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अनजानी मौत  का रहस्य -03 in  |  Audio book and podcasts

अनजानी मौत का रहस्य -03

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Publisher:- FlyDreams Publications ... Buy Now:- https://www.amazon.in/dp/B086RR291Q/ ..... खौफ...कदमों की आहट कहानी संग्रह में खौफनाक डर शुरू से अंत तक बना रहता है। इसकी प्रत्‍येक कहानियां खौफ पैदा करती हैं। हॉरर कहानियों का खौफ क्‍या होता है, इस कहानी संग्रह को सुनकर आप समझ जाएंगे! कहानियों की घटनाएं आस-पास होते हुए प्रतीत होती हैं। आप भी सुनें बिना नहीं रह पाएंगे, तो अभी सुनें खौफ...कदमों की आहट …!
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अंजानी मौत का रहे ऐसे भाग तीन एक रात अचानक कुछ बच्चे दौडते तौर से ऑर्डेन के पास जाते हैं और उसे कुछ बताते हैं । जैसे सुनते ही बॉर्डर बच्चों के साथ दौड पडती है तो सभी लोग दौड कर उसी हॉस्टल के पीछे खडे हो जाते हैं और दूर से पांचवीं मंजिल पर नजर पडती है । जाॅन गुम हो जाते हैं । बहुत ही हो अपना मन था शालिनी हाँ तो उसके पांचवी मंजिल के ऊपर बनी बाउंड्री के ऊपर चल रहे थे । ये देखकर वहाँ उपस्थित सभी के होश गुम थे । किसी की समझ में नहीं आ रहा था कि शालिनी कैसे पहुंचे और वहां पहुंची तो पोस्ट बाउंड्री के ऊपर क्यों टहल रही है । देखने वालों के मुंह खुले के खुले थे । शालिनी की इस हरकत में सभी को ताज्जुब में डाल दिया था । तभी उस हॉस्टल के कुछ सीनियर बच्चे और स्टाफ पांचवी मंजिल की तरफ दौड लगाते हैं । शालिनी के नीचे कूदने से पहले ही उन लोगों ने उसके हाथ को चतुराई से पकडकर खींच कर उसे बचा लिया । इस हरकत के बाद मुझे स्कूल वालों का कॉल आया और मुझे शालिनी की सारी हरकतों का विस्तारपूर्वक ब्यौरा दिया गया । अगले दिन अशालीन एक उसके हॉस्टल से लेने के लिए निकल पडे हैं क्या हाल आने के बाद मैंने उसका दाखिला यहाँ के पास के ही विद्यालय में करवा दिया । वहाँ एडमिशन करवाने के बाद तो महीनों तक तो बिल्कुल सामान्य ही रहेगा । लेकिन पिछले पारा दिनों से अजीब से हरकते करने लगे । चुकी बिलकुल ही ऐसा बनने लगी । कभी रात को छत पर तो कभी अंधेरा करके अपने कमरे के कोने में दीवार की तरफ मुंह करके बैठे रहने लगी । एक हफ्ते में हद कर दी । पिछले रविवार को पंजाब से मछली लेकर आया था । उस दिन एशिया कप का फाइनल मैच था । इंडिया पाकिस्तान के मध्य हो रहा है । घर में सभी ने सोचा कि मैच खत्म होने के बाद एक मछली खनन दिया जाएगा । अभी जब मैच के कि नहीं खत्म हुई तभी जीप से तुम खंडर अच्छी कच्छ की आवाज में सबका ध्यान इन हरकतों की तरफ की जाए । शालीन की मम्मी आवाज का पीछा करते हुए रसोई घर की तरफ जाती और फॅमिली के साथ भागीदारी आदि । इससे पहले की किसी के कुछ समझ में आता बनी शालिनी की मम्मी को आराम से सो पेपर बिठाया । उस चीज के पीछे का कारण जानना चाहा तो उसने रसोई घर की तरफ इशारा किया तो ऍर ये देखकर अवाक रह गया कि शालिनी रसोई घर के खिलाफ पर बैठी हुई थी तो मच्छी मार्किट चलाया था । उसे सच्चाई कुच्छ कुच्छ करके चला रहे थे । फॅमिली की कोई ऐसा फाॅर्स की तरह कैसे खा सकते हैं? मैंने उसे रोकने के लिए जैसे उसका पकडा । मुझे जोर से धक्का दिया जिसकी वजह से मैं काफी दूर पडता है । स्तर पर गंभीर चोट आई थी । थोडी देर कराने के बाद में उठा । तब तक मेरी चाची भी आ गई थी । दोनों ने शालिनी को जोर से पकडा लेकिन वो पहली बार किसी मर्दानी आवाज में बोल रही थी । ज्यादा आप गेम अच्छी बात करो । तारीख आ रहा हूँ तो उसे सामान्य स्थिति में करने की लाख कोशिश कर रहे थे लेकिन उस पर नियंत्रण करना बडा ही मुश्किल हो रहा था । लगभग आधे घंटे में वो पूरी तरह से नियंत्रण में उसकी सास वक्त में हमें पूरी तरह से ये मानने पर विवश कर दिया कि ये कुछ बाहर ही सकती है । इसका सामना करना हमारे बजकर नहीं हैं । दिन प्रतिदिन इसकी इस अजीब तरह की हरकतें बढती जा रही थी । जबकि किसी भी आम आदमी के लिए बर्दाश्त करने के बाहर अच्छा हमें समझ नहीं आ रहा था की समस्या से निजात कैसे पढना है । मैंने अपनी तो उसकी मदद से दिल्ली में फकीर बाबा की सहायता लेते । उन्होंने तब तक हमारी काफी मदद की जब तक हम लोग दिल्ली में थे । लेकिन आज तो हमें ऍसे हमेशा के लिए मुक्ति आपको निकल पानी हो गया । अभी चाचा की बात पूरी भी नहीं की थी कि शालिनी कुर्सी पर बंदी बंदी चीखने लगी । तिवारी बाबू हो ॅ पहले रखते हैं तो करवाना शौक है क्यूँ पांच में ना हैं तिवारी बात तो खूब बढिया मुझे तो कब तक कैसी मंगाना है तुम्हारा सर्वनाश होने से कोई रोक नहीं सकता हूँ । फॅमिली पडे धारदार तक उसे काले मुर्गे का सर धड से अलग किया और ऍम धारकों शालिनी की खोपडी से लगभग एक फुट की ऊंचाई से तब काॅल अचानक शाॅप खोलती हूँ के अंदर से जीते उपहार भी आपने नहीं अब उस काले मुर्गे के फॅमिली के चीज पर पढ रहा था और उसे वो उनका कट कर दिए जा रही थी । कॅश पूरा चेहरा के लाल छोटों से पैसा बहुत देख रहा था । थोडी देर में वह कुर्सी समेत अपनी जगह पर खाली हो गया । सोर्स ओर से चीज हो गई थी कॅश नहीं मुझे और कौन चाहिए मेरे प्यास अभी नहीं । मुझे को पहले से और की ताकत बडा खतरनाक होता है । उसको देखकर लग रहा था कि ये रसिया तो वो पल भर में तोड देगी । उठा के बाहर मारकर हंस रही थी और रह रहे के ठीक कर अपनी प्यास बुझाने के बात कर रहे थे । बडी फॅमिली कितने चाचा चाची कुछ लेने पर अपनी पकड तेज करने को कहा । ऍम काल की खोपडी निकली और अपनी हथेली पर रखते हुए से दूसरे हाथ से खडे हो जो उसी नरकंकाल की हाथ लग रहे हैं । उस बंदे को कंकाल कपडे के ऊपर गोल गोल घुमाते हुए कुछ मंत्र उच्चारण करता जा रहा था हूँ हूँ हूँ काम काल खोपडी के ऊपर हरकतें करता शालीन की जगह पर फिल मिलने लगते हैं और पूरी कोशिश करती कि किसी तरह हो सकती से हजार हो जाए । वैसे तो मुझे बिल्कुल डर नहीं लगता लेकिन जब इन चीजों से सामना होता है तो थोडा क्या हो जाता है । लगभग पंद्रह से बीस मिनट तक ये खेल चलता रहा हूँ । अब तांत्रिक शालनी के बिलकुल काम नहीं करता है । बहुत दुकान है क्यों इस बच्ची को परेशान कर रहा है । सत्ता आवाज के साथ तांत्रिक ने पूछा अभी कॉल बुरा किसी गोल होना । ॅ हो गए तो पांच में रहा एकदम बरतानी । आवाज में भराई आवाज में शामिल कर मैं कुछ नहीं बोलूंगा । सर्वनाश होगा तो कोई नहीं बचेगा हूँ । पता नहीं होगा तो क्या उस बेचारी को परेशान कर रहा है? फिर तो चाहता क्या है? इस बार तांत्रिक नहीं होते हुए पूछा और उस पर वहीं चल सकते हो । अभी जो आवास पर आई सी आ रही थी आपको रुआंसी आवाज में बोली फॅस उसकी तरह के अचानक रोने की आवाज में हमें तक ला दिया । अचार चाची ने उनके हाथ खोलने को कहा, लेकिन तांत्रिक ने ये कहते हुए मना कर दिया कि ऐसा करने से सारा खेल फॅमिली बेटी से भी हमेशा के लिए हाथ में बैठे हैं । हाॅल बोल तू कौन है और क्यों से परेशान कर रही है? इस बार तांत्रिक ने आदेशात्मक रूप से उससे प्रश्न किया तो ऍम ऍम होगा दिया है मुझे अब शालिनी को अपना क्या वादा निभाना होगा और हमारे साथ हमारी दुनिया में चलना ही होगा । ये कहकर शालिनी के अंदर क्या मैं फोर्स ओर से पहुंचे लगे होने की आवाज इतनी करते थे कि कमरे में आवाज इनका कराकर और ऍम कर रहे थे । कैसा होगा साला तुम्हारे साथ कैसा होगा हुआ इस बार का आंतरिक ने जिज्ञासुओं की भांति पूछा । पीछे बाद हादसे तीन वर्ष पहले है । जब ना इष्र्या और खाली नहीं । बहुत अच्छे दोस्त को करते थे हम पास में, लाइब्रेरी में । यहाँ तक कि मैं अभी तक हर जगह ऐसा ही जाते थे । ऍम साथ पढना, सोना और जागना होता था । अब तीनों एक दूसरे से कुछ भी नहीं पाते थे । लेकिन सुबह इतना कहते वो पक्का होने लगी । आखिर उस रात को क्या हुआ था हमारे साथ बताओ । अगर ऐसा क्या हुआ था जिसका बदला लेने को तुम हो? यकीन मानो मैं तुम्हारी कुत्ते सुन जाऊंगा । रखने, दिलासा दिलाते हुए अमावस्या की काली रात थे । उसको उस हमारी नौवीं कक्षा का इम्तिहान हो खत्म हो चला था । शाम से ही हम तीनों बोर हो रहे थे तो हम तीनों ने खेल खेलने का सोचा । हमें उस खेल को पूरा करने के लिए कुछ छोटी मोटी चीज चाहिए थी जो हम लोगों ने रात को डिनर करते वक्त साथ में लेकर आए थे । जब हम वापस कमरे में आई तो बिजली जा चुकी थी । आपके लगभग बारह बज रहे थे । हम लोगों ने कैंडल चलाया और ऍम खेलने लगे । इस खेल से सबसे पहले बारी आई शादी नहीं । शालीन मैंने तो मांगा तो मैंने उसे एक सत्य पूछा कि हमारी दोस्ती कितनी पक्की है और वह अपनी दोस्ती निभाने के लिए क्या कर सकती है? शादी नहीं । जवाब दिया मैं तुम दोनों अपने सबसे अच्छे दोस्त मानती । हम साथ जाएंगे और साथ ही मारेंगे क्योंकि मैं तुम दोनों के बिना नहीं रह सकती है । उसके बाद इस खेल में बारी आदेश दिया कि श्राॅफ क्या शालीन । मैंने उसे इतनी अंधेरी रात में निर्माणाधीन कल हॉस्टल के पांचवें मंजिल पर एक कैंडल चला कराने को कहा । पहले तो शरीर थोडा सहमे लेकिन इस खेल के नियम के आगे बेबस भी देंगे । स्कूल में सबके सामने अपना मजाक नहीं बनवाना था और ना ही उसे अपने नाम के साथ डरपोक शब्द भी लग वाले थे । इसलिए वह जल्दबाजी में कैंडल लेकर उस पांचवें मंदिर की तरफ निकल पडे । हम तो नस घन एक को अंधेरे में भी बाहर जाती है । वहाँ पर नजर रख रहे थे । अभी थोडी देर में प्रियंका की नजर पास के मेज पर पडती है और वो फोन पर दिया । वो जल्दबाजी के चक्कर में तो माचिस ले जाना बोली गई फॅमिली रहेंगे । यहाँ मुझे क्या लगता है उसमें हिमाचल गलती से छोड दिया उसने जानबूझ कर ये थोडी है कौनसा उसके ऊपर जा रही है वो एक नंबर की घर पहुँच है देखना थोडी देर यहीं पे रहेगी और माचिस छूट जाने के बढाने से वापस आ जाएगा । मेरे इतना कहते हैं मैं और प्रियंका सूर जोर से हंसने लगे थे । जब हम दोनों की ऐसे रोका तब प्रियंका ने में इस पता की टॉर्च को उठाया और जिस तरह शक्तियां गई उस तरफ चलाकर हालात का जायजा लेने को कहा । टॉर्च की रोशनी इस काली को अंधेरी रात में ठीक ही पढ रहे थे । कनिष्ठ भैया श्री क्या कह कर उसे पुकारने की कोशिश की लेकिन मुझे कोई जवाब नहीं मिला । उधर शरया लगभग जैसे तैसे फॉरेन से नजर बचाते हिम्मत करके हॉस्टल के पीछे बनी है कि सीडी तक पहुंचे । वहां पहुंचने पहुंॅचा सके । कुछ उसका सच में पीछा कर रहा है । उसने पहले तो ये सोचा कि मैं और प्रियंका उसका पीछा कर रहे हैं । वो कहाँ तक वापस जा कर आएगी या कहीं जाती भी है कि नहीं । जैसे जैसे वहाँ के बढती जा रही थी उसे कॅापी आने लगे । अनुक जैसे किसी साढे हुई जानवर की हो । आपको इतनी खतरनाक थी कि लगा जैसे वो उल्टी कर दी । जैसे ही उसने पहुंच अपने कदम वापस छोडने का सोचा तेज हवा का झोंका आया और उससे है । उसके बाद जब उसको होश आया तो उसने खुद को कल हॉस्टल की पांचवीं मंजिल पडता है । उसके हाथ में एक मोमबत्ती तो थी लेकिन दूसरे हाथ में फॅमिली उसे बडा अचरज हुआ कि आखिर वो छत पर कैसे पहुंची । फॅालो है की सीढी से वापस जाने को पूरी अब चिंता की लकीरें साफ साफ उसके चेहरे पर नजर आ रहे थे । उसे किसी बडी अनहोनी का आभास हो चला था । अचानक डर के मारे उसके सूखे होठों का साथ उसके तो हाथ का अपने लगे तभी उसकी नजर उसके दूसरे हाथ पर पडी और एकदम से बिहार से होते प्रतिमाह पर जोर देते हुए बुदबुदाई कि आखिर उसने हिमाचल की टिप्पणी को जानबूझकर महीने इस पर छोड दिया था । उसके हाथ में कैसे आ गई से कुछ समझ में नहीं आ रहा था की भलाई ही कैसे हो सकता है । तभी उसके वहाँ पर चलाया की जब वो इतनी ऊपर आ ही गई क्यों न कैंडल को चलाकर वापस जाकर अपनी बहादुरी का परिचय दे । उसने फॅमिली निकली और कैंडल को एक बार में ही चल रहा है । जैसे हो बढकर चलने को हुई तो ऐसा हुआ की किसी ने उसका पीछे से पहचाना पकड लिया है । जबकि वास्तविकता हैं बिल्कुल पडे थे । तेज हवा चलने की वजह से उसका फायदा ही निर्माणाधीन इमारत की छत पर किसी सरिये में कैसा पडा था । लेकिन इसके पीछे मुडकर देखने की हिम्मत नहीं हुई और डर उस पर इतना हावी हुआ कि वो अपना होश खो बैठे होकर बेहोश हो गई और पांचवी मंजिल की छत से नीचे कर पडे । सब के आखिरी ठीक के साथ वो हमेशा के लिए हम दोनों से अलग हो गए तो उन्होंने उसकी ठीक सुनी और हम घर के बारे में ही कमरे में ही एक दूसरे को पकडकर लेते रहे और पूरी साथ आपके सारे में ही गुजारती

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