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काला पहाड़ -08 in  |  Audio book and podcasts

काला पहाड़ -08

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सुलतान कारनानी की सेना का सूबेदार कालाचंद राय धर्मनिष्‍ठ ब्राह्मण था। सुलतान की बेटी दुलारी ने उस पर मुग्‍ध होकर विवाह करने का फैसला लिया, लेकिन धर्म के खातिर उस ने यह प्रस्‍ताव ठुकरा दिया। लेकिन समय बदला और उसने दुलारी का हाथ थाम लिया। फिर शुरू हुई धर्मांध ब्राह्म्‍णों की कुटिलता की कहानी- इंसान को हैवान बनाने का सफर। जाने वह पहले कालाचंद राय से मोहम्‍मद फर्मूली बना और फिर बना काला पहाड़ कैसे बना?
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बागोडा हो जालीदार खिडकी के सामने खडा वित्तीय अपलक दृष्टि से बाहर देख रहा था तो छोटे करता हूँ । दुबला पतला ऍम तीखी चेहरा लंबोतरा ना कुछ बडी हुई दृष्टि ऐसी कि मन का सारा भेज जान तो भडकीली रात सी पोशाक पहले था । उस पर खूब तब रही थी । उसके पास ज्यादा लंबे नहीं थे लेकिन उन्हें बडी खूबी से समझ आ गया था । वो काफी देर तक वहीं खडा रहा । अचल अपन हाँ लिया जाने पर इधर उधर दौडती रही । तभी नौ साल का एक लडका पक्ष में है । उसके चेहरे पर कर और पक्के पन के भाव स्पष्ट आखिर पानी ली थी । खूब कीमती वस्तुओं में सजा हुआ था उसके तो उसे लगता था कि जीवन में आगे बडने के लिए उसे प्रेरणा की आवश्यकता सादा पडेगी । क्या हम यहाँ काफी दिन रहेंगे । उसमें तीन स्वर्ण में पूछा क्यों वाॅयड की के सामने खडा व्यक्ति जैसे नीचे जाएगा । उसमें बोलकर अपने उत्तर पर नजर डाली । होठों पर मुस्कान खेल गई लेकिन आंखों का भाव स्पष्ट नहीं । एक निरीक्षक तासा तटस्थ भाव उसमें तैरता रहा और यही बात मन को मुश्ती रही । आखिर ऐसा लडका उसका पुत्र हुआ तो कैसे? केवल कुछ समय और संभाव उसमें मृदु स्वर्ण कर दिया है हूँ लगा जैसे ये लडका निराश होता था । मैं तो समझता था कि हम यहाँ हमेशा रहेंगे जो तो मैं महाराष्ट्र अच्छा नहीं लगता । वो एकदम गंदा ऐसे धब्बे भवन वहाँ कहा इतना बढिया खाना भी तो नहीं मिलता । यहाँ आज भी इतने अच्छे अच्छे कपडे पहनते हैं । मैं तो यही रहूंगा । व्यक्ति विचारपूर्ण मुद्रा में दाडी पर हाथ फेरता रहा । हम ठीक रही यहाँ से चले जाएंगे बैठे हैं उसके शब्दों को मृदु करने की फॅमिली उसे लगता था जिससे उसके तो संभाजी के बीच अव्यक्त व्यवधान ठहर गया है । आप आप आप जी हाँ छोडकर जाएंगे अपने साथ में चलेंगे ऍम मैं तो यही रहना चाहता हूँ संभाव वो कर्जा उनसे तिवारी थरा गई का काम गया उसके कपडे खेले हो गए । उस सपने लगा आवाज सुनकर इधर उधर से दौड कर पांच व्यक्ति भीतर घुसा है । क्या हो भारतीय लो जाओ इस बार आदेश कुछ मृत था हूँ । उसके बाद नजर उन पांचों पर पडी और स्थिर हो गयी । वो सब साफ सुथरे चुस्त कपडे पहने थे । सर पर वस्त्र को रस्सी की तरह बटकर बनाई हुई पगडियां थी और कमर से खंजर जुड रहे थे । अंग अंग से फुर्ती टपक रही थी । जी कारागार जैसे हमारे धैर्य की परीक्षा ले रहा है । महाराज नीरज जी राव ने कहा, वो छोटे कद का सशक्त व्यक्ति था । आंखों से सावधानी का भाव झलक रहा था । मैंने तो नहीं रहा । आखिर कितने दिनों मैंने बच निकलने का निर्णय किया है । क्या पांचों अभिभूत खडे थे? था? मेरी एक योजना है तो उस पर विचार कर लिया जाएगा । तो मुस्कुरा रहा था । हम तो आपकी सेवा के हमारा खीरा जी । फरजंद ने कहा वो नाटक और दुबला पतला था । छोटी सी नुकीली गाडी भी थी । वो उस व्यक्ति का सौतेला भाई था । ये भी संभव हुआ तो इस पखवाडे के पूरा होने से पहले ही इस जयपुर महल से भाग निकलूंगा । एक पखवाडा नहीं आप एक सप्ताह में ही स्वतंत्र होंगे । बारह । दत्ता त्रियंबक ने कहा वो लंबा तगडा व्यक्ति था । तानाजी का विश्वासी सहायक जिस सब एक कोने में बैठ गए और तब उस व्यक्ति ने भाग निकलने की सोच ना मतलब । सभी ने उसका समर्थन किया । किन्तु से कार्यान्वित करने में हमें कितना समय लगेगा । रघु मित्र ने पूछा । उस व्यक्ति की आंखों में शरारत और खुशी के मिले जुले भाव पहुंच गए । बोला कुछ भी नहीं, अभी प्रारंभ कर देंगे । सब संबित रह गए सब साहसी और सूझबूझ वाले थे । लेकिन इस तत्काल दो सहास की कल्पना उन्हें भी नहीं थी । अचानक उस व्यक्ति के मौके पर असहाय पीडा के भाव कर गए । भूसे दिल दहलाने वाली ठीक निकल पडे । दोनों हाथों से पेट पकडकर फर्श पर बिछे गलीचे पर है तो आपने लगा चलती किसी वैध को बताओ नहीं तो मेरे प्राण चले फराहा पहुंचों आदेश पालन के लिए भागे । वो एकदम उठकर बैठ गया और चला वापस तू जहाँ वहीं रुक गया और बोल कर उसकी और देखने लगा । अब वो बिल्कुल ठीक दिखाई दे रहा था । बारात उस मत बनो । उसने लगता है तो लोग इतने घबराहट हो गए, ठहरे से काम करना सीखो । ज्यादा को हम बहुत बडा नाटक खेल रहे हैं । सरासिन होते ही सब खेल बिगड जाएगा । हर काम सोच समझकर पूरी कुशलता से करना होगा । जी महाराज विनम्र स्वर्ग पहुँचेगा । ऍम तुम कुमार राम सिंह को मेरे बीमार होने की सूचना भिराम तुम मेरे पास रहो । नीरा और रघु तो कहीं छुप जाओ क्या चाहो तो संभाल के पास रहूँ । रघुनाथ छोड दें तो बाहर जा कर ले चाहूँ सोने का बहाना करूँ ऍम सब जाऊँ । उसने जल्दी जल्दी आदेश दिया और फिर फर्श पर गिरकर पानी से निकली मछली की तरह तडप नहीं लगा । जल्दी किसी वक्त को बुलाओ नहीं तो मेरे प्राण चले । जलती पहुंचों व्यक्ति तितर बितर हो गए । फॉलोअर्स खान दो पहरेदारों के साथ दौडता हुआ भी कराए । वो आग्रह शहर का कोतवाल था और ये व्यक्ति उसी की देख रेख में कॅश । फराह खान बहुत मोटा था उसकी तीन पत्नियां भी लेकिन अभी तक नहीं सुनता था वो और अजीब का बहुत विश्वासी व्यक्ति था । उस सब के पीछे पीछे ही राजी भी अंदर आ गया । हालात खान कुछ देर तक देखता रहा । उसकी आंखों में चिंता की छाया स्पष्ट थी । मुझे तो पहले ही पता था कि ये होगा वो धीरे से बहुत ज्यादा । मैं तो शहंशाह से भी अर्ज कर दिया था वाला मजबूत और चुआरी खाने वाला आदमी, पुलाव, बिरयानी ॅ वहाँ पर जा सकता है । हो चुका और मृदु स्वर में बोला शिवाजी महाराज, अब आप की तबियत कैसी है? तडका बेहद शिवाजी करा है और बेड पकडता तो तीन कलाबाजियां खा गए । हालात खान पहरेदारों की ओर मुड कर चलाना रहे शिवाजी महाराज को उठाकर चारपाई पर लेता हूँ भाई और फिर दौड कर हकीम हुकूमत खास हाॅल । जब शिवाजी चारपाई पर लेट गए तो एक पहरेदार हकीम साहब को बुलाने के लिए चला गया । शिवाजी दर्द से कराहते रहे । खान अस्थिर कदमों से इधर उधर चहलकदमी करता रहा हूँ और मेरा जी उदास मुझसे शिवाजी किया और देखता हूँ । कुमार राम सिंह भी तरह उसके पीछे वृद्ध और त्रयंबक थे । रामसिंह एक सशक्त व्यवस्था शरीर पर हथियार सजे थे । अंग प्रत्यंग से वीरता टपक रही थी । वो वृद्ध हकीम खूब खाता था । उसकी कमर छूट चुकी थी । लहराती दाडी एक दम सफेद थी । उस सादे कपडे पहने था । रामसिंह शिवाजी के पास आकर बोला महाराज जवाब में शिवाजी के फोटो से बाहर निकल गई । आप तो बहुत बीमार है । महाराज अरे भाई, मुझे मालूम था कि एक ना एक दिन की जरूर होगा । हम उन्हें जैसे लजीज खाना खिला रहे थे । उन्हें भलाई कहाँ बचा सकते थे? बडा खान ने अपनी बात कह नहीं । हकीम ने काफी देर तक शिवाजी को देखा । फिर बोला आपकी आंखों में पीलिया की झलक है जी, घर में भी कुछ खराब है । मेरा ख्याल है कि यहाँ की आबोहवा आपको राष्ट्र नहीं आई । हाँ, मैं मस्तान देख के हाथ दवा भेज देता हूँ । वो बनाकर मिला जाइएगा । मैं रोज देखने आया करूंगा । आप अच्छे तो हो जाएंगे, लेकिन काफी देर लगेगी । आपको आराम की जरूरत है । लाॅक स्तर पर लेते रही शिवाजी में स्वीकृति में सर हिलाया और उनके मुंह से फिर एक बार वहाँ निकल गई और उन्होंने अपना पेट पकड लिया । चेहरा पीडा से विकृत होगा । शाही हकीम चला गया तो शिवाजीने उत्सुक राम सिंह की और देखा । धीरे से बोले मैं अपनी हालत बादशाह को बताना चाहता हूँ । तुम मेरा खत्म वहाँ ले जाओगे क्या? रामसिंह खेत की प्रतिमूर्ति बना खडा था तो भरे स्वर में बोला क्यों नहीं आ रहा है? जरूर ले जाऊंगा मुझे तो आप की हालत देख कर बहुत दुख हो रहा है । मैं आपके लिए और क्या कर सकता हूँ । लिखने का सामान मंगवाया गया । शिवाजी बोलते गए । रामसिंह लिखता रहा पत्र का हर शब्द ऐसा था कि बादशाह के अहम को चोट पहुंचे । बहुत चाहूँ कि बादशाह हिंदुस्तान और पहाडों के पास के मुल्कों के मालिक सबसे बडे शहनशाह आलमगीर को मेरी और से पश्चिमी घाट के सीधे साधे गरीब शिवाजी की और से जो आपके शाही महलों में मजबूरी से आराम फरमा रहा है । सलाम जहाँ मैं पिछले कुछ दिनों से बीमार हूँ और ऐसा लगता है कि अभी कुछ दिन इसी तरह रहूंगा । ये शाही हकीम हुकूमत खान का कहना है मैं भी काफी दिन तक खाली जा का मेहमान रहूंगा । इसलिए मैंने फैसला किया है कि अगर आपका हो हो तो मैं अपने नौकरों को घर भेज दूँ । वो घर जाने के लिए उतावले हो रहे हैं और फिर उनके बाद तो आपको कम ही आदमियों की देखभाल करनी होगी । मैं अपने किसी खास आदमी को भेजकर अपने माँ और बीवी को बुलाना चाहता हूँ जिससे वो मेरी देखभाल कर सकें । अपनी कुलदेवी अम्बा भवानी की पूजा के लिए मैं रोज फल और मिठाइयों के कुछ तो करे बाहर भेजना चाहूंगा ताकि उन्हें गरीबों में बांट दिया जाए । मुझे पूरी उम्मीद है की हाँ हुजूर खुश होकर मुझ नाचीज की विनती पूरी होने का हुक्म देंगे । मुझे आपकी दयालुता और उदारता में पूरा यकीन है । राम सिंह ने लिखना बंद करके रीत डालकर उसे सुखाया । फिर खडा होकर तो बडी आवाज में बोला महाराज पूरी कोशिश करूंगा क्या आपकी हर इच्छा पूरी हो? कुमार रामसिंह धन्यवाद शिवाजीने धक्के स्वर में कहा और आंखे मूंदकर लेट गए । हालत खान और राम सिंह के जाने के बाद शिवाजी करवट करते हैं । उनके होठों पर शरारत भरी हाँ उसी तरह गई । तभी मस्तान दे भीतर आया । वो सुंदर युवक था । उसने दवा दी और शिवाजी ने मु बनाते हुए पीली । धीरे धीरे अगस्त का दिन कैसा गया? शाम को शिवाजी उठे । बिल्कुल प्रफुल्लित लगते थे । मस्तान बैंक ने उन्हें दूसरी दवा नहीं है जिससे वो आंख बंद करके गए । मस्तान देख वही रहकर उनकी देखभाल कर रहा था । जब वो चला गया तो शिवाजीने फौलाद खान को बुला भेजा । वो थुलथुल व्यक्ति कक्ष में आया और पूछने लगा कि क्या हमेशा उसी का आना जरूरी है? शिवाजी ने सिर्फ हिला दिया । माफी मांगते हुए बोले पता नहीं मेरे साथ ही कहाँ चले गए । मेहरबानी करके ही राजी वर्जन और नीरा जी राव जी को बुलवा दीजिए । अकेले में मेरा मन नहीं लगता । अभी भेजता हूँ हालत । खान ने कहा और चला गया और उनसे गद्दों के सहारे बैठा था । उसने शिवाजी का खत पडा और नखरे से मुस्कराया । दुबला पतला था । शरीर जरा आगे चुका हुआ था । आंखें भूरी थी । उनसे शरारत और मक्कारी तब सकती थी ना, वृद्ध की चौंच की तरह थी । गाडी छोटी थी । इससे अच्छी तरह समर गया था । उसके सामने दरबारी बैठे हुए थे । राम सिंह भी उन्हीं में था । हम चाहते हैं कि शिवाजी की विनती माल्य उसने कहा । फिर आपने एक सेनापति की ओर मुड कर बोला शिवाजी के साथियों को हर जरूरी सामान देकर रवाना कर दूँ । आपके मराठी चले जाए तो मुझे कुछ चॅू हम से हम अब शिवाजी के भागने का कोई खतरा नहीं रहेगा तो जोर से हंसा तो उसकी आंखों से होने कर रहा हूँ । मैं तो ये देखना चाहता हूँ कैसे बचकर भरता है । रामसिंह उसे सब देवी देवताओं की पूजा करने दो । भूल मिठाई की टोकरियां भेजने दो । उसके माँ और पीढियों को बुलाने के लिए किसी को भेज दो । चलती एक बार वहाँ आ गई तो फिर ये परिंदा कभी पर नहीं मार सकेगा । मैंने अच्छी तरह सोच रखा है । इसीलिए चाहता हूँ कि उसे हर चीज मिल जाए । हर चीज दरबार समाप्त कर दिया गया और औरंगजेब अपने महल में चला गया । तकियों के सहारे बैठकर अपने आप बडबडाया । अब मुझे कभी परेशान नहीं कर सकोगे । शिवाजी तो मजे करो । शिवाजी के पेट का दर्द कम नहीं हुआ । धीरे धीरे पडता गया । शाही हकीम में हर तरह की दवाइयाँ दी लेकिन हालत सुधारने के बजाय बिगडती चली गई । लगता है अम्बा भवानी मुझ से बहुत अधिक वृद्ध है । शिवाजी ने आशंका व्यक्त की मैं उन्हें प्रसन्न करने के लिए धन्यवाद । ढाई की और बडी टोकरियां गरीबों में बांटने के लिए भेजूंगा । टोकरियों का आकार बदल गया । अब काफी बडी बडी टोकरियां, जिनमें आदमी भी समझा जाए, बाहर जाने लगी । एक टोकरी इतने भारी होती थी तो पास पर लटकाकर चार आदमी बहुत मुश्किल से ले जाते थे । बलात् खान की मुसीबत थी जयपुर महल की पहरेदारी का काम उसके जिम में था । अब अंदर जाने और बाहर आने वाली हर टोकरी की जांच पडताल का काम भी उसके सिर्फ बडा बडा गुजारते, उसकी परेशानियाँ बढती है । वो ही मन बुदबुदाया कितनी बरबादी कर रहा है काम बाकी । फिर इनकी जांच पडताल में भी कितना वक्त बर्बाद होता है । धीरे धीरे उसने टोकरियों की जांच बंद कर दी । वहीं फल, मिठाई, शक संधि की कोई चीज कभी न निकले और उसी की अनुमति पाकर शिवाजी ने नीरज जी, राव जी, बसंत केंद्र और रघु मित्र को कृष्ण से अपनी तीर गायु होने की प्रार्थना करने के नाम पर मथुरा भेज दिया और नीरज जी को महाराष्ट्र भेजकर अपनी मम्मा और पत्नियों को लेवा लाने के लिए भी और मुझे आप की अनुमति प्राप्त कर देंगे । बाकी दोनों आदमियों को नीरज जी के साथ सहायकों के रूप में जाना था । वो तीनों मथुरा नहीं गए । मार्ग में ही उन्होंने खोडे के सौदागर से कुछ बढिया घोडे खरीदेंगे और आगरा के बाद ही एक जंगल में डेरा डालकर उत्सुकता से प्रतीक्षा करने लगे । जब हीरा जीने आकर ये समाचार दिया तो शिवाजी की हालत सुधरने लगी लेकिन अब भी काफी कमजोर देखते थे । जब ही राजीव खबर लाया की अंदर आने और बाहर जाने वाली टोकरियां अब बिना किसी रोकटोक और जांच पडताल के आती जाती हैं तो शिवाजी की बीमारी एक काम ठीक हो गई । मस्तान देख पर शिवाजी का चालू चल गया था । उसे उनके बारे में खूब बढा चढाकर कहानी सुनाई गई । शिवाजी पर उसे बहुत भक्ति हो गई । इरा जी ने उसकी उत्सुकता बढाने के लिए नमक मिर्च लगाकर कहानियां सुनाइए । शायद खान की उंगलियां कटने की कहानी, अफजल खान की क्रूरता और उसका बेवकूफ सिद्धि चौहर के झूठे अपमान की कथा । ये सब सुनकर हिंदुस्तान ब्रेक को ऐसा लगा । पिछले बाजी से अधिक वीर और महान व्यक्ति इस दुनिया में कोई हो ही नहीं सकता । वो आलमगीर की नीति की बुराई करने लगा । उसे फूट समझने लगा । मैं नहीं जानता था कि आलमगीर इतना बदमाश है । मैं अब उस की नौकरी नहीं करूंगा हूँ । इस तरह की बातें करूं । हीरा जी ने चेतावनी दी । अगर तुम आलमगीर की नौकरी नहीं करोगे तो हमारा साथ भी नहीं दे सकते हैं । मैं आपकी नौकरी में रहूंगा । मैं किसी का नौकर रही आजाद आदमी हूँ । अरे जिसका चाहूँ साथ दे सकता हूँ । नहीं नहीं ही नहीं था । मेरा कहना तो की है कि इस हालत में ऐसा करने से शहंशाह के दिमाग में शक आ जाएगा । अभी ऐसा करना ठीक नहीं । लडकी की आंखें चमक उठीं । आप का मतलब है आपको खुसपुसाहट शिवाजी महाराज जहाँ से बचने करना चाहते हैं । हीरा जी को बहुत अधिक चतुर लगा । उस चक्कर में पड गया कि आप रहे क्या नहीं कहे । थोडी देर तक पैनी निगाह से उसके चेहरे के भाव का अध्ययन करता रहा । फिर हल्की से हस्कर बोला हाँ मस्तान देख खिलखिला । उसे सारी बातें मजाक लग रही थी । मैं देखना चाहता हूँ ये खबर सुनकर आलमगीर का मूड हो जाता है । वो भी मुझे बता रहा था । इस बात को अपने तक ही रखो । हीरा चीनी चेतावनी दी अगर तुम चाहो तो हमारी मदद कर सकते हैं । जैसे किसी तरह हर रोज आती हूँ ताकि किसी को शक ना ठीक है । जब हीरा जी ने ये घटना शिवाजी को बताई तो पसंद होते हैं । हम पर प्रसन्न है । मैं कल बच निकलूंगा । हीरा चीज एक कदम पीछे हट गया । इतनी चलती मारा चाहिए वो बडी मुश्किल से बोल पाया । हीरा ठीक हैं । मैं संभाजी को तैयार करता हूँ । शिवाजी में स्वीकृति में से रहना दिया तो बोले कुछ नहीं क्योंकि तभी हकीम हुकूमत खा अंदर आ गया । उन्नीस अगस्त सोलह सौ छियासठ जयपुर महल के पहरेदार बैठे कब तक लडा रहे थे । बातचीत शिवाजी के बारे में हो रही थी । इस जो हैं, कहा हमारी बिल्ली से कोई मुकाबला नहीं । गुलाम कोर्स ने कहा हमारे आलमगीर ने भी क्या खूब जाल बिछाया । भगवान बोलते हैं ऍम और चारा भी डाला तो दोस्ती का बात कितनी अच्छी लगती है कि हमारे शहंशाह उस वृद्धि की तरफ दोस्ती का हाथ बढाएगा और फिर सब जोर जोर से हंसने लगे । एक दूसरे से मजाक करने लगे । तभी आठ आदमी एक पांच पर दो टोकरियां लडका हुए दरवाजे रफीउद्दीन में हाथ हिला दिया । यानी वो लोग बिना जांच पडताल के अंदर जा सकते थे । भवानी की पूजा के लिए तो बोला और सब एक साथ खर्च पडेगा । उन आदमियों ने टोकरियां शिवाजी के कक्ष में रखनी और पसीना पहुंचे रहे । शिवाजी मुस्कराये क्या, वरना कुछ दिक्कत तो नहीं हुई नहीं यार आज किसी में हमें पहचान नहीं नहीं मजदूरों का क्या क्या पान कर ते खाने में डाल दिया । ठीक किया अच्छा टोपियों से मिठाई निकालना, मजदूर बने हुए आठों मराठों ने जल्दी जल्दी टोकरियां खाली कर दिया तो क्रिया खाली होते ही हिना जी वर्जन और मस्तान बेक सोये हुए संभाजी को उठाकर अंदर ले आए । टोकरी में निपटा दो से शिवाजी ने आदेश दिया । उसके बाद कुछ देर सोचते रहे । वो किसान की वेशभूषा में थे । लेकिन हीरो के आभूषण अब उनके शरीर पर चमक रहे थे । हीराजी शिवाजी के कपडे पहने हुए थे । अचानक शिवाजी को कुछ खाया और उन्होंने अपने आभूषण पार्कर ही राजी को दे दिए । आखिरकार इस नाटक में थोडी बहुत सच्चाई तो रहना ही चाहिए । उन्होंने ही राजी और मस्तान बेच के कंधे पर हाथ रखती है । मैं उन दोनों को बहुत बडे खतरे में छोड कर जा रहा हूँ और सावधान रहने की जरूरत पडेगी । मेरे निर्देशानुसार काम करना भवानी चाहेगी । इस सब ठीक हो जाएगा । शिवाजी एक टोकरी में बैठ गए । सब चुप थे तो क्यों कि हम ऊपर ढक्कन लगा दिए गए । मजदूरों ने उन्हें उठाया और बाहर आ गए । चुप चाप उन्होंने देखा । सारे पहरेदार हंसी मजाक में मजबूत थे वो चला रोके जांच पडताल कराना चाहते हूँ लेकिन रफीउद्दीन ने उन्हें जाने का इशारा कर दिया । मुश्किल से पचास कदम गए होंगे तो तभी ऍम दिखाई दिया । उसके उन्हें रोक दिया । रियात वो बडा है राज अब कैसे हैं तो पहले से कुछ अच्छे हो सकता है । मजदूर बने हरनाथ जवाब दिया गलत । खान ने सिर हिलाकर जाने का इशारा कर दिया । मजदूर बाजारों और करिए । उसे गुजर देखते ही राजी फरजंद करा रहा था । उसने कम्बल हो रहा था और दीवार की और मूंग की लेता था । उसका हाथ बाहर निकला था जिसपर राॅड चमक रहे नहीं मुस्तान एक पैरों के पास बैठा धीरे धीरे मालिश कर रहा था । फिर रात खान शीघ्रता से अंदर मुस्तान देखने होठों पर फॅमिली रख दर्शन जो रहने का इशारा किया तो उन का होता है हमारा जब कैसे हैं हिंदुस्तान देखने भी लगभग पूछ आते हुए बताया सारी रात बडी तेज नहीं रही । अब जाकर कुछ नहीं आई है । तलाब खान संतुष्ट होकर चला गया है । हर हुई मस्तान एक दवा तैयार करने लगा । ॅ अब कैसा है वही हालत है । सुबह तबियत बिगड गई थी । इस दवा से ठीक हो जाएगी । उसकी हालत देखकर मुझे तकलीफ हो रही है । आजा पहाडी आदमी को पिंजरे में बंद किया गया है । उससे हमदर्दी जताई । इस तरह से ठीक हो जाएंगे । हिंदुस्तान देखने तसल्ली नहीं ठीक है । मैं घर जा कर आराम करता हूँ । कुछ बात हो गया हूँ शाम को इनके बारे में आपको खबर करता हूँ । फोन खान ने सोते हुए शिवाजी को खासतौर से उनके हाथ को देखा और पंजू केबल चलता हूँ कक्ष से बाहर चला गया । तीन बजे के करीब ही राजी उठ बैठा । बिस्तर पर कपडे रखकर उन्हें इस तरह ढक दिया । तक देखने पर पता चले कि शिवाजी किसरी नींद नहीं हो रहे हैं । उसके बाद दोनों चुप चाप बाहर है । सारे पहरेदार फंसा रहे थे लेकिन फिर तीन चाहता है और सतर्क था । उसने खडे होकर ही राजी को सलाम किया और बताओ शिवाजी पैसे बीमार हो गए । उन्हें जगनमति और मस्तान देख दवा लेने के लिए बाजार जा रहे हैं । अभी उद्दीन ने सरेला मस्तान को ही राजी के साथ देख कर उसे कोई शक नहीं हुआ तो समझा कि शिवाजी कई बीमार होंगे ।

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सुलतान कारनानी की सेना का सूबेदार कालाचंद राय धर्मनिष्‍ठ ब्राह्मण था। सुलतान की बेटी दुलारी ने उस पर मुग्‍ध होकर विवाह करने का फैसला लिया, लेकिन धर्म के खातिर उस ने यह प्रस्‍ताव ठुकरा दिया। लेकिन समय बदला और उसने दुलारी का हाथ थाम लिया। फिर शुरू हुई धर्मांध ब्राह्म्‍णों की कुटिलता की कहानी- इंसान को हैवान बनाने का सफर। जाने वह पहले कालाचंद राय से मोहम्‍मद फर्मूली बना और फिर बना काला पहाड़ कैसे बना?
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