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अम्मा: जयललिता - 25 (ममतामयी मां)

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तमिल फिल्मों की ग्लैमर गर्ल से लेकर सियासत की सरताज बनने तक जयललिता की कहानी एक महिला की ऐसी नाटकीय कहानी है जो अपमान, कैद और राजनीतिक पराजयों से उबर कर बार-बार उठ खड़ी होती है और मर्दों के दबदबे वाली तमिलनाडु की राजनीतिक संस्कृति को चुनौती देते हुए चार बार राज्य की मुख्यमंत्री बनती है| writer: वासंती Voiceover Artist : RJ Manish Script Writer : Vaasanti
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ममता मई माँ जयललिता जब दो हजार ग्यारह के चुनावों में भारी जीत का आनंद ले रही होंगी तो उन्हें चुनाव हारने के बाद करुणानिधि कुनबे के लिए आये बुरे दिन को देखकर भी मजा आ रहा होगा । केंद्र की कांग्रेसनीत सरकार में मंत्री ए राजा जिन्हें करुणानिधि ने राजनीति में आगे बढाया था, खुद डीएमके नेता की बेटे और राज्यसभा सांसद कनिमोझी को टू जी घोटाले से संबंधित जालसाजी और भ्रष्टाचार के आरोपों में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था । जयललिता के अनुसार बी । एम । के इस हार के बाद अब कभी उठा नहीं पाएगी और अब अन्नाद्रमुक के लिए चुनौती पेश करने की स्थिति में नहीं रह गई थी । दो हजार ग्यारह के विधानसभा चुनावों में जीत के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं से उन्होंने कहा, पिता डीएमके की चिंता नहीं कीजिए । जहां तक इस पार्टी की बात है तो यह एक खत्म कहानी । सत्ता में पिछले अनुभवों ने उन्हें दिखा दिया था कि साधा सोचे विचारे बिना सिर्फ उससे और प्रतिशोध की भावना से की गई कार्रवाइयों से अंततः उन्हें ही नुकसान होता है । इसी कारण मुख्यमंत्री के रूप में उनका तीसरा कार्यकाल अपेक्षाकृत शांत रहा है । हालांकि इसके बावजूद कई मामलों में पहन माफ करने को तैयार नहीं देखी । प्रशासन में उन्हें किसी भी तरह का विरोध बर्दाश्त नहीं हुआ है । उनकी अपेक्षा यही रही कि किसी भी विषय पर उन की बात को कानून जैसा आदर मिलना चाहिए । उन्होंने अपनी उन अनेक लोकलुभावन चल कल्याण योजनाओं के जरिए जनसमर्थन जुटाया जिनके जरिए एक आम आदमी का उसकी जरूरत की सभी चीजें अम्मा के नाम से मिल जाती है । अपनी जनकल्याण योजनाओं और चुनावी भाषणों में उन्होंने खुद को एक माँ के रूप में पेश किया । किसी भी जन असंतोष को उन्होंने दरियादिली दिखाकर काबू में क्या? आईपीएल परिवार के लिए मुफ्त बीस किलो चावल, मिक्सी, ग्राइंडर और पंखे? हालांकि पिछले की गलत अभी दूर नहीं हुई है और स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए साइकिल की सारी चीजें अम्मा प्रोडक्ट के रूप में वितरित की गई । शहरों और कस्बों में नगर निगमों द्वारा संचालित अम्मा कैंटीन बनाये गए चार इडली एक रुपये में और सही चावल तीन रुपये में मिलते हैं । तमिल लोग इस पुरानी कहावत पर यकीन करते हैं कि जो आपका पेट भरे तो उम्र उसका एहसान मंदिर हो । दो हजार चौदह के आसन संसदीय चुनाव होने नई परिद्रश्य नाइस आपने बनाएंगे पूरे तमिलनाडु में लगाए गए होर्डिंग्स में जयललिता को प्रधानमंत्री पद के दावेदार के रूप में पेश किया गया । वहाँ प्रधानमंत्री जैसा व्यवहार करती भी देगी और उन्होंने बडी बडी घोषणाएं की । हालांकि पूरी तरह समझाते हुए हैं कि इन्हें चुनौती दी जाएगी । उन्होंने आजन्म कारावास की सजा काट रहे राजीव गांधी के हत्यारों को रिहा करने का ऐलान किया । अब वहाँ जान पाने की तमन्ना कर रही थी । तमिलनाडु की सभी सीटों पर चीज यदि वहाँ इस आंकडे के आस पास भी पहुंचती है तो किंगमेकर की भूमिका में होगी क्या? सम्भवता किंग की भूमिका अब तीसरे मोर्चे की बात चली तो पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सार्वजनिक रूप से कहा कि यदि संभावना बनी तो प्रधानमंत्री पद के लिए उन्हें समर्थन देंगे । यदि भाजपानीत एनडीए को आम चुनाव में अपर्याप्त सीटें मिली तो उसे जयललिता से समर्थन मांगना पडता है । चाहे जो भी परिणाम हो, उन्होंने मान लिया कि जीत उनकी होगी । अपने पार्टी कार्यकर्ताओं से उन्होंने कहा, अन्नाद्रमुक केंद्र की सत्ता पा सकती है और इस देश को एक नहीं आजादी दिला सकती है । कार्यकर्ता उनकी बातों पर यकीन कर रहे थे लेकिन पूरे देश को चकित कर देने वाली मोदी लहर उनके सारे सपनों को लील करेंगे और भले ही अन्नाद्रमुक सैंतीस संसदीय सीट जीतते हुए तमिलनाडु में अत्यंत सफल रही । वो ना तो किंगमेकर दी और ना ही किंग । लेकिन जयललिता तभी भी पीछे मुडकर देखने वाली नहीं रहे और चुनाव हो सका । उस पर उन्होंने कभी सोच भी नहीं किया । वो वर्तमान में जीती हैं और इस समय अपनी मौजूदा स्थिति से खुश थी । जो भी हो उनकी पार्टी लोकसभा में तीसरी सबसे बडी पार्टी थी और उन्हें पक्का यकीन था कि तमिलनाडु में अब उन्हें हराया नहीं जा सकता है । लेकिन वो अपने सिर पर लटकती तलवार को लगभग भूल ही गई थी । कर्नाटक की अदालत में उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला अभी लंबित था या शायद उन्होंने सोचा होगा कि तमिल जनता में उनकी भारी लोकप्रियता और राजनीतिक ताकत के मद्देनजर उन्हें अपनी गलतियों के लिए माफ कर दिया जाएगा । अपने तीसरे कार्यकाल में वो अपनी शक्तियों को बढाती और उनका इस्तेमाल करती दिख रही थी । अतीत में बहुत के खिलाफ चले लगभग हर मुकदमे में पर की गई थी और इसलिए उन्होंने सोचा होगा की बेहिसाब संपत्ति अर्जित करने के मामले में भी वहाँ छूट जाएंगे । सत्ताईस सितंबर दो हजार चौदह को जिस दिन फैसला आना था, सैकडों की संख्या में पार्टी कार्यकर्ता बेंगलुरु में सत्र न्यायालय परिसर में अम्मा की जीत पर पटाके छोडने के लिए बिल्कुल तैयार होकर होते थे इसलिए फैसला बिजली के झटके की तरह लगा । उन्हें दोषी पाया गया था । उनको चार साल के कारावास की सजा सुनाई गई और सौ करोड रुपए का जुर्माना भी हुआ था । अम्मा के चेहरे पर उस तरह का कोई भाव नहीं था जैसा में पुलिस कार्डन से चेंज ले जाए । जाते समय देखा था तब उन्होंने घर के बाहर खडे समर्थकों की ओर लिखा था और लडाई नमस्ते करें । कल हमारा है का उद्घोष किया था । इस बार कुछ देर के लिए बाहर आई अपने विश्वस्त अनुयायी ओ पनीरसेल्वम से बात करने जो उनकी अनुपस्थिति में मुख्यमंत्री होंगे । उन्होंने करीब बीस दिन बेंगलुरु की जेल में चुपचाप पिता है । इस पूरी अवधि में उनका संपूर्ण मंत्रिमंडल और पार्टी के वरिष्ठ नेता धार्मिक अनुष्ठानों से जुडे रहे । तमिलनाडु के मंदिरों में लगभग तारीख देवी देवता की विशेष पूजा की गई । उन्हें स्वास्थ्य कारणों से अठारह अक्टूबर को जमानत पर रिहा कर दिया गया । लेकिन वो खुशियाँ बनाने के लिए इंतजार कर रहे पार्टी कार्यकर्ताओं से नहीं मिले । वो अपने आप में सिमट गई और अगले आठ महीनों तक वो इस गार्डन से बाहर नहीं निकली । किसी को नहीं पता । इस अवधि में उन्होंने अपने घर में क्या क्या ऐसी अफवाहें थीं कि वह गंभीर रूप से बीमार चल रही हैं । इसके बाद उनका भाग्य एक पर फिर पलटा । ग्यारह मई दो हजार पंद्रह को कर्नाटक उच्च न्यायालय ने उन्हें आय से अधिक संपत्ति के मामले में पूरी तरह बरी कर दिया । क्या एक सनसनीखेज वापसी थी जयललिता की प्रतिक्रिया? एक साधारण बयान के रूप में सामने आए फैसले से मैं पूरी तरह संतुष्ट है और इससे साबित हो गया है कि बाहर निर्दोष थे । डीएमके और कर्नाटक सरकार फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने गए लेकिन माँ को इसकी परवाह नहीं थी । आपने ही तौर तरीके के अनुसार उन्होंने तय कर लिया कि जब जो होगा तब उसकी चिंता की जाएगी । एक बार फिर वह मुख्यमंत्री के पद पर कायम थी तो दोबारा चुनाव लडने के लिए उनके पास छह महीने का वक्त था । उनकी अनुपस्थिति में सरकार बिल्कुल ठप पडी थी । वहाँ अपने बीमार होने संबंधी रिपोर्टों को चोट लाते हुए रुकी पडी योजनाओं को शुरू करने लगे । यह सुनिश्चित करते हुए कि इनके लिए श्रेय सिर्फ उन्हें मिले, जब उन्होंने चेन्नई की आरके नगर सीट से चुनाव लडा तो बहुत बहुत भारी अंतर से विजयी हुई । अम्मा इस बात पर खास ध्यान नहीं देती हैं कि उनकी राजनीति में पदार्पण के बाद के वर्षों में तमिलनाडु कितना बदल गया है । इंटरनेट आॅफ से जुडे तमिलनाडु के युवा एक बडे परिवर्तन से कुछ समय हैं । दो तरफ दलों डीएमके और अन्नाद्रमुक के लंबे शासन के खिलाफ नई आवाजें उठ रही हैं । निम्न मध्यवर्ग के बीच भले ही जनकल्याणकारी योजनाएं अत्यंत लोकप्रिय हैं लेकिन युवाओं के अरमान कुछ और है । जब चेन्नई और राज्य के अन्य हिस्सों में अभूतपूर्व बारिश हुई और चेम्बरमबक्कम बांध के द्वार तेर से खोले जाने के कारण चारों तरफ पानी भर गया तो सरकार तीन दिनों तक पंद्रह बनी रही । लोग गुस्से में रहे कि जयललिता ने सहायता कार्य तुरंत शुरू नहीं करवाया । मई दो हजार सोलह के विधानसभा चुनाव करीब आने तक जनता का गुस्सा बना हुआ था और उनके विरोधियों को उम्मीद थी कि इसका असर चुनाव परिणामों पर दिखेगा । चुनाव अभियान के जोर पकडने तक बहुत शांत और आत्मविश्वास से भरी दिखाई दे । डीएमके जहाँ पर करारी से चुनावी समझौते की कोशिश कर रही थी वहीं उन्होंने एक साहसिक घोषणा की कि उनकी पार्टी सभी दो सौ चौंतीस सीटों पर अपने दम पर चुनाव लडेगी । करुणानिधि का एक संयुक्त मोर्चा खडा करने का प्रयास फलीभूत नहीं हुआ और इस कारण चुनाव में पांच पक्षीय मुकाबला हुआ । डीएमके प्लस कांग्रेस, भाजपा, पीएमके और वजह कान का मोर्चा जिसमें जनकल्याण मोर्चे के चार गुड शामिल थे । चुनाव विश्लेषक एकमत थे की सरकार विरोधी मत पडेंगे और इसका फायदा जयललिता को मिलेगा । लेकिन क्या उनका अपना वोटबैंक लक्षण था? क्या पार्टी पर उनकी पकड पक्की थी कि उनके चल कल्याणकारी सोचना है । एक बार फिर उन्हें सत्ता दिलाएंगे । मुकाबला कडा होने वाला था । करुणानिधि का बेटा और घोषित उत्तराधिकारी स्टालिन पिछले साल भर से पूरे तमिलनाडु की यात्रा कर रहा था । आपने ट्रेस और भाषण में बदलाव के बाद पहले एक आधुनिक सोच वाला और जवान व्यक्ति बनकर उधर चुका था । वहाँ आम आदमी की भाषा बोल रहा था । कुल मिलाकर स्टालिन अब तक एक बडे जनाधार वाले नेता के रूप में उभर चुका दिख रहा था । आपने वर्षीय पिता का सही उत्तराधिकारी चुनावी सभाओं में जब जयललिता सिल्वर कलर की अपनी टोएटा कार्डों पर अन्नाद्रमुक की लाल काले झंडे लहराते हुए पहुंचतीं तो समर्थक तालियों के गडगडाहट से उनका स्वागत करते हैं और धीमी चाल में थके हुए मंच पर पहुंचते और एयर कूलर से गिरी । आपने विशेष कुर्सी पर चाहे राजनीति इस बार बहुत पहले की तरह जोशीले भाषण नहीं दे रही थी । इसके बजाय कडी धूप में सुबह से ही अपना इंतजार कर रही लाखों की भीड को एक लिखित भाषण पढकर सुनाती थी । इसमें थी उनकी अपनी उपलब्धियों की सोची और उनके शत्रु करुणानिधि के खिलाफ शिकायतों की । फेहरिस् इस बार पहले जैसी आक्रामक ता और उत्साह नहीं देख रहा था लेकिन भीड को इस से कोई मतलब नहीं दिख रहा था । उल्टे एक रैली से दूसरी तक पहुंचने पर उन्हें सके और उस तरह व्यक्ति के रूप में बाकर समर्थकों के मन में उनके लिए बचाव की प्रवृत्ति पैदा हो रही थी । उनकी रैलियों में रिपोर्टर लोगों से पूछ कर रहे थे, क्या बे इस बार भी उन्हें वोट देंगे? स्पष्ट उत्तर देने वाले काम ही थे । अनेक लोगों ने यह जरूर कहा कि वे उन्हें वोट दें क्या नहीं । उन्हें सुनने के लिए हमेशा ही आएंगे । सत्ता में रहे या नहीं, उनके लिए हमेशा हम आ रहे हैं ।

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तमिल फिल्मों की ग्लैमर गर्ल से लेकर सियासत की सरताज बनने तक जयललिता की कहानी एक महिला की ऐसी नाटकीय कहानी है जो अपमान, कैद और राजनीतिक पराजयों से उबर कर बार-बार उठ खड़ी होती है और मर्दों के दबदबे वाली तमिलनाडु की राजनीतिक संस्कृति को चुनौती देते हुए चार बार राज्य की मुख्यमंत्री बनती है| writer: वासंती Voiceover Artist : RJ Manish Script Writer : Vaasanti
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