिन ब्राइन आज बात को इतनी जल्दी खत्म नहीं कर देना चाहता था । उसने कहा मेरे विचार में ऐसे पिता को सबसे सख्त सजा मिलनी चाहिए । इनके दिमाग में खी जुडी बोला ब्रायन ये हमारी सभ्यता से जुडा मामला है तो नहीं समझ सकता है ये कैसा सभ्यता से जुडा मामला है तो बेटियों को कत्ल करने के लिए उकसाता है । बच्चों को पढाओ लिखाओ, अच्छे नैतिक मूल्य सिखाओ, जीवन साथी चुनने का हक बच्चे को होना चाहिए । उसने ही सारी उम्र अपने साथ ही के साथ व्यतीत करनी होती है । नहीं बचाई अपना बुनियादी हक मांगता है इसका मतलब ये तो नहीं इसका तत्व कर दूँ ब्लॅक और वो ऍम मरवाता अगर इतना करता हूँ तस्वीर दिल में आया कि कहे और उसने कहा तो उन सब आप अपनी बेटी का कत्ल करना चाहता है । फिर ब्राइन ने प्रश्न सूचक नजरों से तरसेन की तरफ देखा तो नहीं समझेगा कहकर तरह से उसके पास से दूर हो गया । बात को समझे बिना ही लेक्चर शुरू कर देते हैं । कहा तो है कि तुम्हारा अपना कल्चर है और हमारा अपना । तरसेम ने मन में ही सोचा । ब्राइन किए बातें तरसेम के दिमाग में खलबली मचाने लगे । बच्चों को पढाओ लिखाओ जो कि तुम्हारा फर्ज है । ऍम को लगा मानो ये बातें ब्राइन नहीं बल्कि जीत मामा कह रहा हूँ । पर अगले ही पल उसके दिमाग में रेडियो के किसी वक्ता की बात गूंजी जो उसने आज टॉक शो में सुनी थी । डॉक्टरों में कोई बोल रहा था भाई साहब, अब सारे गोरों के अखबार रेडियो सा आदमी को बुरा कहे जाते हैं । दे गाने घर में लगी आग एक तमाशा होती है आदमी ने भाई बन्दों में उठना बैठना भी होता है और कौनसा पंजाबी आदमी है जो किसी गोरे को दामाद बनाने को तैयार होगा । जब गंदी औलाद कहना ना माने तो आदमी क्या करेगा? जी शुक्रिया जी, ये आपका ख्याल है । कहना न मानने पर औलाद का कत्ल कर दें । बोलने वाले वक्ता को बीच में ही रोककर रेडियो संचालक ने कहा था संचालक बात याद आते ही तरसेम को लगा जैसे जीत मामा कह रहा हूँ बच्चों को पढाओ लिखाओ । जो आदमी का फर्ज है उन्हें अपनी जब का मसला ना बनाओ । लेकिन अगले ही पल रेडियो वक्ता की आवाज फिर उसके अंदर से उठी । तब से हमने सोचा आदमी को सोसाइटी में उठना बैठना भी होता है । अगर चार लोगों में कोई कह दे कि फैलाने की बेटी गोरे के साथ भाग गई तो क्या रह जाता है? बंदे का क्या करे? आदमी सोचते हुए तरसेम ने अनुभव किया कि उसका सर फट रहा है । उसने बेवसी के साथ ही नहीं की तरफ देखा लेकिन आई में उसको खाली खाली सा लगा हेलो! आप भी कुछ बोल तरसेन बुदबुदाया ।

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‘बर्फखोर हवायें’ कहानियों का संग्रह है जिसमें 12 चुनिंदा कहानियां शामिल है। कहानियों की सबसे बड़ी खूबी है कि वे लिसनर्स को निराश नहीं करेंगे। इन कहानियों में समाज, रिश्‍तें, परिवार, सामाजिक संस्‍कर, रूढि़यों, सीख शामिल हैं, जो लिसनर्स को उनसे जोड़ता है। Voiceover Artist : Ashish Jain Author : Harpreet Sekha Script Writer : Subhash Neerav
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