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घुड़सवार शैतान -02

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Publisher:- FlyDreams Publications ... Buy Now:- https://www.amazon.in/dp/B086RR291Q/ ..... खौफ...कदमों की आहट कहानी संग्रह में खौफनाक डर शुरू से अंत तक बना रहता है। इसकी प्रत्‍येक कहानियां खौफ पैदा करती हैं। हॉरर कहानियों का खौफ क्‍या होता है, इस कहानी संग्रह को सुनकर आप समझ जाएंगे! कहानियों की घटनाएं आस-पास होते हुए प्रतीत होती हैं। आप भी सुनें बिना नहीं रह पाएंगे, तो अभी सुनें खौफ...कदमों की आहट …!
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बहुत सवाल शैतान बहुत तो कुछ तो हम प्रदान होगा की आवाज जानी पहचानी से लगे थोडी देर में आवाजाही उठेगा भी । हम लोग जायेंगे क्या बजा देते की थी और मुझे पूरी ताकत हिलाते हुए बोल रहा था । जब मैंने आके खोली तो चारों तरफ घनघोर अंधेरा था । हम तीनों के अलावा वहाँ कोई भी मौजूद नहीं था । हर्षित अपने आंखों को मिल रहा था और जम्हाई ले रहा था । मैं झटके से उठ गया । मैंने कहा था क्या हुआ यहाँ के सभी लोग किधर गए देते । अपने हाथ की घडी की तरफ इशारा करते हुए बताया भाई तो उस वक्त रात के साढे बारह बज रहे हैं और रामलीला का आज का अंक खत्म हुए लगभग दो घंटे हो चले हैं । हम तीन हो गए थे वो तो भला मानो की मेरी आठ अभी खुल रही । इतना सुनते ही हर्षद की नींद पूरी तरह क्यों मंदिर हो गई । उसने भी अपनी आंखों की पुतलियां । चारों तरफ कुमारी और बोला क्या कहा हम लोगों को सोते हुए दो घंटे से भी अधिक समय हो गया तो यहाँ के लोगों ने हमें उठाया क्यों नहीं । उसके बातें सुनकर मैं बोला भाई हम लोग रामलीला अपने गांव में नहीं देखा है । पता है हम लोग दूसरे गांव हैं । यहाँ के गांव वाले हमें नहीं पहचानते । उन्होंने देखा भी होगा तो किसी गांव के हैं । जब उठेंगे तब चले जाएंगे । ऐसा सोच कर हमें छोड दिया होगा । दोनों मेरी इस बात से सहमत हो गए । उनके चेहरे पर आप घबराहट के बादल देख रहे थे । बोला इससे पहले की हमारे घर वाले हम लोगों को ढूंढते ढूंढते यहाँ जाए । हमें यहाँ से निकल जाना चाहिए । ये सुनकर तो उन्होंने अपने अपने मंडे हिलाकर हामी भरी । मेरा कुत्ता जाके भी वही बैठक हम लोगों के घर वापस जाने का कब से इंतजार कर रहा था । हम तीनों एक झटके से बढ चलेगा । सभी के दिल में घबराहट और बेचैनी थी । क्या की इस बार आगे आगे चल रहा था जैसे उसे घर पहुंचने के जल्दी हम लोगों से ज्यादा होगा । अभी कुछ दे रही डाले थे कि मेरे दिमाग में एक योजना को नहीं ना बोला । अरे सुना लेकिन हम खेलते होते हुए चले । वहाँ से हम मात्र दस पंद्रह मिनट नहीं पहुंच जाएंगे । मैं रास्ते में एक पुल भारी को पार करना होगा लेकिन ये सही रहेगा । कुछ भी करो बस मुझे घर चलती पहुंचना । हर्षित चिंता के बारे में बोला लेकिन मैंने सुना है कि वहाँ एक बिना खोपडी का शैतान रहता है । किसको रात के वक्त उधर से निकलने नहीं देता है । आदित्य ने चेतावनी देते हुए कहा था कि आप बेकार की बातें करते हो भला इतनी रात को कोई वहाँ क्या करेगा तो फुलवारी का चौकीदार भी नहीं लगता है । मैं तो कहता हूँ कुछ आम आम खाते डाल लेंगे । मैंने बुलंद आवाज में कहा ये सही रहेगा प्रदान । उधर से जल्दी पहुंच जाएंगे आम के आम और गुठलियों के दाम । हर्षित के इतना कहते ही सभी एक साथ हंस पडे और खेत की पगडंडियों से होते हुए आगे बढ चलेगा । पांच मिनट चलते ही हम पनवारी के पिछले वाले हिस्से पर जा पहुंचे । फुलवारी एक फुटबॉल के मैदान जितनी बडी थी । फुलवारी के चारों तरफ विशालकाय पेड था और चारों तरफ उनकी उनकी कटीली झाडियों से घिरा हुआ था । हमें अंदर घुसने का रास्ता नहीं मिल रहा था । हम सभी के चेहरे उतर गए थे । थोडी देर तक और मशक्कत करने के बाद अंदर जाने के लिए एक रास्ता देखा । उस रास्ते को देखकर लगा कि जंगली जानवर अंदर घुसने के लिए इसका प्रयोग करते होंगे और उनके अक्सर आने जाने से एक छोटा सा रास्ता बन गया था जिससे बैठकर आसानी से खर्चा जा सकता था । आदित्य टॉर्च से प्रकाश दिखा रहा था । सबसे पहले मैं होता मेरे कुछ नही दिया की भी घुस गया । फिर भारी बारिश से हर्षित और आदित्य भी घुस गए । हम लोग फुलवारी के अंदर । अब हम लोगों के चेहरे पर कुछ सुकून था । अंदर चारों तरफ आ नहीं रहा । कुछ भी साफ साफ नहीं दिख रहा था । चाहो तो पूछे थे । लगभग हर तरह के फलों और बहुत पुष्पों की खोज तो हवा के संगठन कह रही थी । वहीं भाजपा से ही हारसिंगार पेड की मनमोहक खुशबू आ रहे थे, जिसे सुनने पर ऐसा लग रहा था कि कुछ देर रोककर उसका आनंद लें । अभी तेज चल रही थी जिससे पेड की पत्तियों से भी अजीब अजीब तरह की आप से आ रहे हैं । देते फुलवारी के दूसरी तरफ जाने के लिए तौर से रास्ता तलाश करते हुए आगे बढा हम तो कभी उसके साथ हो जा रहे । चलते चलते हम लोग कोई के पास पहुंचे को आप फुलवारी के ठीक पीछे पीछे कोई के पास पहुंचते ही अचानक हमें तापमान में गिरावट मैं सोच रही हूँ । अब पहले के मुकाबले ठंड का ज्यादा ऐसा हो रहा था । तभी अचानक होंगे की तरफ होकर के वो तो उससे बहुत में लगा ऍम डाल दिया । इससे पहले मैं कुछ बोलता है देखते बोल पढा तो वो बोल रहा बाहर निकालने का । इस बार करते हैं फॅमिली में हम अपने काम में आते फॅस इतनी कर्कश थे कि हम तीनों ने एक दूसरे को बिलकुल जोर से पकड लिया । ऍम की तरफ सभी के समय चार कर का आपने लगे और सामने शैतान थोडे परसवार था जिसके हाथ में तुम्हारा कैसा कोई हजार का अच्छा जी पाँच थे कि उसका सर तो होता ही नहीं । ऍम सिर का नामोनिशान नहीं हूँ । तीनों एक दूसरे के चेहरे को देखने लगे हैं । ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे हम उन्होंने अपनी सोचने समझने की क्षमता ही हो बैठी हूँ । हालांकि बिना सर के कैसे हो सकता है? सामने का फाॅर इश्यू देखकर हमारे हाथ हूँ । आपने लगे थे समझ में नहीं आ रहा था कि अब क्या करें । हम लोग पूरी तरह फस चुके थे । बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता था जहाँ वो शैतान खोडे के ऊपर खुद तलवार नवाज हजार लेकर बैठा था और जोर जोर से दहाडे मार मार के हंस रहा था ये । आदित्य ने कहा देखा मैंने तुम लोगों को यहाँ घुसने से पहले ही आगाह कर दिया था । लेकिन तुम लोगों ने मेरी बात को मजाक में ले लिया था । मुझे इतनी जल्दी नहीं मतलब लोग अंजाम भुगतने को तैयार रहो । ऐसा कहकर उसने अपना हाथ छोडा है और बाहर जाने वाले द्वार की तरफ भाग चला । अचानक उसके साथ आपने हमें और संशय में डाल दिया । आप मुझे लगने, लगातार खेल सबकी मौत का से मैं बाहर मैं होगा । मुझे जल्दी कोई तरके निकालकर इन सभी को सही सलामत बाहर निकालना होगा । वैसे उधेडबुन में लग रहा था कि क्या किया जाए । तभी हर्षित बोला और ऐसे नहीं होता क्या देना । उसने में पहले ही चेतावनी दी थी कि वापस चले जाओ नहीं तो अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहना । इतना कहते ही वो फफक फफककर रो पडा था । जी जी समझ में भी नहीं आ रहा था के मैं आदित्य को समझाने के लिए चाहूंगा । हर्षद को चुप करूँ क्योंकि हर्षित मेरे पास में था आपका । इसलिए मैंने हर्षित के कंधे पर हाथ रखा और उस को समझाते हुए बोला था देखो मुझे समय होने होने का नहीं है । इस मैं समझदारी से काम लेना होगा । मेरा यकीन करूँ मैं तुम सभी को यहाँ से सुरक्षित बाहर निकाल लूँगा फॅार कुछ नहीं हुआ । मैंने अपने ईष्टदेव है तो पापा को मन ही मन याद किया और उनसे मदद मांगी । आगे से फुलवारी से बाहर जाने वाले थे । बाहर से बस कुछ कदम के फासले पर ही था कि अचानक ऍम उसके सामने प्रकट हो गया तो बिना सिर वाला शैतान बिल्कुल । हम लोगों के सामने अपने खोडे के ऊपर को तलवार तमाम और साथ लेकर बैठा था । कुछ हजार से कुछ वक्त की बहुत थक पक रही थी तो संसार को उठाकर । जैसे उसने आदित्य के ऊपर प्रहार करने के लिए अपना हाथ घुमाया ही था कि तभी अचानक क्या की उस पर चलता हूँ ऍम हम लोगों को ही देख कर बडी खुशी हुई लेकिन हमारे ये खुशी ज्यादा देर तक देखना सके । चलती से हर्षित का हाथ पकडा और उसको लेकर आदित्य की तरफ पहुंच गए । मैंने फिर आते थे का हाथ पकडा और उनको लेकर फुलवानी से बाहर निकलने वाले तो हर की तरफ चल पडा हूँ । तभी कुछ बताना चाहता हूँ पर फिर से हम लोगों के सामने खडा हूँ । कुछ शैतानी अपने सौ हजार को उठाया और जैसे ही हैं फिर से प्रहार करने को तैयार था की तभी ऍम मैं ना देखते सब समझाया कि मुझे अब आगे क्या करना है । मैंने हर्षित और आदित्य से कहा कि अब कोई भी किसी का हाथ छोडे और मैं चाहती के पीछे रहते हुए ही आगे बढते जाना है । हम तीनों ने ऐसा ही किया और एक दूसरे का हाथ इतनी मजबूती से पकड लिया । ऍम हो हम जैसे जैसे आगे बढते हो जाता है कि बिहार पाने वालों में से नहीं था तो भी बार बार उच्चतम पर चल पडता है । काफी मशक्कत करने के बाद हम लोग पनवारी से बाहर निकलने वाले द्वार से सडक पर आ चुके थे । हमारे बाहर निकलते हैं । वो घटना भी बंद हो गई । खाने में ही मान अपनी ईष्ट देव को हाथ जोडकर टाॅल से उनका शुक्रिया अदा किया । हम तीनों चैट पर अचानक झपट पडे और उस पर भी शुभ आर तुम्हार लुटाने लगे । हम तीनों को आज उस पर बहुत प्यारा रहा था । थोडी देर तुलार करने के बाद हम लोग घर पहुंच गए आते थे । उस रात हम लोगों के साथ मेरे घर पर ही रुक गया था । अगले शाम आदित्य हमारे घर आया और उसने कहा कि उसे कुछ जरूरी बात करनी है । ऐसा कहकर वामदलों का समूह से खिलाने के बाद घर पर बोल कर सडक की तरफ ले गया तो वहां पहुंचकर चप्पल बारी की तरफ नजर गई । तब दिन में भी फुलवारी बहुत ही अपनी लग रही थी । तो इतनी ज्यादा घंटे की सूरज का प्रकाश भी अंदर जाने में सक्षम नहीं । समोसे की थैली पर जाते आदित्य ने बताया जानती हूँ कल रात दिन खोपडी वाला शैतान मिला था तो कौन था? मैंने कहा हूँ नहीं तो लेकिन तुझे कैसे पता कि कौन था? वो बोला ये बात डेढ सौ साल पहले किया । तब राजा देवेंद्र प्रताप का बोल पाला था । बहुत बढिया प्रताप फिर आ जाते हो । इस गांव को मिलाकर पूरे एक सौ पच्चीस गांव उनके आधीन थे । जिस फुलवारी में हम लोग कल गए थे, एक जमाने में बहुत पडी और खनी हुआ करती थी । वो उसकी रक्षा राजा का एक खास सेवक करता था जिसका नाम था जंग बहादुर सिंह बहुत बलशाली और पराक्रमी होता था वो दूर दूर तक उसकी ख्याति फैली हुई थी । उसने पूरी जिंदगी इस फुलवारी की रक्षा करने का प्रण लिया था तो राजा के सभी कामों को अपना दायित्व मानकर करता हूँ ऍम उनके किसी ऍम पीछे से आकर उनके सर को धड से अलग कर दिया जंगबहादुर सिंह अचानक हुए उस हमले के लिए तैयार नहीं है । कहते हैं कि सर तो वही धरती पर गिर गया लेकिन सिर धड से अलग होने के बावजूद उसने उस व्यक्ति को मार गिराया था जिसमें जंगबहादुर पर पीछे से हमला किया था । लडते लडते हैं वो इसे फुलवारी के उसे कोई लेकर पडा था । कहते हैं वो आज के इस पल पारी की रक्षा करना अपना दायित्व मानता है । इसलिए रात के दूसरे पर हर मैं तो इस गांव के काफी लोगों को देखता है । इसके बारे में यहाँ गांव में लगभग हर किसी को पता है बल्कि गांव में तो साफ साफ हिदायती हुई है कि रात के आठ बजे के बाद उस तरफ जा रहा सख्त मना है । यहाँ तक कि वहाँ के चौकीदार शिवमंगल लाल भी महारात आठ बजे के बाद रुकता नहीं है । हाँ कई अप्रिय घटनाएं हो चुकी है । कहते हैं वह फुलवारी आज भी शापित है । ऍम थी तो कल हमें रामलीला देखने जाने से रोक रही थी । इन सब घटनाओं के बाद तो ऐसा लग रहा है जैसे होने वाली घटनाओं का पूर्वानुमान था । खाते थे, बोला बिल्कुल सही कहा तुम ने भारत सच में हमारा भला करना चाहती थी । गांव की कुल देवी है, जो पाँच से हमारे काम के लोगों की रक्षा करती आ रही है । बहुत से लोगों से बंदे भी के नाम से भी बुलाते हैं हर्षित होना । लेकिन तो मैं तो कल तक कुछ भी नहीं पता था । आज अचानक कहाँ से सभी आता गया? आदित्य बोला मैं कल रात वाली घटना मेरे यहाँ काम करने वाले माली रामू काका को बताई । तब उन्होंने मुझे सारी बात विस्तार से समझाइए । इतना ही नहीं चौकीदार शिवमंगल मालिक आपका का बेटा है । मालिका करने । मेरी मुलाकात उस चौकीदार शुभमंगल से करवाई और उन्होंने बताया कि आठ बजे के बाद वहाँ अनहोनी घटनाएं होती रहती है । तरह तरह की आवाजें आती रहती है । इसलिए कोई भी आठ बजे के बाद न तो फुलवारी में जाता है नहीं, कोई उसकी देखभाल के लिए रोकता है । आदित्य के बताते है, हम लोगों की आंखों से वो तुम हट गई थी तो कल बात से हम लोगों के लिए पहेली बनी हुई थी । कल चौपना सिर्फ वाला शैतान हमें मारने के लिए पीछे पडा था । आज उस जगह बहत्तर सिंह के लिए मेरे मन में श्रद्धा उमड रही थी । ऍफ किसी के सहन में आज भी ताजा इतिहास अपने करता मैं न जाने कितनी ही पहेलियां रहस्यों को समझते हो रहे हैं । आज भी जब हम तीनों काम जाते हैं तो उस घटना का जिक्र करते हैं तो राउंड खडे हो जाते हैं । दिन में भी कभी उस पल पारी की तरफ रख नहीं करते हैं ।

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