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जिनी पुलिस भाग 6

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जिनी पुलिस भाग  6 in  | undefined undefined मे |  Audio book and podcasts
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लोहित बंसल, एक टेकी है, जो अमेरिका में अपनी कंपनी का हेडक्वाटर खोलकर, दुनिया के अमीर लोगों में शुमार होना चाहता है। तृषा दत्ता बेहतरीन स्कूल टीचर है, जो इंडिया में ही रहकर स्टूडेंट्स को क़ाबिल बनाना चाहती है। दोनों में प्यार हो जाता है, लेकिन उनकी शादी से ठीक पहले वो होता है जिसके लिए दिल्ली बदनाम है। सुनिए, कुकुफम पे आपकी सबसे पसंदिता किताब "है दिल का क्या कसूर" के लेखक अर्पित अग्रवाल की नई ऑडियोबुक “जिनी पुलिस”। ये जानने के लिए की कैसे एक खुशमिजाज लड़का अपनी मिलियन डॉलर कंपनी को दांव पे लगा कर बनता है एक हीरो, और एक विलियन, इस सिस्टम से लड़ने के लिए, और अपराध को जड़ से ख़त्म करने के लिए।
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भारत पांच लोगी तो उस की टीम ने जमीन आसमान एक करके लोहित की माँ के लिए रोबोट विकसित कर दिया । लोहित के घर ले जाने से पहले अमन ने रोबोट की और देखते हुए कहा इससे कोई नाम देना चाहिए । लोहित ने चौंकते हुए पूछा भला एक रोबोट को नाम देने की क्या जरूरत है? अमन ने पूछा तो वाइस कमांड देने के लिए तो मैं ऐसे क्या कहकर बुखार हो गई । ये वो वोट है तो मैं ऐसे रोबोट करूंगा भरे कितना बुरा लगेगा । उसे तो इंसान हो तो क्या? मैं तो में सिर्फ इंसान का हूँ । हमारे आस पास बहुत से दूसरे इंसान है मगर रोबोट एक ही है । मुझे नहीं लगता कि ये कोई उलझन की बात है । फिर भी एक प्यारा सा नाम रखने में भला क्या हर्ज है । लोग इतने थोडा सोचने के बाद कहा थी कि अगर तुम इतना चाहते हो तो रोबो ने कहा कैसा रहेगा सी किसी टीवी सीरियल के विलन की जैसा लगता है अच्छा तो फिर क्यों ना मैं तृषा कहकर बुला हूँ । उसका नाम लेते हुए रोहित शर्मा गया अमन नीललोहित का मजाक उडाते हुए कहा मगर फिर तुम्हारी शादी के बाद हमारे घर में दो तृषा होगी तो उनका होगी कि त्रिशा मुझे किस करूँ और वह रोबोट तो मैं किस कर देगी । ठीक है मैं समझ गया लोग इतने फिर कहा की रोबोट हमारी इच्छाओं को किसी जिनकी तरह पूरा करेगा तो क्यों ना हम इसी जीने का है । अमन ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा अरे वा जिनी एक बेहतरीन नाम है । लोहित ने उत्सुकता से अपनी माँ को फोन किया और कहा माँ में उसे लेकर घर आ रहा हूँ या तो मुझसे मिलने के लिए तैयार हूँ । हाँ बेटा मैं तो तब से तैयार हो जब तो उन्हें पहली बार उसका जिक्र किया था ही जल दिया मेरी बहु को लेकर तेरे पापा और मैं उसे देखने के लिए बहुत एक्साइटेड है । हाँ वो आपकी बहु नहीं है । माने और भी ज्यादा खुशी से कहा तो क्या वो बाई है नहीं वो बाई भी नहीं है । मैं समझ गई तो तेरी गर्लफ्रेंड होगी है ना तुझे उसे हमारी बहू कहने में शर्म आ रही होगी । शर्मा मत हम तुम्हारी तरफ से उसके माता पिता से बात कर लेंगे । मैंने कहाँ और फोन रख दिया? लोहित सोचने लगा कि जब पहली बार अपनी तृषा को माँ से मिलने लेकर जाएगा तो क्या तब बीमा इतनी ही खुश होगी जैसा फिल्मों में दिखाया जाता है जिन्हें वैसी रोबोट नहीं है । देखने में यह एक मशीन की तरह है, इंसानों की तरह नहीं । ये मोटर पाॅड गैर जैसे मैकैनिकल पार्ट से लैस है जो से आगे बढने, पकडने और मोडने में मदद करती है । इसमें आंखों की तरह ऑपटिकल सेंसर है । कान की तरह माइक्रोफोन और ये की तरह स्पीकर है । सबसे इंपॉर्टेंट बात ये है कि ये सोच समझकर खुद निर्णय लेने में सक्षम है और ये सब पॉसिबल हो पाया है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से । लोहित की कंपनी कई सालों से इसी तरह के प्रोजेक्ट पर काम कर रही थी इसीलिए इसे बनाना उनके लिए मुश्किल नहीं था । लोहित उसे लेकर घर पहुंचा और जिनको अपना पहला वाइस कमांड दिया जिन्हें दरवाजे की घंटी बजाओ । ओके लोहित जिन्होंने जवाब दिया और अपने रोबोटिक हाथ से डोरबैल बजाई । अपनी होने वाली बहू का स्वागत करने के लिए माने । हाथों में आरती की थाली लेकर दरवाजा खोला । जैसे ही माने रोबोट को देखा तो वहाँ जोर से चलाई हे भगवान और आरती की थाली हाथ से छूट गई । नमस्ते हाँ, मैं जी नहीं हूँ । रोबोट ने अपनी गर्दन घुमाते हुए कहा मुझे लगा था कि तुम किसी लडकी को हम से मिलने ला रहे हूँ लेकिन तुम्हें क्या लेकर आए हो? जिन्होंने अपनी रोबोटिक स्वर में कहा मैं किसी लडकी से कम नहीं हुआ । जी नहीं माँ को बताओ तो उनके लिए क्या क्या कर सकती हूँ । मैं घर की सभी काम कर सकती हूँ जैसे कि झाडू लगाना, वाशिंग मशीन में कपडे धोना, आपके हाथ पैर दबाना, इंटरनेट से रेसिपी डाउनलोड करके खाना पकाना या मैं आपकी रेसिपी सीख भी सकती हूँ । मैंने हस्कर कहा ये इतनी बुरी भी नहीं है । लोहित ने राहत की सांस ली और सोफे पर बैठ गया जिन्होंने फिर कहा एक और बात माँ मैं आपके साथ डी ए सारी बातें भी कर सकती हूँ होते हैं ।

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लोहित बंसल, एक टेकी है, जो अमेरिका में अपनी कंपनी का हेडक्वाटर खोलकर, दुनिया के अमीर लोगों में शुमार होना चाहता है। तृषा दत्ता बेहतरीन स्कूल टीचर है, जो इंडिया में ही रहकर स्टूडेंट्स को क़ाबिल बनाना चाहती है। दोनों में प्यार हो जाता है, लेकिन उनकी शादी से ठीक पहले वो होता है जिसके लिए दिल्ली बदनाम है। सुनिए, कुकुफम पे आपकी सबसे पसंदिता किताब "है दिल का क्या कसूर" के लेखक अर्पित अग्रवाल की नई ऑडियोबुक “जिनी पुलिस”। ये जानने के लिए की कैसे एक खुशमिजाज लड़का अपनी मिलियन डॉलर कंपनी को दांव पे लगा कर बनता है एक हीरो, और एक विलियन, इस सिस्टम से लड़ने के लिए, और अपराध को जड़ से ख़त्म करने के लिए।
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