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आख़िरी ख़्वाहिश अध्याय -38

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“यात्रा कैसी थी?” उसने मेरे चेहरे को दुलारते हुए पूछा। “मैं ड्‍यूटी पर था।” “ठीक है! मुझे पता है कि इसका मतलब क्या है। यह विद्यार्थियों के लिए एक यात्रा थी और मेरे लिए नहीं।” मेरे कहने का मतलब वह हमेशा समझ लेती थी और उसमें मेरे लिए बोलने का साहस था। मैं मुसकराया, लेकिन कुछ बोला नहीं।, सुनिए प्यार भरी कहानी| writer: अजय के. पांडेय Voiceover Artist : Ashish Jain Author : Ajay K Pandey
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अडतीस मैं समझ सकता हूँ कि वो अभी भी आस्था से प्यार करता था । मास्टर से मिलने के उसके अनुरोध पर हिचकिचाया था । लेकिन मैं चाहता था उनका मिलना हो । एक उसके जीवन का पहला प्यार था और दूसरा उसकी इच्छा । सूची में डेनियल के नाम का उल्लेख किया गया था । मैं आस्था की इच्छाओं को पूरा करने के लिए कुछ भी करूंगा । पहले ही इसका मतलब उसका उसके पूर्व प्रेमी से मिलना था । उसे उसके साथ छोडने के बाद मैं कमरे से निकला लेकिन दूर नहीं जा चुका । मैंने दरवाजे के सबसे नजदीकी सीट पर कब्जा कर लिया और वार्तालाप को सुनने की कोशिश की । मैंने थोडी सी बातचीत सुनी थी तो बिहार में डूबा एक ओझा पति समझ सकता है । मुझे पता है कि मैं एक स्वार्थी व्यक्ति हूँ लेकिन स्वार्थी व्यक्ति होने में कुछ भी गलत नहीं है और ये आस्था के बारे में कुछ और जानने का मौका हो सकता है । डेनियल कुछ समय बाद कमरे से बाहर आया वैसा ही नहीं दिख रहा था । मैंने आस्था को देखने भीतर जाने से पहले कुछ समय इंतजार किया । मैं उसकी आंखों में आंसू नहीं देखना चाहता था । आस्था लगभग हो रही हैं । मैं उसे परेशान नहीं किया मैंने सीट ली और पास उसे देखने लगा । उसे शांति से सोते देखना संतोषजनक था । मैं सोच रहा था जाने के बाद तो मुझ पर चिल्लाएगी और जवाब मांगेगी की मैं डेनियल से मिलने के लिए क्यों गया था । मेरे दिमाग में सभी प्रकार के विचार चलने लगे थे जब उसने अपनी आंखें होनी मुझे ऐसे देख रहे हो । मैंने पूछा नहीं तो हो रही थी । मैंने सोचा नहीं । मैं लगी हुई थी तो मुझे घूर रहे थे और कुछ सोच रहे थे । वो क्या था? अपने बच्चे और मेरी तरफ से तुम्हारे साथ सुंदर भविष्य के बारे में सोच रहा हूँ । वो मुस्कराई और मुझे गले लगाने के लिए भी बहुत बढा दी ऍम में ले लिया । कुछ पलों में मैंने खुद को उसे तब तक चुंबन लेते पाया जब तक मुझे अपने हाथ पर कुछ गर्म भूतों का एहसास हुआ । उसके आखिर पूरी तरह नाम थी । इससे पहले की मैं उसे सांत्वना देना शुरू करता । उसने मांग की, मैं संगम से मिलना चाहती हूँ । उसने सत्य को जानने के बावजूद डेनियल या उसके आने का जिक्र नहीं किया । मुझे अस्पताल में उनके मिलने के बारे में पता था । एक असमान्य कौन थी लेकिन मैं उससे बहस नहीं करना चाहता था । एक आश्चर्य की बात थी । वो सरगम से इस समय मिलना चाहती थी । लेकिन मैंने कुछ भी नहीं कहा । उसे बुलाया । मुझे उसके आस पास किसी और का होना अच्छा लगा । सरगम एक घंटे में वहाँ भी मैंने उसे स्थिति की अपडेट भी । उसे किसी भी समय ऑपरेशन के लिए बुलाया जा सकता था । सरकार ने से हिलाया । मैं कुछ ताजा हवा के लिए बाहर चला गया । ऍम मॉल पास में ही था और मैंने भीड में कहीं खो जाने का फैसला किया । एक दुकान के बाहर बहुत फिर भारती और मैं पे की शक्ति से चकत् था तो सरकारी शराब की दुकान के बाहर एक सार्वजनिक जगह दिया । महान अमृत के कई दैनिक उपासक बाहर खडे थे । मैं समझने में नाकाम रहा कि वहाँ इतनी बडी भीड क्यों थी? मेरे करीबी अवलोकर ने मुझे जवाब दिया । उम्मीद आधे वहाँ पी भी रहे थे । सरकार ने नियम बनाया लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर शराब की खपत को नियंत्रित करने में नाकाम रहे हैं । इसके विपरीत सरकार वितरण का प्रभार लेकर इसमें शामिल है । भाई पुरुष कर्मचारी था उसकी उपस्थिति व्यस्त तो खुद अमृत के नीचे तरह था । सिग्नेचर की एक बोतल मैंने कहा लम्बा मित्रता ने पूछा, नहीं बंदा मैंने कहा मैं तीन सौ रुपए का भुगतान किया और मालवीय नगर घर चला गया । मैंने केवल एक बार पहले शराब ली थी और मुझे स्वास्थ्य पसंद नहीं आया था । लेकिन आज मुझे हल्का होने के लिए कुछ चाहिए था तो कि ये दर्द था मेरे सिर में, दिल में मेरे जीवन में जी असहनीय हो रहा था । घर पहुंचा और सोफे में घुस गया । मैंने एक अतिरिक्त पढा ड्रिंक लिया और उसमें रेफ्रिजरेटर में आधा जमा हुआ को मिला । रिंग बनाने में मैं एक नौ से किया था । मैं एक बार में ही आधा भी गया । उसका स्वाद बेहद भयानक था । मैंने कुछ घंटों के बाद एक और क्लास खाली कर दिया । मेरे दिमाग में थोडा हिलोरे लेना शुरू कर दिया था । इसके लिए मैंने तीन सौ रुपए खर्च किए थे । शराब भी डर जाते ही मैंने बेहतर महसूस किया । मैं आश्चर्यचकित था । पीने से कैसे लोगों का सामना करने की ताकत मिल जाती है । आस्था क्यों हमेशा इसके लिए लडाई रहती थी । नहीं माने तो विरोध किया तो उसने घर पर आपको पीते पाया । इस बीच मैंने एक और बैक समाप्त कर लिया था । मुझे लग रहा था जैसे मैं बगीचे में था । मैंने अपनी आंखे बंद कर ली और अपने मस्तिष्क में विचारों की ट्रेन दौडने की जा सकती है । आगे क्या? आस्था के बाद क्या क्या होगा अगर बच्चे को भी रोक के साथ पॉजिटिव निदान क्या गया? कमरा उसके मुस्कान के साथ कितना जीवन था? मैंने उसकी सनकी इच्छाओं के बारे में सोचा । आस्था एक हीरो से शादी क्यों करना चाहती थी? मैंने दर्पण में देखा क्या मैं हीरो की तरह दिखता हूँ? नहीं ऍफ जीरो का है, हूँ नहीं जीरो को जानता हूँ । मुझे लगता है की अल्कोहल ने अपना काम पूरा करना शुरू कर दिया था । मैंने दर्पण में अपना प्रतिदिन देखा और एक व्यक्ति को देखा चुके युद्ध हूँ तो सुना । बाद में सोफे पर पसर गया । मेरे मोबाइल फोन की रिंगटोन ने संघर्ष के एक नए दिन का स्वागत किया । सरगम थी अनुसंधान । क्या हुआ मुझे मुझे जाना है । कुछ महत्वपूर्ण काम आ गया है उनको । यहां पहुंचने में कितना समय लगेगा । तुम जा सकते हो अगर मैं दस मिनट में वहाँ पहुंचाऊंगा । मैंने कॉल काटी और जल्दबाजी में कपडे पहने, पता मु में माउथफ्रेशनर डाला और एक डीओडरेंट में खुद को भी रो दिया । जब अस्पताल के लिए निकलने ही वाला था मेरी नजर बोतल पर पडे तो बोतल जैसे मुझे वहाँ छोड कर नहीं जाने के लिए कह रही थी और तो और उसकी पसंदीदा भी थी । मैंने उस आधा भरी बोतल को पैदा किया और अपने दिमाग का शुक्रिया अदा किया । वो अभी भी पूरी तरह से काम कर रहा था । मैंने विकास स्टार्ट की और अस्पताल की और बढ गया । जब तक मैं वहां पहुंचा तब तक सरगम जा चुकी थी तो मैं आस्था के कमरे में पहुंचा तो वो मुझे दर्द से कराहती मिली । अच्छा क्या हुआ? तुम ठीक हो । मुझे लगता है कि समय आ चुका है । मैंने सिर हिलाया, कुछ नहीं हो रहा था । मुझे नहीं पता था कि उसके बाद पर प्रतिक्रिया कैसे करूँ । लेकिन लेकिन इसमें एक और सवाल पूछा क्या तुम नशे में हो? हाँ मैंने कुछ उस क्या लेने की कोशिश की? उसके साथ भयानक है, कैसे पसंद करती हो? अचानक दर्द बढने से मेरी बात अधूरी रह गई थी । पीछे डॉक्टर का भी बडा हो । डॉक्टर को बुलाने भागा एक जूनियर डॉक्टर शिव पडता था । उसने आस्था की जांच की । उस ने हमें बताया कि एक घंटे के भीतर ऑपरेशन करना जरूरी होगा । कुछ चिकित्सा प्रक्रियाओं को क्रियान्वित करने के बाद वो कमरे से चला गया । एक नाॅट के साथ आई और कहा, किशन को ये पहनना है । ठीक है मैंने से मिला हूँ । दस मिनट के बाद नर्स बाहर आई और मुझे बताया की आस्था को कुछ भी खाने की इजाजत नहीं थी । उसने ऑपरेशन चैनल इससे महत्वपूर्ण प्रश्न जैसे रख व्यवस्था दी के बारे में पूछा जाने से पहले नर्स ने कहा, आपके पास आधा घंटा है । जब नर्स ने ये कहा तब कुछ कुछ महसूस नहीं कर सकता है । उसका मतलब था कि आधे घंटे के बाद में अपने प्यार अपनी जिंदगी को खुद होगा । सोचते ही मुझे कपकपाने शुरू हो गई तो बाहर चला गया और काफी देर तक वहाँ खडा रहा । मुझे लगा कि मैं कुछ भी नहीं देख सकता था कि मेरी आखिर होने से स्कूल गई थी । मैंने शांत होने की कोशिश की और अपने चेहरे पर वॅार से ठंडे पानी के छींटे मारे । मैं भी आधे घंटे रुकने में बर्बाद नहीं कर सकता था । फिर जीवन के सबसे मूल्यवान तीस मिनट अंदर पन में देखा और जबरदस्ती मुस्कराया । आस्था हरे रंग की ड्रेस में तैयार थी और उसके बालों की लगी हुई थी । मैंने दरवाजा अंदर से बंद कर दिया । जी खतम बच्चे को महसूस कर सकती हो । मैं उसका हाथ पकडते हुए कहा का उधर से हो रही थी । तुम जानती हूँ कुछ ही घंटों में हमारे जीवन की सबसे अच्छी खबर होगी । उसने एक शब्द नहीं कहा और बस मुस्कराई । मैंने स्वचालित उठाने वाले यंत्र की सहायता से उसके बैठ के ऊपर उठाया । वो देख कोन पर बैठी थी, चलो पार्टी करते हैं । मैंने अस्पताल का गिलास मेज पर रखा और अपने बैंक से शराब की बोतल निकाली । मैंने अपने लिए बडा पैक बनाया और उसके लिए आधा गिलास पानी । हम इसकी भी सकते हो । मैं बस पानी पी लूँ, यहाँ हो सब कुछ बदल गया है लेकिन तुम विजय की तरह अभिनय नहीं करोगी । मैंने कहा मैं उसे गिलास में दृष्टि की पांच बूंदे डाल नहीं । मैं अपने जीवन के आखिरी पार्टी के लिए तैयार था । मेरे क्लास में इतनी कम रिस्की क्यों? तुमने केवल पांच होने डाली । उसने धीरे से पूछा मैंने सिर्फ पांच बूढों को जोडा था क्योंकि मेरे स्कोर पांच था और जश्न बनाने का ये एक मात्र कारण था । उनको पीने की अनुमति नहीं है । पांच । मुझे तो तुम्हारे पैट को रन देने के लिए है । कोई और बहस नहीं क्या उसने? पीडा ने कहा नहीं पी दो बन्दे ऑॅफिस के साथ कोई बहस नहीं करना चाहता था और बिना झगडे की दो बूंदे और नहीं । मैं उसके लिए आखिरी बैंक बनाया और कहा तुम विजेता हुआ था? नहीं, हम विजेता हैं । विजेताओं की जाएगा फॅस । मैंने विस्की का क्लास खाली कर दिया । उसने रंगीन तरल के अंतिम पैसे की वजह रखा से करीब आ गया और आॅफिस के गानों पर एक सौ में चुम्बन क्या किसने दरवाजे प्रदर्शन दी । दो मिनट मैं चलाया के साथ मैंने एक नर्स का जवाब चुनाव मैंने उसकी आंखों में गया, वही से झांका । उसके चेहरे पर विजेता वाली मुस्कराहट थी और इसके विपरीत मेरी आंखों में आंसू थे । उन कैसा महसूस कर रही हो? अंततः मुझे आंतरिक शांति मिली है । खुश हूँ लेकिन लेकिन विजय मुझे को आना चाहिए । उसके आंसूओं ने मुझे बताया है कि वह छूट हो रही है । ठीक है मुझे बताओ । ये आखिरी बार है जब हम पी रहे हैं । हम इस दिन के बाद नहीं मिलेंगे । किसी भी तरह अच्छा नहीं है । एक वायदा है । मैं पूछना चाहता था क्यूँ, लेकिन मैंने नहीं पूछा हूँ । मैं उसके और अधिक जीने की जहाँ को समझता था तो जीवन का आनंद लेना चाहती थी लेकिन हम असहाय थे । किसी के साथ सबसे बुरी चीज हो सकती है कि जानना क्या प्रिय व्यक्ति प्रति गुजरनेवाले सेकंड के साथ मार रहा है और आप इसके बारे में कुछ नहीं कर सकते हैं । आप उसकी नियति नहीं बदल सकते हैं । आप सच नहीं बदल सकते हैं । उसकी प्रसव पीडा असहनीय स्तर तक पड गई थी । मैंने दरवाजा खोलने से पहले शराब की बोतल को जल्दी से छुपा उसके पास गया, उसके माथे को चुना और तो चुपचाप रोने लगा । मैं भावनाओं से भरा हुआ था और हजारों बातें कहना चाहता था लेकिन सिर्फ इतना कहा कि मैं मैं तुमसे प्यार करता हूँ । तुम सबसे बेहतरीन पत्नी हो । उसने अपने हिम्मत को उठाया और कहा मैं भी उनको प्यार करती हूँ और तुम सबसे बेहतरीन पति हो ।

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“यात्रा कैसी थी?” उसने मेरे चेहरे को दुलारते हुए पूछा। “मैं ड्‍यूटी पर था।” “ठीक है! मुझे पता है कि इसका मतलब क्या है। यह विद्यार्थियों के लिए एक यात्रा थी और मेरे लिए नहीं।” मेरे कहने का मतलब वह हमेशा समझ लेती थी और उसमें मेरे लिए बोलने का साहस था। मैं मुसकराया, लेकिन कुछ बोला नहीं।, सुनिए प्यार भरी कहानी| writer: अजय के. पांडेय Voiceover Artist : Ashish Jain Author : Ajay K Pandey
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