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आख़िरी ख़्वाहिश अध्याय -13 in  |  Audio book and podcasts

आख़िरी ख़्वाहिश अध्याय -13

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“यात्रा कैसी थी?” उसने मेरे चेहरे को दुलारते हुए पूछा। “मैं ड्‍यूटी पर था।” “ठीक है! मुझे पता है कि इसका मतलब क्या है। यह विद्यार्थियों के लिए एक यात्रा थी और मेरे लिए नहीं।” मेरे कहने का मतलब वह हमेशा समझ लेती थी और उसमें मेरे लिए बोलने का साहस था। मैं मुसकराया, लेकिन कुछ बोला नहीं।, सुनिए प्यार भरी कहानी| writer: अजय के. पांडेय Voiceover Artist : Ashish Jain Author : Ajay K Pandey
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फॅमिली हूँ । जब मैं वापस आया तो आस्था पहले ही घर पहुंच चुकी थी । हम जल्दी घर कैसे आ गई? मैंने तुमसे मना किया था । सार्वजनिक परिवहन द्वारा यात्रा । इससे पहले कि मैं अपनी बात पूरी कर पाता था, उसने मुझे कसकर गले लगा लिया और एक बच्चे की तरह रोना शुरू कर दिया । ये पिताजी के साथ मैंने जो किया था, उसकी पुनरावृत्ति इस समय केवल मुझे आत्मविश्वास दिखाना था । मुझे उसकी चट्टान बनना था । मैं कमजोर होने का जोखिम नहीं उठा सका । अरे मैं तो सांसदों देते हुए कहा क्या हुआ उसे चुप रहने का फैसला किया । उसके लिए असामान्य था । मैंने फिर से पूछा जल्दी घर कैसे आगे दिया? वो अभी भी मेरी बाहों में दफन थी । मैंने अपनी पकड को ढीला कर दिया । उसके दोनों का पोलों को हाथ में लेकर उसकी भूरी आंखों में देखा और धीरे से पूछा क्या हुआ था? नहीं खराब अभिनेता था लेकिन वो इतनी दुखी जी की मेरी निराशा पर ध्यान नहीं दे पाई है । विजय मेरी नौकरी चली गई वो मैंने सहानुभूतिपूर्वक कहा लेकिन जल्दी से जुडा । ठीक है क्या तुम इसे इस रूप में नहीं देखती हूँ । मुझे कुछ अच्छी खबर ये अच्छे के लिए हुआ है । ये किस्मत द्वारा तो मैं बताने का तरीका है कि तुम्हारे लिए यही समय है अपने सपनों का पीछा करने का तो समझ नहीं पा रही हूँ । फिर चारों और क्या चल रहा है । कुछ सिखने लगी । मैंने की टिप्पणी को अनसुना कर दिया और अपनी कॉलेज पत्रिका उठा ली, जो वहीं पांच पडी थी । मैंने उसे दिखाया और कहा तो एक लेखिका बन सकती हूँ । लेखक कम पैसे पाते हैं । विजय था । मैं चाहता हूँ कि तुम एक लेखिका बनाओ, क्योंकि एक समय पर तुम भी यही चाहती थी । याद रखो, सब कुछ पैसे के लिए नहीं होता है । जब तुम्हें एक नौकरी मिलती है तो लाखों अन्य लोग ऐसा ही करते हैं, जैसा कि आप अपने रहन सहन के लिए करते हैं, लेकिन अपनी जिंदगी की एकमात्र मालिक खुद हैं । मैंने अपना दर्शन दिया । विजय क्या वाकई तुम हो तो वही देखती नहीं हूँ । मैं अंधी उसका रहा था और जब था जब उसका बोलना जारी था । लेकिन हमारे खर्चों का क्या होगा तो नहीं । चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है । मुझे पदोन्नत किया गया है । याद है ना मिस्टर विजय शर्मा तो मैं ऐसा व्यवहार कर रहे हो जैसे तुम रातोंरात करोडपति बन गए हैं । कितनी वेतन वृद्धि की पेशकश की गई है । उसने व्यंग्यात्मक टिप्पणी तो सभी के बारे में तुम भूल जाओ तुम्हारे मूड बॉस ने क्या कहा? जानते हो ऍम बैंक में अब तक की कार्यावधि में पहली बार मैंने अपने बॉस को कोई फैसला करने पर अफसोस करते देखा । जब उन्होंने मुझे परीक्षा के परिणाम के बारे में बताया तो मैं आसानी से उनकी आवाज में दर्द और उनके चेहरे की उदासी को महसूस कर रही थी । तो मेरे संधि की पुष्टि कर रहा था । कर्मचारी को निकालना हमेशा पीडादायी होता है है । हाँ, मुझे ऐसा लगता है । उसने कहा उससे खिलाया । अब ध्यान से सुनो । मैंने कहा सार्वजनिक परिवहन से फिर यात्रा मत करता हूँ । मैं इसके बारे में बहुत गंभीर हूँ । मैंने सार्वजनिक परिवहन से यात्रा नहीं की थी । विजय एक सहयोगी ने मुझे घर छोड दिया था । वो ऍम मेरे बॉस मुकुल माथुर अगले दिन मैंने डेनियल के बारे में पूछने के लिए सरगम को कॉल की । वो हमारे एक साधारण सा मित्र था । सरगम झूठ बोला मैं जानता था क्योंकि आस्था की डायरी का विवरण सरगम के जवाब से मेल नहीं खा रहा था । मेरे लिए सरगम से अनजाने में भेद खुलवाना मुश्किल था । सरगम सुनो, मैंने अत्यधिक धैर्य के साथ कहा, मुझे उम्मीद है तो मुझे अपने सबसे अच्छे दोस्त के पति के रूप में नहीं मान रही हो । मैं भी तुम्हारा दोस्त हूँ और तो मुझे सच बता सकती हूँ क्योंकि मुझे पता है कि डेनियल सिर्फ एक दोस्त नहीं हो सकता है । वास्तव में उसने संकोच से कहा, डेनियल उसका पूर्व प्रेमी है, फॅमिली नहीं था क्योंकि आस्था के जैसी लडकी का कोई प्रेमी नहीं होना मुझे आश्चर्यचकित करता । मैंने फिर पूछा वो असल कहाँ है? वो वर्तमान में गुडगांव में एक निवेश बैंकर के रूप में बार्कलेज बैंक के साथ काम कर रहा है । मैं निश्चित नहीं था कि मैं क्या पूछने वाला था लेकिन मैंने तब भी उसका सामना करने की कोशिश की । क्या कारण हो सकता है की आज आप उससे माफी मांगनी चाहिए क्योंकि उसने उसे बिना कोई सूचना दिए तुमसे शादी करने का फैसला किया । डेनियल तब कैलिफोरनिया स्टेट यूनिवर्सिटी में पढ रहा था । उसने आस्था से अनुरोध किया था उसके वापस लौटने तक वो उसके लिए प्रतीक्षा करें । लेकिन आस्था ने अपना निर्णय ले लिया था । डेनियल एक रोमन कैथोलिक है और उसका परिवार हिन्दू बहु को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं था । मुझे कुछ महसूस नहीं हुआ । कोई निराशा नहीं । कोई उदासी नहीं है । मुझे पता नहीं था कि कैसे प्रतिक्रिया करूँ । मैं शांति से खडा रहा है और संगम से अगला प्रश्न दागने का साहस बटोरा । सबसे मुश्किलें क्या वो भी संपर्क में हैं? मैं निश्चिंत नहीं हो जाये । डेनियल उसी दिन भारत लौट आया था जिस दिन तुम्हें आस्था से शादी की । क्या तुम्हारे पास कैसे भी उसका फोन नंबर या फिर कोई ड्रेस हैं है लेकिन मैं उसे केवल एक पर बताउंगी । मैं कुछ भी करने के लिए तैयार पास्ता के साथ वास्तव में क्या गडबड है? नहीं तो नहीं बता दूंगा लेकिन अगर तुम से केवल अपने तक रखने का फायदा करूँ, मुझे लगता है की तो मुझे आस्था की सबसे अच्छी दोस्त की तरह नहीं मान रहे । मैं भी तुम्हारी दोस्त हूँ ।

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“यात्रा कैसी थी?” उसने मेरे चेहरे को दुलारते हुए पूछा। “मैं ड्‍यूटी पर था।” “ठीक है! मुझे पता है कि इसका मतलब क्या है। यह विद्यार्थियों के लिए एक यात्रा थी और मेरे लिए नहीं।” मेरे कहने का मतलब वह हमेशा समझ लेती थी और उसमें मेरे लिए बोलने का साहस था। मैं मुसकराया, लेकिन कुछ बोला नहीं।, सुनिए प्यार भरी कहानी| writer: अजय के. पांडेय Voiceover Artist : Ashish Jain Author : Ajay K Pandey
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