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आख़िरी ख़्वाहिश अध्याय -16

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“यात्रा कैसी थी?” उसने मेरे चेहरे को दुलारते हुए पूछा। “मैं ड्‍यूटी पर था।” “ठीक है! मुझे पता है कि इसका मतलब क्या है। यह विद्यार्थियों के लिए एक यात्रा थी और मेरे लिए नहीं।” मेरे कहने का मतलब वह हमेशा समझ लेती थी और उसमें मेरे लिए बोलने का साहस था। मैं मुसकराया, लेकिन कुछ बोला नहीं।, सुनिए प्यार भरी कहानी| writer: अजय के. पांडेय Voiceover Artist : Ashish Jain Author : Ajay K Pandey
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हूँ सो हैं । हम डॉक्टर रजा के केबिन के बाहर अपनी बारी के इंतजार में बैठे थे था । इस बार मैं प्रसाद अस्थिर को ले आया था । आखिरकार वही तो बीमार थी । विजय डॉक्टर राजा एक बहुत ही वर्ष डॉक्टर हैं । उनकी परामर्श फीस क्या है? आसानी चिंता से पूछा । केवल एक निम्न मध्यमवर्गीय व्यक्ति अस्पताल में बीमारी की बजाय पैसे के बारे में सोच सकता है । नौ सौ रुपए तो बहुत महंगा है । उसने कहा और मेरी प्रतिक्रिया का इंतजार किया । एक पति का कर्तव्य निभाते हुए उसे उपकृत करना मेरी मजबूरी थी क्योंकि अगर हम यहाँ अपना बहुमूल्य धन पर बात कर रहे हैं, मैं पूरी तरह से ठीक हूँ । उसमें थोडा यही बार डॉक्टर को कहने दो तो मैं आश्वस्त हो जाऊंगा । उसके ॅ मैं घर पर तुम्हारी पूर्णकालिक देखभाल करने वाला नियुक्त करने की योजना बना रहा हूँ । किसी भी प्रकार के खर्च के लिए आस्था को मनाना वास्तव में बेहद मुश्किल था । ऐसा नहीं है कि वह बहुत अस्वस्थ रोगी थी लेकिन उसे दोष नहीं दिया जा सकता । इस बीमारी के लक्षण शायद ही कभी दिखाई दिए । मुझे केवल एक साधारण सर्दी है और तब तक उसका नाम पुकारे जाने के कारण उसकी बात अधूरी रह गई । डॉक्टर रजा जल्दबाजी में प्रतीत नहीं हुए थे । हम अंतिम रोगी नहीं थे या फिर उनके कुछ भी कहने से पहले मैंने उनकी थाली सर मैं विजय हूँ । आशा है आपको मेरी याद होगी और ये है मेरी पत्नी । मैंने आस्था की ओर इशारा करते हुए इनकी रिपोर्ट देखने के बाद अब के निर्देशानुसार मैरी ने बता दिया है इन का लीवर संक्रमित है । आस्था ने मुझे विचित्र दृष्टि से देखा था । पेशा नहीं मैं कैसे भूल सकता हूँ । मुझे याद है सब कुछ डॉक्टर हजार जवाब दिया मैंने राहत की सांस नहीं । डॉक्टर मैं पूरी तरह से ठीक हूँ । मेरे पति बे मतलब मेरे बारे में अनावश्यक चिंता कर रहे हैं । आस्था तुम्हारे पति अनावश्यक जानता नहीं कर रहे हैं । ये अच्छा है कि वर्तमान में आपके संक्रमण में कोई जटिलता नहीं है । आपका बहुत समय से निदान किया गया है । लेकिन ये बिगडेगा यदि तुम स्वयं की देखभाल नहीं करती हो । अब बताओ क्या को नींद आती हैं? कुछ भी होती है । सामान्य सर्दी पेट में लीवर के पास वाले हिस्से में दर्द होता है । हाँ, डॉक्टर पिछले कुछ हफ्तों से मैं बहुत तीन महसूस कर रही हूँ और पेट के निचले हिस्से में हल्का दर्द हो कर रही हूँ तो मुझे लगा कि ये दवा के कारण था । उन्होंने मुझ पर एक नजर डाली और कहा मुझे ऐसा लगा । मैंने उनकी और मुस्कुराते हुए देखा और कहा उन्हें पिछले पच्चीस दिनों से ठंड लगी है । अस्तर पुष्टि में सर हिला । पिछले कुछ दिनों के बारे में क्या ट्रक? रजा ने पूछा, मेरे मुंह में धातु की जैसा स्वाद रहता है । मैं अक्सर उल्टी जैसा महसूस कर दी है । इंगित करता है कि मैंने जो दवाएं दी है उनका असर हो रहा है । ये कहकर डॉक्टर रजा कुछ दवाओं के नाम बडबडाए । डॉक्टर और ज्योतिषी हमेशा लोगों की और मुश्किल शब्द उछाल देते हैं । आस्था उन्होंने आगे कहा, मुझे आपका पूर्ण शरीर परीक्षण करना है ताकि मैं संक्रमण की गंभीरता का आकलन कर सकूँ । उन्होंने कुछ लिखना शुरू किया जो हमारे लिए हिब्रू जैसा था । मैंने अनुमान लगाया कि उसमें पूर्व प्रोफाइल परीक्षण शामिल है । इसमें शामिल हैं फॅार भावस्थ था फॅमिली, सीडी, थ्री और सीडी फोर ऍम, यूरिन कल्चर ऍम एक्स रे गुर्दा पर एक्शन और है । पैसे की समस्या हो तो सिटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड को समझ छोड सकते हैं लेकिन बाकी सब जरूरी है । आज शुक्रवार हैं पहन सभी परीक्षणों को पूरा कराएंगे । और मुझसे सोमवार को रिपोर्ट के साथ मिलेंगे । डॉक्टर जब हम चिंतित है तो मैंने बताया कि ये बिल्कुल जरूरी नहीं है । हम उस पर चर्चा करेंगे । जब रिपोर्ट हमारे हाथ में होगी तो ऐसा बोले ठीक है, रहने वाले हैं । मुझे तो उनके आहार की निगरानी करनी होगी तो कोई संसाधन भोजन नहीं । कोई गेहूँ का आटा, चावल, पास्ता, आलू, टमाटर, बीस मक्का, थालियां, बेंगन या फिर डेरी उत्पाद नहीं । इसके बजाय में बहुत सारा प्रोटीन, सब्जियां, फल, बादाम और दालें । तुम इनसे बच्चे की तरह व्यवहार करना होगा । आस्था ने पूछा एक बच्चा क्यों? हम बच्चे के लिए खाद्य पदार्थ लेकर उसके सोने का समय सब कुछ तय करते हैं । सब कुछ की बारीकी से निगरानी की जरूरत है । हमारे ऊपर भी यही लागू होता है । एक लापरवाह रवैया हमारी किस्मत बदल सकता है । तब तक अपने समय का आनंद लो । डॉक्टर को बहुत देख रही थी । बजह ऍम कैसा है तो कुछ महीनों के लिए स्टाक से बचें क्योंकि ये उसके लीवर को प्रभावित कर सकता है । तो ऐसा हो लेंगे और मुस्कराएंगे हालांकि आप ऍम का समझ कर सकते हैं । डॉक्टर जम्मू से शब्द आस्था को नरक से निकालने के लिए डराने को पर्याप्त थे । उसी रात मैं अपने शयन कक्ष में बैठा हुआ । कॉलेज की पत्रिका दस बार पड रहा था । ये विडंबनापूर्ण था की कोई स्पार्क मुझे नहीं बचा था । उस की इच्छाओं को पूरा करने के लिए मेरे पास पैसा नहीं था । उसके जन्मदिन का जश्न मनाने के लिए पैसा नहीं था । मुझे ये भी पता नहीं था कि वह तब तक जीवित रहेगी या नहीं । अभी उपचार का खर्च मेरे दिमाग में एकमात्र प्रमुख बात थी । हालांकि मैं डेनियल से मिलने पडा हुआ था । पीछे क्या कर रहे हो? मेरे विचारों की श्रृंखला में बाधा डाली । क्या हुआ? हम पिछले पंद्रह मिनट से कॉलेज पत्रिका लिए बैठी हूँ लेकिन मुझे यकीन है कि तुम से पढ नहीं रहे हो । वो अब कैसा है । खैर मैं सोच रहा था मैं झूठ मुस्कराया । कोई आश्चर्य नहीं । इन दिनों तक बहुत सोचते हो तो जानती व्यवस्था अतीत में मैं कई बार आईएएस परीक्षा में शामिल हुआ । ज्यादातर बार में परिणाम भी नहीं देखता था । लेकिन अगली बार फिर परीक्षा दूंगा क्योंकि पापा मुझे ऐसा करने के लिए धक्का देंगे । उन का अपना इरादा था ऐसा करने का अच्छा तो मेरी आवाज में दर्द का अहसास होगा तो मेरे करीब आ गई और मुझे चूमा दे मैं जानती हूँ लेकिन तुम ये सब अचानक इसलिए सोच रहे हूँ । हर बार जब मैं परीक्षा को पास करने में असफल रहता तो मैं निराश हो जाता था । रोता था । माँ मेरे पास आती और पिता जी की तरफ से मैं माफी मांगती है तो कहती पापा मुझे बहुत प्यार करते हैं और उन्होंने अपने बेटे की उपलब्धियों के माध्यम से अपना सपना पूरा करने की कामना की । हाँ, तो ऐसा हो गया था कि मेरे लिए आईएएस की परीक्षा को तीन करना और संभव है । हमारी माँ को पता है कि छमा मांगना क्या है । करवाना था उन्होंने निश्चित रूप से क्या मुझे लगता है कि पापा की तुलना नहीं । मेरी भावनाओं के प्रति वह अधिक संवेदनशील थी । वास्तव में उसने उपहार से कहा किसी दिन तो महसूस करोगे । मैंने दृढ विश्वास के साथ कहा मुझे ऐसा नहीं लगता । अच्छा बहुत जोर देकर कहा परंतु क्यों तो इन सब के बारे में सोच रहे हो रहे हैं तो मैं सोच रहा हूँ की पत्नी के लिए क्या यह नैतिक क्या न्यायोचित रूप से सही है कि वो अपने पति की ओर से जमा मांगे । उसने इसके बारे में एक सेकंड के लिए सोचा और कहा ये पति और पत्नी के बारे में नहीं है । उनके द्वारा साझा किए जाने वाले बिहार के बारे में है । मुझे एहसास हुआ कि एक बहिर्मुखी से सलाह मांगना खतरनाक था लेकिन मैंने जोखिम लिया । मैं समझाओ । कोई भी तो दूसरे व्यक्ति से प्यार करता है । वो उसकी तरफ से माफी मांग सकता है । उदाहरण के लिए तो मुझसे प्यार करते हो और तुम भी मेरी और से माफी मांग सकते हो । उसने तीर निशाने पर साधा था । यही वो बात भी जो सुनना चाहता था । मैंने अपनी किसी पीती मुस्कराहट है । अब अब क्यों हंस रहे हो? सवाल फिरसे जस का तस था लेकिन तब तक प्रति प्रश्न करके मैंने इस प्रश्न की उपेक्षा करने की कला का प्रयोग कर दिया था । क्या होगा यदि कोई व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को माफ नहीं करता हूँ? विजेता हमेशा माफ करते हैं जबकि हारने वाले हमेशा प्रतिशोध लेते हैं तो व्यक्ति माफी मांगता है । उतना सारा बोझ दूसरे व्यक्ति के सिर पर डाल देता है । वो जैसे समझता है हमेशा छमा कर देता है । जबकि वे लोग तो बदला लेने की तलाश में होते हैं । सारा बोझ होते हुए केवल खुद को जलाते हैं और इस तरह के अनुसार नीरव पति एक विजेता है । वो ठीक है । मैंने सराहना करते हुए एक अंगूठा दिखाया और पूछा मैं विजेता कैसे हूँ? क्योंकि तुमने अपने पिता को छमा कर दिया है ।

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“यात्रा कैसी थी?” उसने मेरे चेहरे को दुलारते हुए पूछा। “मैं ड्‍यूटी पर था।” “ठीक है! मुझे पता है कि इसका मतलब क्या है। यह विद्यार्थियों के लिए एक यात्रा थी और मेरे लिए नहीं।” मेरे कहने का मतलब वह हमेशा समझ लेती थी और उसमें मेरे लिए बोलने का साहस था। मैं मुसकराया, लेकिन कुछ बोला नहीं।, सुनिए प्यार भरी कहानी| writer: अजय के. पांडेय Voiceover Artist : Ashish Jain Author : Ajay K Pandey
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