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अदभुत प्रेम की विचित्र कथा - Part 17 in Hindi

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AuthorSaransh Broadways
अदभुत प्रेम की विचित्र कथा writer: अश्विनी भटनागर Voiceover Artist : Ashish Jain Author : Ashvini Bhatnagar
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सत्रह दफ्तर से डैनी की गैरमौजूदगी के दौरान लो टू का तीन बार फोन आया था । हर बार उसने फौरन वापस फोन करने का संदेश छोडा था । डैनी को लगा था यूटूब प्रपोजल में कुछ फेरबदल करना चाहता था या फिर उसमें नहीं जानकारी जुडवाना चाहता था । उसका मन फिलहाल इस तरह का काम करने का नहीं था, लिहाजा उसने लोटों को पलट कर फोन करने की सहमत नहीं उठाई थी । वो बैंक का लेखा जोखा देखने में मुस्लिम हो गया था । पर तकरीबन घंटे बर्बाद सिर्फ फोन बज उठा । डैनी ने फोन बेमन से उठाया पर आवाज में लोटने मुनासिब गर्मजोशी खोल दी । ऍम दूसरी तरफ से लोट चलाया था । बहुत हो गया । बैंक का काम जान हो गए । चलो शनिवार इतवार गोवा चलते हैं, मजे करेंगे । हाँ हुआ । फॅमिली आया था तो पार्टी पार्टी है । गया फॅार पार्टी है । पंद्रह बीस लोग होंगे । बस हम सब शुक्रवार रात की फ्लाइट लेंगे और रविवार को आखिरी फ्लाइट से वापस आ जाएंगे । गए चलेगा तो मैं हुआ और वो भी उन लोगों के साथ जिनके बारे मुझे अभी तक सिर्फ सालों में ही पडा था । ऍम और है होना शायद इसी को कहा जाता था । टेनिस से हर उठाता लूट उसको रईसजादों के खास गुट में शामिल होने की दावत दे रहा था । मैं तो चाहता हूँ और सबसे मुझे घर जाना है, लोट होगी । हँसी छूट गई, बस क्यों रहे हो? मैंने उसकी लकडबग्घे सभी की हंसी जैसी नहीं थी । अरे आप ये वीकेंड में घर जाते हो पहुंच जाता या छुट्टी खुद मुस्ती मारने के लिए होती है? नहीं मेरा इरादा था की तो मैं भूल जाओ अपने इरादों को हम नया प्लान है, हुआ नहीं । पार्टी अगर मैं बता दूँ कि कौन कौन आ रहा है तो तुम बेहोश हो जाओगे तो जल्दी हाँ कर मैं हमारे बुकिंग करा देता हूँ । पैसे कौन को ना रहे हैं । दैनिक दिलचस्पी कुछ चाहती थी । लूटू ने एक सौ एक रईसजादों के नाम गिना डाले । शनिवार इतवार की जगह में छुट्टी लेकर पहले घरो आता हूँ । दैनिक मजबूर होकर सोचा और मैंने सुना है लडकियों के बारे में तो भी बताया ही नहीं । जो हमारे साथ जा रही हैं । पूरे जोश में कहा था और अभिनेत्रियां मॉर्डल कुलीन कॉर्पोरेट घरानों की लडकियों के नाम गिरा दिए । नाम सुंदर सुंदर डैनी एक नाम पर अटक गया । उसके दिमाग में आखिरी कुछ नाम दोहराए थे । था बिल्कुल वो तूने गिरजा मित्रा का नाम लिया था बचाना उसका कलेजा पेट हर्षा फडकने लगा ठीक है तो मैं तुम से बाद में बात करता हूँ । अभी मैं कुछ लोगों के साथ बैठा हूँ । डाॅॅ जल्दी से कह कर फोन काट दिया था । दैनिक अगला सूख गया था । अभी दिमाग को पूरी तरह चैन आया भी नहीं था की एक जलजले ने उसे उखाड दिया । उसने पिटाई ढीली की और एक गिलास ठंडा पानी दिया । उसका दिमाग घूम गया था । एक दिन नहीं इतना कुछ मित्र साहब से अच्छी मुलाकात से दिन शुरू हुआ था और उसका छूना छाना और नौकरी देने की अच्छी पेशकश आ गई थी जिससे उसे गिरजा पर गुस्सा आ चुका था । उधर पूरे मसले पर गिरजा की मासूमियत ऐसी जिसकी तबीयत छक हो गई उसने अपने घर संभाल नहीं था कि लूटने एक नई हसरत जगह थी जिसमें पता नहीं कहाँ से गिरजा प्रकट हो गई थी । ये लडकी क्या है टॅाक हो गया । लूटों को वो कैसे जानती थी और उसके इतना करीब थी कि उसकी जाति जिन्दगी का है, सभी थी । उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि लोगों को जैसे घाम के साथ कैसे उठ बैठ सकती थी । और सबसे बडी बात ये थी कि लो तूने गिरजा का नाम उन लडकियों के साथ लिया था जो दिल बहलाने का सामान थी, टहनी बिलबिला उठा, लूट और गिरजा पर चलाना चाहता था । मिर्जा को लोटा को जानने की कोई जरूरत नहीं थी और नहीं लो टू में गिर जा के लिए हल्के तरीके से बात करने की जरूरत होनी चाहिए थी । भेजा की वाकफियत और लो टू का अंदाज उसकी बर्दाश्त की हदों से जूझ रहा था । ऍम होगा खडा हुआ और बेसब्री से पहले लगा उसे गुज्जर से बात करनी ही होगी । फिर वह करना चाह रही थी । मोना कैबिन में आई और उसकी हालत देखकर थक गई । कोई परेशानी है सर? उसने धीरे से पूछा कि मीठी आवाज सुनकर डैनी को शाह को चैन मिला हो और वो उसकी और बेबस बात कर रहा हूँ । मोना जल्दी से उसके लिए कॉफी आई थी । ट्रॅफी के छोटे छोटे घूंट भरने लगा । होना सबसे बैठे उसे देखती रही थी । विकेट पर हम कहीं मसरूफ हूँ । मैंने कुछ देर बाद पूछा हो सकता है पर अभी पक्का नहीं है । शहर से कहीं बाहर जा रही हूँ, कह नहीं सकती नहीं जाने की सोच रही हूँ । पहली में जोर देकर पूछा अगर गिरजा गोवा जा रही थी तो हो सकता है कि शायद होना भी जा रही हूँ । अगर दोनों चीज सहेलियाँ हैं पूछ रही हूँ मैंने कुछ नहीं ऐसे कुछ सोच रहा था क्या असल मैं दैन ने आगे झुककर कहा मुझे पार्टी के लिए गोवा बनाया है । समझ नहीं पा रहा हूँ की चाहूँ या न जाऊँ । तुम जा रही हो गया किसने बनाया है? नोट नाम का बंदा है । मीडिया फैलेगा जानती हूँ से होना बडे प्यार समझ कराई लोटो कौन नहीं जानता । दे नहीं बडा विल्सैक है । मेरी कई पार्टियों में आ चुका है । हैं तो ऐसा लगता है वो और हाँ तुम कुछ ज्यादा ही पूछ रहे हो । उसमें शरारत से कहा है पर डाॅॅ एकदम से बडा गया । अंदर भरी हुई खीज चलकर बाहर आ गई थी । ज्यादा गया तो चलना पडा । ज्यादा से क्या मतलब है तुम्हारा एक सीधा सवाल पूछ रहा हूँ । सीधा सा जवाब नहीं दे सकती हूँ मुझ पर चाॅस उन्होंने फौरन शराब दिया । सोलह ॅ बाहर निकल गया । उसे और बर्दाश्त नहीं हो पा रहा था । कुछ देर बाद जब दैनिक वापस आए तो मुझ को उसने सब्र से बैठे पाया । क्या बात है उन्होंने प्यार से दोबारा पर्याप्त की । दैनिक का मन तो आगे जा के बारे में पूछने का था, पर उसे लोटों की बात शुरू कर दी । होना छोटी के बारे में कुछ और बताओ फॅमिली जानना जरूरी है । उसने धीरे से कहा, उसके पास पैसा है और वो जानता है उसे कहाँ और किस पर खर्च करना है । उसके पास पावर है, वो जानता है उसका लोगों पर कैसे इस्तेमाल करना है । बस इतनी सी बात है उसके पास जो कुछ है तो है । इस बात को लेकर परेशान होना या झगडा मूल्य फिजूल है । वैसे उसमें क्या क्या है जो तुम इतना परेशान हूँ? दैनिकों लगा उन्होंने एकदम मार्केट की बात कही थी, लेकिन उस परेशानी लोटों से नहीं की जा सकती । रिजा के लोगों से रिश्ते को लेकर थी, पर वो दोनों से खुलकर नहीं पूछ सकता था । उसको अपने और फिर जा के बारे में बता नहीं सकता था । उसको लोटों की बात के जरिए गिरजा कि असलियत तक पहुंचता था । उसने लंबी सांस भरकर कम थे । उसका दिए कुछ लोग । उसे कोई परेशानी नहीं है । बस ये बंदा मुझे पार्टी में ले जाने पर आमादा है । सुबह से कॉल पर कॉल किए जा रहा है । जब मैं काम से बाहर गया था, तभी सी कई कौनसा आई थी । मुझे अपने पर इतना दबाव पसंद नहीं है । उन्होंने सहानुभूति जताई और अपनी राय दे डाली । मुझे पता है कितना पीछे पडता है पर जाने में कोई हर्ज नहीं है । उसकी पार्टी वाकई मजेदार होती हैं लेकिन लोगों में तुम्हारा नाम नहीं लिया । पर तुम्हारी सहेली गिर जाए । मित्रा का नाम जरूर लिया था । मैं तुम्हारे यहाँ पार्टी मुझे मिला था । पूरा डैनी की बात सुनकर पूरा किसी आ गई । मेरा नाम चलेगा वीजा करेगा क्योंकि वह कॉर्पोरेट शिक्षा की बेटी है । उसका नाम याद रखेगा । और जहाँ तक मेरा सवाल है तो जब उसे कुछ खूबसूरत लडकियों की जरूरत होती है तो वो मुझे तलाश लेता है । मोना की साफगोई ने डैनी को एक पल के लिए हैरान कर दिया । साफ था उसे अपने बारे में कोई हर सैनी नहीं थी । जिस तरह क्यों ताक रहे हो भाई, कौन सा पहाड टूट पडा है । मुझे अपनी औकात पता है और से कैसे संभाल कर रखना है ये भी पता है । माॅस् बातों में ये सब चलता है यानी फिर भी ताकता रहा । उसका मोदी खुला हुआ था । पर मुझे लोटों की पार्टियां पसंद है । उन्होंने मुस्कुराते हुए अपनी बात जारी रखी तो मौज मस्ती होती है वहाँ तुम तो जानते हो । मैं ऐसी जगह खुश रहती हूँ क्योंकि क्या पता का मुझे वहाँ बीला अमीर नौजवान मिल जाए जो उम्र भर मेरा साथ निभाएगा । याद करो मैं तुमसे पार्टी में मिली थी ना आपने दी हुई पार्टी नहीं सही पर मिली तो पार्टी नहीं थी । अपनी बात पर वह जोर से हंस पडी । टहनी को अचानक उसपर तरह है उससे सहानुभूति निमोना का हाथ अब दबाया । फॅमिली लडकी थी और छोटू का उसको सामान की तरह पार्टियों में बुलाना उसे शायद अच्छा नहीं लगा था । नहीं तो आपने कुछ तरह इस्तेमाल नहीं होने देना चाहिए । ना चाहते हुए भी कह गया बोला की हिम्मत यहाँ से उसके भीतर तक उतर गई थी । दे नहीं अपनी कस्बे वाली मानसिकता से बाहर निकलो । उसने फॉर ललकारा था । जिंदगी इतनी आसान नहीं जितना कम समझते हो । हम सब एक दूसरे को हर वक्त इस्तेमाल करते हैं । ऐसे ही सब चलता है और हमेशा से ही चलेगा की तरीका अगर तुमको पसंद हैं तो क्या कहने? पर हाँ करना पसंद है तो भी वह किसी को कोई फर्क नहीं पडता कि तुम क्या सोचते हो । बस हम रोते रहे जाओगे और बाकी लोग मलाई उडाई ले जाएंगे । शहर के मेले में आए हो दस भाई बंधुओं से अब छोडो हंसो के लोग ठीक कह रही दिशा है । माहौल में घुल जाना ही बेहतर होता था । उस ने मोर्चा नहीं खोला जा सकता था, होना चाहती थी । उसका क्या इस्तमाल हो रहा था और उससे झगडने की बजाय वो आपने इस्तेमाल को अलग तरीके से इस्तेमाल कर रही थी । नुकसान किसी का नहीं हो रहा था । दोनों के लिए फायदे का सौदा था । दैनिकों मोना के बारे में जानकर पूरा तो लगा था पर अब उसको और उसके हालत को बेहतर समझ पा रहा था । और गिर जाए उसका । क्या मेरा मतलब है रिजल्ट से लड्डू घबराता है । दोनों के घरवाले एक दूसरे को जानते हैं, दोस्त हैं । लोगों को पता है गिरजा अपनी मर्जी के मालिक है और गिर जा के लिए लो टू सिर्फ एक मजाक है । दोनों की बात सुनकर डैनिक्स सूरत पर कुछ चयन कराया होना भाग गई । मुझे उसी शाम लग गया था की चिंगारी शोला बनने वाली है । उसमें शरारत कहा मुझे लग रहा तुम दोनों के बीच अब जरूर कुछ चल रहा है । तरह नहीं ऐसा कुछ नहीं है । मैंने जल्दी से सफाई दी । कोई दिलचस्पी मुलाकात थी बस और कुछ नहीं तो ठीक ऍम और मैं दुनिया में जी नहीं पाओगे । चलो मुझे फौरन सब सच सच बताऊँ । कुछ नहीं भाई मेरी दो चार बार बात हुई है बस और कुछ नहीं । पटना पता ही बात पर मैं तो नहीं पाते कि बात बताती हूँ । उन्होंने आगे झुकी और फुसफुसाई । उसे लगता है तो वो सिंगर मा दिया है । मोना के लाॅ की तरह चुके हैं । शर्मा दिया घटिया बाद उसने कही थी क्या उसने करना दिया था इसलिए गिरजा उसके साथ डिनर पर गई थी और फिर बिस्तर तक ले गई थी । क्या एक बडे आदमी की बेटी बिना दूसरे के बारे में सूचित कुछ भी कर सकती थी । उसको किसी की परवाह नहीं होती है । वो ना के कहने का मतलब क्या था । वैसे गंदे अल्फाजों का उसने इस्तेमाल कर डाला था । होना तुम्हारी बात मुझे अच्छी नहीं लगी । नहीं अच्छी लगी तो नहीं लगी पर जो है सब है । और मैंने तो मैं बिना लाग लपेट के सब साफ साफ बता दिया है । उस ने बेबाकी से जवाब दिया, समय कैसे मालूम? मोना हंस पडी हम लडकियाँ आपस में बात करती हैं और उसमें क्या रहता है । फिर कभी बताउंगी मस्ती हुई बहुत ही और कमरे से बाहर जाते जाते रुककर बोली मैं भी आउंगी गोवा तुम जा रहे हो चांदी से रेत पर समुद्र किनारे तुम्हारे साथ ऍम गिर जाती होगी । हमारे सारे सवालों का जवाब तो मैं वहीं मिल जाएगा । इससे पहले की दैनिक कुछ कहता हूँ झटके से बाहर निकल गई । गोवा में सारे सवालों का जवाब मिल जाएगा । इन्हें झमेला किया था अपना सिर पीटने के लिए उसका मन बेचैन हो ज्यादा

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अदभुत प्रेम की विचित्र कथा writer: अश्विनी भटनागर Voiceover Artist : Ashish Jain Author : Ashvini Bhatnagar
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