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अम्मा: जयललिता - 23 (डीएमके का पलटवार)

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तमिल फिल्मों की ग्लैमर गर्ल से लेकर सियासत की सरताज बनने तक जयललिता की कहानी एक महिला की ऐसी नाटकीय कहानी है जो अपमान, कैद और राजनीतिक पराजयों से उबर कर बार-बार उठ खड़ी होती है और मर्दों के दबदबे वाली तमिलनाडु की राजनीतिक संस्कृति को चुनौती देते हुए चार बार राज्य की मुख्यमंत्री बनती है| writer: वासंती Voiceover Artist : RJ Manish Script Writer : Vaasanti
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डीएमके का पलटवार जब दो हजार छह के विधानसभा चुनावों के प्रचार कार्य शुरू हुए तो डीएमके कट जोड के दलों ने टीवी कैमरे के सामने घोषणा की कि उन्होंने सिर्फ एक वजह से हाथ मिलाए हैं । उनका मुख्य लक्ष्य बॉम्बे लाइफ को नष्ट करना है तो मिलाई किसी महिला के लिए एक अपमानजनक शब्द है । जयललिता इससे अविचलित अपनी जीत के प्रति आश्वस्त रही सुनामी के बाद के दिनों में उनके निर्देश पर चला । अधिकारियों ने जो अच्छे काम किए थे उनकी खासी दारी कोई दी और जयललिता को विश्वास था कि वो प्रतिद्वंदियों पर भारी पड रही हैं । लेकिन डीएमके ने उनके इस आत्मविश्वास की खबर निकाल दी । चुनाव जब बिलकुल सर पर था, वे एक असाधारण चुनाव घोषणापत्र लेकर आए । उन्होंने गरीबी रेखा के नीचे रहने वालों के लिए दो रुपये किलो चावल, मुफ्त रंगीन टीवी और मुफ्त गैस कनेक्शन का फायदा क्या भूमिहीन गरीबों के लिए घोषणा पत्र में दो एकड जमीन का फायदा था । डीएमके का घोषणापत्र एक चुनावी मास्टर स्ट्रोक था जो करुणानिधि महिला मतदाताओं में कभी लोकप्रिय नहीं रहे । अब एक धनी और उदार पिता के रूप में देखे जा रहे थे जो उसी तरह उपहार देगा जैसे एक बात अपनी बेटी को देता है । विधानसभा चुनावों में डीएमके गठबंधन को जीत हासिल हुई । हालांकि मतदाताओं को तमाम तरह के प्रलोभन देने के बाद भी पूर्ण बहुमत पाने में नाकाम रहा था । जयललिता के अन्नाद्रमुक का प्रदर्शन भी बिल्कुल खराब नहीं था । एक सौ एक सीटों के साथ यह डीएमके के बाद दूसरी सबसे बडी पार्टी के रूप में सामने आई । सम्भवता अन्नाद्रमुक का प्रदर्शन और भी अच्छा रहता है यदि फिल्म स्टार रजनीकांत ने एक नया दल डीएमडीके शुरू नहीं क्या होता है जिसे जयललिता ने धूल कहकर खारिज कर दिया था । डीएमडीके ने आठ प्रतिशत वोट हासिल कर अन्नाद्रमुक के जनाधार में सेंध लगाई थी । कुल पैंतीस सीटों पर जीतने वाली कांग्रेस ने मंत्रिमंडल में जगह पाने की उम्मीद की थी, लेकिन करुणानिधि उसे दूर रखने में सफल रहे और इस तरह सहयोगी दलों के बाहर से समर्थन के दम पर डीएमके के हाथों में संपूर्ण सत्ता थी । शपथ लेने के कुछ मिनट बाद करुणानिधि ने लाट के अंदाज में दो रुपए प्रतिकिलो की दर से राशन का चावल बेचने के सरकारी के आदेश पर हस्ताक्षर कर दिया । महीने भर के भीतर मुफ्त रंगीन टीवी और गैस कनेक्शन के वितरण का कार्य आरंभ हो गया । लेकिन अब मुख्यमंत्री अपने पारिवारिक झमेलों में सादा उलझे रहने लगे । लंबे समय से अफ्वाहों का बाजार कर्म था कि करुणानिधि के परिवार में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है और यह भाइयों अजगिरी स्टालिन के बीच प्रतिद्वंदिता नहीं थी जिससे कि पूरा तमिलनाडु परिचय था बल्कि यह मारन भाइयों करुणानिधि के भांजे मुरासोली मारन के बेटों के बढते प्रभाव के कारण था हूँ । पारिवारिक मतभेद तब खुलकर सामने आ गए जब तमिल दैनिक दिनाकरन ने एक सर्वे झापा की टीएमके पार्टी के भीतर करूणानिधि का उत्तराधिकारी कौन होना चाहिए । उल्लेखनीय है कि दिनाकरन का स्वागत पर दयानिधि मारन के भाई कलानिधि मारन के सन टीवी नेटवर्क के पास है । सर्वे के परिणाम में कहा गया था, प्रतिशत मतदाता एम के स्टालिन को करुणानिधि के उत्तराधिकारी के रूप में देखना चाहते हैं । सिर्फ दो प्रतिशत लोग अजगिरी के पक्ष में हैं । आग लगाने के लिए इतने चंदारी काफी थी । नौ मई दो हजार सात को अलागिरी के समर्थकों ने मदुरई में दिनाकरन के कार्यालय पर हमला कर दिया । काफी तोड फोड की गई और पेट्रोल बम भी फेंके गए । इस हमले में मीडिया ग्रुप के दो कर्मचारी और एक सुरक्षा गार्ड की मौत हो गई । अपने बुलेटिनों में सनटीवी ने अलागिरी की गिरफ्तारी की मांग करते हुए आरोप लगाया के उन्होंने खुद आपने कुंडों से हमला करवाया था । तमिलनाडु के सबसे लोकप्रिय टेलीविजन चैनल सनटीवी के दर्शक यह सब देखकर आतंकी थे । डीएमके को जल्दी ही अहसास हो गया की और सादा बदनामी नहीं हो इसके लिए तुरंत प्रयास किए जाने की जरूरत है । राज्य के बिजली मंत्री रिकॉर्ड वीरास्वामी ने खुलासा किया कि दयानिधि मारन ने कथित रूप से धमकी दी है कि जा गिरी को गिरफ्तार नहीं किया गया तो इसके बुरे परिणाम हो सकते हैं । डीएमके पार्टी ने एक बैठक के बाद दयानिधि मारन की पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए निंदा की और पार्टी नेता करुणानिधि को उसके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए अधिकृत क्या युवा नेता दयानिधि ने जैसे केंद्रीय संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री के रूप में थोडे ही दिनों में सफलता सफलता मिली थी, अपना इस्तीफा सौंप दिया । करुणानिधि ने बडी चतुराई से क्या कहते हुए मीडिया को चुप करा दिया कि वह मद्रासी हमले की जांच का काम सीबीआई को देने की अनुशंसा कर रहे हैं क्योंकि उनके खुद के बेटे का इसमें हाथ बताया जा रहा है । जल्दी ही बात स्पष्ट हो गई कि परिवारिक कलह के पीछे पैसे और ताकत की खींचतान है । अचानक ही मांगन भाइयों और परिवार के बुजुर्ग मुखिया करुणानिधि में मेल मिलाप हो गया और परिवार के प्रसन्न और एक जो तस्वीर सभी तमिल अखबारों में प्रकाशित हुई जब अपने पुराने गठबंधन सहयोगियों के साथ ही डीएमके दो हजार नौ के लोकसभा चुनावों में गई और उसे अठारह सीटों पर जीत हासिल हुई तो करुणानिधि ने केंद्र में सत्ता में आई कांग्रेस के साथ मोल भाव कर दयानिधि मारन के लिए मंत्रिमंडल में शामिल कराने के साथ साथ अजहागिरी के लिए भी एक जगह बनवा दी । अजगिरी इससे पहले तमिलनाडु से बाहर कदम तक में ही रखा था । करुणानिधि ने अपनी बेटी कनिमोझी को भी राज्यसभा में भेज दिया । करुणानिधि द्वारा इस तरह खुलकर अपने परिवार को आगे बढाने के कदम पर पार्टी के भीतर बेचनी पडती जा रही थी । डीएमके के भीतर इस तरह की बातें होने के बावजूद संसदीय चुनाव के बाद कमजोर देखने वाली पार्टी अन्नाद्रमुक थे । इससे क्या है? साहिर होता था कि तमिलनाडु में चुनाव जीतने के लिए एक अच्छा गठबंधन क्यों जरूरी है? भले ही चुनाव लोकसभा के हूँ क्या विधानसभा के? लेकिन जयललिता का अपने गठबंधन सहयोगियों के प्रति रवैया फिर भी संतोषजनक नहीं था । उन्होंने या तो सहयोगी दलों की अपेक्षा की या उनकी मांगों पर विचार करने से इंकार कर दिया । आपने पार्टी जनों से भी लगातार दूर होती जा रही थी । पार्टी के चला सचिव और विधायक उनकी सलाह चाहते थे लेकिन हम मान चेन्नई से कहे रहने लगी थी । उनका काफी समय ऊटी स्थित अपने कोडानाडु रिजॉर्ट में बीतता था ।

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तमिल फिल्मों की ग्लैमर गर्ल से लेकर सियासत की सरताज बनने तक जयललिता की कहानी एक महिला की ऐसी नाटकीय कहानी है जो अपमान, कैद और राजनीतिक पराजयों से उबर कर बार-बार उठ खड़ी होती है और मर्दों के दबदबे वाली तमिलनाडु की राजनीतिक संस्कृति को चुनौती देते हुए चार बार राज्य की मुख्यमंत्री बनती है| writer: वासंती Voiceover Artist : RJ Manish Script Writer : Vaasanti
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