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19. Top Se Aage Kuch Nahi

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Chanakya (Kauṭilya) is known to be one of the greatest philosophers, advisors, and teachers in the Indian history. It was he who helped Chandragupta Morya to rise to power and inscribe his name as one of the greatest kings ever in Indian history. Chanakya’s book is famously known as Chanakya Neeti-Shastra or Kauṭilya Niti. Chanakya’s wisdom and wits help the present-day man as well to think in the broader spectrum. He is attributed as the pioneer of arthshastra (Economics). His knowledge about Politics, kings, market, and money is so accurate that it is still relevant for the present times. Chanakya Niti was originally written in Sanskrit language but later translated into English, Hindi and many other languages. Listen to the audiobook based on Chanakya Niti in Hindi either online or download it for free. It is one of the best audiobooks available in our collection. It is this book, Chanakya Niti, which helps you achieve anything in your life and plan accordingly. चाणक्य (कौटिल्य) भारतीय इतिहास के महानतम दार्शनिकों, सलाहकारों और शिक्षकों में से एक माने जाते हैं। उन्होंने ही चंद्रगुप्त मोरया को सत्ता में आने में मदद की और भारतीय इतिहास में अब तक के महानतम राजाओं में से एक के रूप में अपना नाम अंकित किया । चाणक्य की किताब को चाणक्य नीति-शास्त्र या कौटिल्य नीति के नाम से जाना जाता है। चाणक्य की बुद्धि और बुद्धिमत्ता वर्तमान व्यक्ति को व्यापक तौर पर सोचने में भी मदद करती है । उन्हें आर्थशास्त्र के पुरोधा के रूप में जाना जाता है । राजनीति, राजाओं, बाजार और धन के बारे में उनका ज्ञान इतना सटीक था कि यह आज भी वर्तमान समय के लिए प्रासंगिक है । चाणक्य नीति मूल रूप से संस्कृत भाषा में लिखी गई थी लेकिन बाद में अंग्रेजी, हिंदी और कई अन्य भाषाओं में अनुवादित किया गया। चाणक्य नीति पर आधारित ऑडियो बुक को हिंदी में या तो ऑनलाइन सुनें या फिर मुफ्त में डाउनलोड करें। यह हमारे संग्रह में उपलब्ध सर्वोत्तम ऑडियो बुक में से एक है। यह पुस्तक चाणक्य नीति है, जो आपको अपने जीवन में कुछ भी हासिल करने और तदनुसार योजना बनाने में मदद करती है।
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नहीं कर सकती हूँ । अभी तक आप सुन रहे थे चाणक्य नीति का सोमवार है अब हम बढते हैं सत्र में और अंतिम अध्याय क्यों? आप सुन रहे हैं कुछ फॅसा तो चलिए आरंभ करते हैं सत्रह अध्याय की शुरूआत मैच में जाना क्या गुरु का महत्व बताते हैं । वो कहते हैं कि जिस प्रकार परपुरुष से गर्भधारण करने वाली स्त्री समाज में शोभा नहीं पाती उसी प्रकार गुरु के चरणों में बैठकर विद्या प्राप्त न करके इधर उधर से पुस्तकें पढकर जो ज्ञान प्राप्त करते हैं वे विद्वानों की सभा में शोभा नहीं पाते क्योंकि उनका ज्ञान अधूरा होता है । आधुनिक ज्ञान के कारण विषेक रही बाहर के पात्र बन जाते हैं । आगे समझाते हैं कि उपकार का बदला उपकार से देना चाहिए और हिंसा वाले के साथ हिंसा करनी चाहिए । वहां दोष नहीं लगता क्योंकि दुष्ट के साथ दुष्टता का व्यवहार ही करना ठीक रहता है । चाहे अपने इस इस लोग में कहा है कि यू तो सबके साथ प्रीतिपूर्वक व्यवहार करना चाहिए पर दोस्ती के साथ प्रीतिपूर्वक व्यवहार करना उसकी दुष्टता को बढावा देना होता है । आगे कहते हैं कि तब मैं असीम शक्ति है तब के द्वारा सभी कुछ प्राप्त किया जा सकता है जो दूर है । बहुत अधिक दूर हैं जो बहुत कठिनता से प्राप्त होने वाला है और बहुत दूर स्थित है । ऐसे साथी को तपस्या के द्वारा ही प्राप्त किया जा सकता है । तब के द्वारा तो ईश्वर को भी प्राप्त किया जा सकते हैं अगर जीवन में साधना का विशेष महत्व है । आगे कहते हैं कि लोग सबसे बडा अवगुण हैं, परनिंदा सबसे बडा पाप है । सत्य सबसे बडा तब है और मन की पवित्रता सभी तीर्थों में जाने से बेहतर है । सब जनता सबसे बडा गुण हैं और यश सबसे उत्तम आभूषण है । आगे कहते हैं की शक्ति ही मनुष्य साधु होता है । धनहीन व्यक्ति ब्रह्मचारी होता है, रोगी व्यक्ति दे वक्त होता है और बूढी स्त्री पतिव्रता होती है । भाव यह है कि ये सभी लोग असमर्थ रहने के कारण से ही ऐसे हैं । तहत जो व्यक्ति प्रयास नहीं करता हूँ, परिश्रम नहीं करता, आलसी और निकम्मा होकर अपने आपको ऐसा बना लेता है । परिस्थितियों से घबराकर मोमोज लेना कायर मनुष्य का काम है । व्यक्ति को तो चाहिए कि मैं अपना कार्य पूरे मनोयोग से करें । सच्चे अर्थों में वही धर्म है । साहब के दात में विश्व है, मक्की के सिर में विश्व है, बिच चुकी पूछना होता है । लेकिन दूसरे व्यक्ति के पूरे शरीर अच्छा सारे अंगों में देश होता है । भाव यह है कि दुर्जन व्यक्ति हर प्रकार से सज्जनों को कष्ट पहुंचाने वाला होता है । उसका साथ किसी भी रूप में सुखकारी नहीं है । बुद्धिमान बेटी सदैव ऐसे दूसरे व्यक्ति से बचकर चलते हैं क्योंकि दुर्जन व्यक्ति के तो सारे अंग में भरा होता है । आगे समझाते हैं की हाथ की शोभा दान से होती है न की कंगन रहने से होती है । शरीर की शुद्धि स्नान से होती है ना कि चंदन लगाने से होती है । बडो की तरफ थी, सम्मान करने से होती है ना कि भोजन कराने से । शरीर की मुक्ति ज्ञान से होती है ना कि शरीर का शंकार करने से होती है । भाव यह है कि आज नंबरों से शरीर को शुद्ध नहीं किया जा सकता । दान देने, स्वच्छ जल से स्नान करने, बडों का सम्मान करने और उचित ज्ञान प्राप्ति के उपरांत ही मनुष्य का जीवन सफल होता है । जिन सज्जनों की हिरदय में परोपकार की भावना जाग्रत रहती है उनकी तमाम पत्तिया अपने आप दूर हो जाती है और उन्हें पद, पद पर संपत्ति एवं धन की प्राप्ति होती है । आगे समझाते हैं कि भोजन नींद, डर संभव ये सभी गुण मनुष्य और पशुओं में समान रूप से दिखाई और पाई जाती हैं । पशुओं की अपेक्षा मनुष्य में केवल ज्ञान मतलब बुद्धि एक विशेष गुण है तो उसे अलग बनाता है । अतः ज्ञान के बिना मनुष्य पशु के समान ही हो जाता है और आगे समझाते हैं कि नीचे की और देखती हुई एक अधेड वृद्ध स्त्री से कोई पूछता है कि अरे बोलो तो नीचे क्या देख रही हो? पृथ्वी पर तुम्हारा क्या गिर गया? तो वहाँ इस्त्री कहती है, अरे मूर्ख, तुम नहीं जानते हैं । मेरा युवावस्था रूपी मोटी नीचे गिरकर नष्ट हो गया है । कहने का अर्थ यह है कि योवन का मोटी एक बार नष्ट हो जाए और था जवानी एक बार चली जाए तो फिर लौटकर नहीं आती । इसलिए आप सभी अपनी जवानी का सही उपयोग कीजिए, अपने लक्ष्यों को प्राप्त कीजिए और अपनी जिंदगी में कुछ ऐसा हासिल कर जाइए के मरने के बाद भी आप लोगों के दिलों में रहे और यहीं पर समाप्त होता है चाणक्य नीति का अंतिम अध्याय । आशा करता इस यात्रा के दौरान आपको बहुत सारी चीजें सीखने को मिली होगी । अपनी जिंदगी को बदलने के लिए मिली होगी । बहुत ही जल्दी में आप सभी के लिए कुछ तो ऐसे पर लेकर आऊंगा । अगले मोटिवेशन सीरीज तब तक के लिए साइनिंग जी मोटिवेशन हूँ

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Chanakya (Kauṭilya) is known to be one of the greatest philosophers, advisors, and teachers in the Indian history. It was he who helped Chandragupta Morya to rise to power and inscribe his name as one of the greatest kings ever in Indian history. Chanakya’s book is famously known as Chanakya Neeti-Shastra or Kauṭilya Niti. Chanakya’s wisdom and wits help the present-day man as well to think in the broader spectrum. He is attributed as the pioneer of arthshastra (Economics). His knowledge about Politics, kings, market, and money is so accurate that it is still relevant for the present times. Chanakya Niti was originally written in Sanskrit language but later translated into English, Hindi and many other languages. Listen to the audiobook based on Chanakya Niti in Hindi either online or download it for free. It is one of the best audiobooks available in our collection. It is this book, Chanakya Niti, which helps you achieve anything in your life and plan accordingly. चाणक्य (कौटिल्य) भारतीय इतिहास के महानतम दार्शनिकों, सलाहकारों और शिक्षकों में से एक माने जाते हैं। उन्होंने ही चंद्रगुप्त मोरया को सत्ता में आने में मदद की और भारतीय इतिहास में अब तक के महानतम राजाओं में से एक के रूप में अपना नाम अंकित किया । चाणक्य की किताब को चाणक्य नीति-शास्त्र या कौटिल्य नीति के नाम से जाना जाता है। चाणक्य की बुद्धि और बुद्धिमत्ता वर्तमान व्यक्ति को व्यापक तौर पर सोचने में भी मदद करती है । उन्हें आर्थशास्त्र के पुरोधा के रूप में जाना जाता है । राजनीति, राजाओं, बाजार और धन के बारे में उनका ज्ञान इतना सटीक था कि यह आज भी वर्तमान समय के लिए प्रासंगिक है । चाणक्य नीति मूल रूप से संस्कृत भाषा में लिखी गई थी लेकिन बाद में अंग्रेजी, हिंदी और कई अन्य भाषाओं में अनुवादित किया गया। चाणक्य नीति पर आधारित ऑडियो बुक को हिंदी में या तो ऑनलाइन सुनें या फिर मुफ्त में डाउनलोड करें। यह हमारे संग्रह में उपलब्ध सर्वोत्तम ऑडियो बुक में से एक है। यह पुस्तक चाणक्य नीति है, जो आपको अपने जीवन में कुछ भी हासिल करने और तदनुसार योजना बनाने में मदद करती है।
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