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आख़िरी ख़्वाहिश अध्याय -05

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“यात्रा कैसी थी?” उसने मेरे चेहरे को दुलारते हुए पूछा। “मैं ड्‍यूटी पर था।” “ठीक है! मुझे पता है कि इसका मतलब क्या है। यह विद्यार्थियों के लिए एक यात्रा थी और मेरे लिए नहीं।” मेरे कहने का मतलब वह हमेशा समझ लेती थी और उसमें मेरे लिए बोलने का साहस था। मैं मुसकराया, लेकिन कुछ बोला नहीं।, सुनिए प्यार भरी कहानी| writer: अजय के. पांडेय Voiceover Artist : Ashish Jain Author : Ajay K Pandey
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हैं । पांच रात के खाने के बाद हम क्योंकि पुल की बातें करते हुए बिस्तर में एक दूसरे के निकट गए जीरो वॉट का लाल बल सही माहौल पैदा कर रहा था । मेरे भीतर की अशांति के बावजूद कमरे में हालत की आबादी ये मेरे जीवन के प्रियतम छणों में से एक था । इसलिए नहीं ये पहली बार था कि हम पांच सौ नहीं बल्कि इसलिए कि चीजों के प्रति मेरी धारणा बदलने शुरू हो गई थी । तीन सप्ताह के विषय के बाद मेरे बहुत एक आग्रह उच्चता बढते ना उसकी फुसफुसाहट की भी व्याख्या कर सकता था । लेकिन विडंबना ये थी कि मैं एचआईवी रोगी से प्यार नहीं कर सका । तुमने पूरे दिन क्या किया? उसने मेरे करीब हो सकते हुए मुझसे पूछा, हमारी नाक इतनी नजदीक थी कि हम आसानी से दूसरे के सांस को भी कर लेते हैं । मैं डॉक्टर के पास गया । ऐसे पहले की मैं अपनी बात पूरी कर सकूँ । उसने मेरे पास कार्ड भी हूँ । अभी तो ठीक है, पेशाब करने के दौरान दर्द होता है । मैंने इसकी चाहत से कहा होता है कहाँ हो कॅालिंग में था । मैंने दर्ज मिश्रित उदास भाव से कहा क्या गडबड है? गोवा की यात्रा के बाद मेरे पति के लिंग में दर्द है तो समझे करते हुए भडकी और मेरी और देखा है । मुझे आशा है कि तुम किसी के साथ सोई नहीं हो गई । हाँ मोनी, जब हम सच बोलते हैं, प्रतिवाद में हमारी आवाज हल्की हो जाती है । यहाँ तक की कोमलता से बोला गया खामोश पर्याप्त होता है । हो सकता है कि तुम्हारे बारे में सोच के समय मैंने हस्तमैथुन कर लिया हूँ । हालांकि तुमने कभी सोचा की मैं तुम्हें कितना याद करता रहा । क्यों तुम हमेशा नकारात्मक सोचने लगती हो? मैंने तीखा उत्तर दिया जब वह खीसे निपोरते लगी, माफ करो, मैं सिर्फ मजाक कर रही थी । डॉक्टर ने क्या कहा? लेडी डॉक्टर ने कहा कि मेरे मूत्रमार्ग में संक्रमण है । इसके कारण मुझे कुछ दिनों तक यौन संबंध बनाने से बचना होगा । मैंने चढाने के लिए सावधानी से डॉक्टर को एक महिला बताया तो अपनी जांच कराने के लिए महिला के पास गए । भगवान मेरा पति और एक डॉक्टर नहीं । वो दक्षिण भारतीय फिल्म की ये घटिया अभिनेत्री की तरह अपनी अभिव्यक्तियों को नाटकीय रूप से व्यक्त करने लगी । फिर वो थोडा कठोर हुई जैसे कि कुछ याद कर रही हूँ । अभी तुम ने क्या कहा? कुछ दिनों के लिए कोई यौन संबंध नहीं कुछ दोहराया । स्पष्ट रूप से उसके आवास में निराशा वो कुछ कहने जा रही थी जब मैंने उसे चूमा और रहा । मुझे बात पूरी करने दो । आज मैंने दस लाख रुपए की बीमा पॉलिसी कराई है जिसके लिए हम दोनों का चिकित्सा परीक्षण होना है तो कल डॉक्टर लाल पैथलैब्स का एक सहायक नमूना इकट्ठा करने के लिए आएगा । मैंने हमारी उसके सिर हिलाया और मैंने एक और हिदायत दी रक्त का नमूना जो लगभग सुबह आठ बजे तक लिया जाएगा । तब तक तो खाली पेट रहना पडेगा । कुछ चुप हो गई विषय को बदलने के लिए । मैंने पूछा तुम्हारी नौकरी की पुष्टि कब होनी है? सोमवार हमारा प्रबंधक कैसा है? मैंने उससे बात में उलझाए रखने की कोशिश की ताकि संक्रमित लिंग से उसका ध्यान हटाया जा सके । वो मूड मुकुल माथुर तो लगभग चिल्लाई । क्या उसने कुछ किया जिससे मेरी प्रिया को परेशानी हुई । बैंक बंद होने का आधिकारिक समय पांच बजे हैं और मैं साढे पांच में निकलती हूँ । फिर भी उसने मुझपर कार्यालय जल्दी छोडने का आरोप लगाया । उसने इस उम्मीद से मुझे देखा कि मैं उसका समर्थन करूंगा । एक पति को अपनी पत्नी की पीठ थपथपानी होती है इसलिए मैंने अपना सिर हिलाया और अपनी जीत को समर्थन में चटकाया । उसने मेरे साथ अपनी जिंदगी की तुलना क्योंकि बोलती रही वो आठ बजे तक अपनी मेज पर दफन रहता है तो मेरी की गलती है । कोई तरफ बोलती जा रही थी । वो लाखों कमाता है, कार्यालय में चौबीस घंटे बैठ सकता है । लेकिन तो मालूम है वो सबसे खराब पहुँच गया बिल्कुल । मैंने मुस्कुराकर कहा तो छोड तो नहीं देती । तुम सही कह रहे हो मुझे अपनी नौकरी बदल नहीं चाहिए । नहीं मैं उनसे बदलने के लिए नहीं कह रहा हूँ । मेरा सुझाव है कि तुम सुबह बैंकर की नौकरी छोड दो और अपना सपना पूरा करो । ठीक है मैं तो मैं घटना के बारे में बताऊंगी । इस सब हसी आ जाएगी । सरगम और मैं हमेशा अपने जीवन की महत्वाकांक्षाओं के बारे में बातचीत कर दी और सहयोग से हम दोनों अभिनेत्री बनना चाहती थी तो में तो मैं एक अभिनेत्री बनना चाहती थी । मुस्कराया और जिज्ञासा से पूछता हूँ पुलिस उसी मथुरा हूँ । मैं आम तौर पर हर बात पर मुस्कुराता हूँ और शायद ही कभी हस्ता हूँ जब की वो पूरी तरह विपरीत है । यही कारण है कि उसने मेरी मुस्कराहट वो उसी के रूप में माना । एक बार मुझे लगा कि मैं लेखक बनना चाहती थी क्या तो मैं पास करोगे? आस्था पथ एक लेखिका मैंने उसे अपनी बाहों से मुक्त कर दिया और अपनी दिलचस्पी दिखाने के लिए गौर से देखा तो नहीं । मुझे यकीन है कि तुमने कुछ पन्ने भी जरूरत क्या होंगे? हाँ मैंने कुछ पढे लिखे थे वो मैंने कहाँ है? तो उन्होंने कभी मुझे नहीं दिखाया । पढा मुझे पूरा यकीन है कि तुम अपनी नौकरी छोडनी चाहिए और लेखन पर जोर देना चाहिए । प्रोफेसर शर्मा जी पंद्रह हजार घर का कराया साथी प्रतिमाह अन्य खर्च के लिए दस हजार प्राप्त आवेदन पच्चीस हजार हम एक नई कार या कुछ और खरीदना चाहे तो क्या होगा? हम इसके लिए पैसे की व्यवस्था कैसे करेंगे? अंत में हमारे पास कुछ भी नहीं बचेगा । बस वो जो एक बार जब तुम एक लेखक बन गई, तुम्हारी हर किताब के लिए लाखों प्रतियां देखेंगे । फिर मैं तुमसे ही प्रश्न पूछ होगा तब तुम्हारा तक बदल जाएगा । लेकिन तो मैं कैसे सुनिश्चित कर सकते हूँ । मेरी प्रत्येक पुस्तक की एक लाख प्रतियां बिक जाएगी । मैं इस बारे में बहुत सकारात्मक हो । बस मुझे बनने दिखाओ जो तुमने लिखे थे । मैं भेजना के साथ बैठ गया और बोला मुझे अपनी पांडुलिपि दिखाओ नहीं चाहता था कि मेरी पत्नी एचआईवी से संघर्ष करते समय काम करें । हालांकि रोग की पहचान के पहले पुष्टि करनी होगी । मुझे कुछ गडबड की बुआ रही है । हम कहना चाहते हो जो कुछ भी तुम ने कहा मैं इस्तीफा देने नहीं जा रही हूँ । था अपने आप को देखो । तुम घर निराश हो, हमारी हताशा स्थाई बन जाए । इसके पहले ये केवल वक्त की बात है इसके बजाय अपने सपने को पूरा करने की कोशिश करो । मैंने पहली बार उसे समझाने की कोशिश की । मैं नहीं छोड रही हूँ और बहस हो गयी । उस ने आधिकारिक तौर पर हमारी बातचीत का समर्थन कर दिया । कम से कम मुझे बताओ कि तुमने लिखा क्या है? ऐसा मैंने लिखा था । मुझे एहसास हुआ कि मैं एक लेखक नहीं हो सकती हैं, ऊपर नहीं होगी । नहीं तुम क्या सोचती हूँ ये महत्वपूर्ण नहीं तो मुझे सिर्फ अपने पडने दिखाओ । मैंने कहा लेकिन वो एक इंच भी नहीं ठीक है मुझे सभी पन्ने मत दिखाओ । तुम कितने पढे लिखे थे ये बताऊँ । मैं उसे मजबूर कर दिया । उसने भरी आंखों से मुझे देखा और एक कहने से पहले गहरी सांस ली ।

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“यात्रा कैसी थी?” उसने मेरे चेहरे को दुलारते हुए पूछा। “मैं ड्‍यूटी पर था।” “ठीक है! मुझे पता है कि इसका मतलब क्या है। यह विद्यार्थियों के लिए एक यात्रा थी और मेरे लिए नहीं।” मेरे कहने का मतलब वह हमेशा समझ लेती थी और उसमें मेरे लिए बोलने का साहस था। मैं मुसकराया, लेकिन कुछ बोला नहीं।, सुनिए प्यार भरी कहानी| writer: अजय के. पांडेय Voiceover Artist : Ashish Jain Author : Ajay K Pandey
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