रिच डैड पुअर डैड in hindi |  हिन्दी मे |  Audio book and podcasts

Audio Book | 475mins

रिच डैड पुअर डैड in hindi

AuthorMS Ram
Rich Dad, Poor Dad' Everybody aspires to be rich, to be prosperous. Many people have this mentality that being born poor, they do not have much chance to change their destiny and become rich. But, there are lots of examples out there which destroys the myth that rich are born rich. This amazing book 'Rich dad Poor dad', written by author Robert Kiyosaki, deals with the same idea. The book has two main characters, Poor dad (Kiyosaki's biological father) and Rich dad (father of Kiyosaki's best friend). The book covers the methods that Rich dad opted to make money and the mistakes committed by Poor dad, who had high intellect and was well educated, while doing so. We have brought you the audiobook of this amazing book 'Rich dad Poor dad' in Hindi. This audiobook is mainly the summary of 'Rich dad Poor dad' that covers 6 lessons that he learnt from the Rich dad about making money and five obstacles that one need to overcome before one can become rich and stay rich. This book will also tell you 10 steps that can develop one's financial genius. Download the 'Rich dad Poor dad' audiobook now. The 'Rich dad Poor dad' audiobook is available on our platform KuKu FM that summarises the same book by the author Robert Kiyosaki. You can listen to this in Hindi and download 'Rich dad Poor dad' free of cost, so that you can listen to it in future. So, listen to the audiobook 'Rich dad Poor dad' in Hindi and grow your financial genius. Learn to use money as a tool for wealth development with 'Rich dad Poor dad' audiobook in Hindi. हर कोई अमीर और समृद्ध होने की इच्छा रखता है। कई लोगों की यह मानसिकता होती है कि गरीब पैदा होने के कारण, उनके पास अपनी किस्मत बदलने और अमीर बनने का ज्यादा मौका नहीं होता है। लेकिन, इस संसार में ऐसे बहुत सारे उदाहरण हैं जो इस मिथ्या को नष्ट कर देते हैं कि कोई इंसान जन्म से ही अमीर होता है। लेखक रॉबर्ट कियोसाकी द्वारा लिखित यह अद्भुत पुस्तक 'रिच डैड पुअर डैड', ऐसे ही विचारों से संबंधित है। पुस्तक में दो मुख्य पात्र हैं, पुअर डैड (कियोसाकी के असल पिता) और रिच डैड (कियोसाकी के सबसे अच्छे दोस्त के पिता)। इस पुस्तक में उन तरीकों को शामिल किया गया है जिन्हें रिच डैड ने पैसा बनाने के विकल्प के तौर पर चुना। साथ ही साथ इस पुस्तक में पुअर डैड द्वारा इसी राह पर की गई गलतियाँ को भी शामिल किया गया है। हम आपके लिए इस अद्भुत पुस्तक 'रिच डैड पुअर डैड’ का ऑडियोबुक हिंदी में लाए हैं। यह ऑडियोबुक मुख्य रूप से 'रिच डैड पुअर डैड' का सारांश है, जिसमें उन 6 सबकों को शामिल किया गया जो उसने रिच डैड से सीखे और वे पांच बाधाएं जो कि एक व्यक्ति को अमीर बनने और अमीर बने रहने से दूर करने का एक प्रमुख कारण होती है। यह पुस्तक आपको ऐसे 10 कदम भी बताएगी जो किसी की वित्तीय प्रतिभा को विकसित कर सकते हैं। अभी 'रिच डैड पुअर डैड' ऑडियोबुक डाउनलोड करें। 'रिच डैड पुअर डैड' ऑडियोबुक हमारे प्लेटफॉर्म कुकू एफएम पर उपलब्ध है जो लेखक रॉबर्ट कियोसाकी की उसी पुस्तक का सारांश है। आप इसे हिंदी में सुन सकते हैं और 'रिच डैड पुअर डैड' को मुफ्त में डाउनलोड कर सकते हैं, ताकि भविष्य में आप इसे सुन सकें। तो, हिंदी में ऑडियोबुक 'रिच डैड पुअर डैड' डाउनलोड करें और अपनी वित्तीय प्रतिभा को बढ़ाएं। हिंदी में 'रिच डैड पुअर डैड ' ऑडियोबुक के साथ धन में वृद्धि को एक उपकरण के रूप में उपयोग करना सीखें।
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12 Episodes
Part129minsFeb 24,2019

Introduction - Rich Dad Poor Dad

Part216minsFeb 24,2019

Chapter 1 - Rich Dad Poor Dad

Part390minsFeb 25,2019

Chapter 2 - The Rich Don't Work for Money

Part457minsFeb 25,2019

Chapter 3 - Why Teach Financial Literacy

Part521minsFeb 25,2019

Chapter 4 - Mind Your Own Business

Part630minsFeb 25,2019

Chapter 5 - The History of Taxes and the Power of Corporations

Part757minsFeb 25,2019

Chapter 6 - The Rich Invent Money

Part837minsFeb 25,2019

Chapter 7 - Work to Learn-Don_t Work for Money

Part948minsFeb 25,2019

Chapter 8 - Overcoming Obstacles

Part1063minsFeb 25,2019

Chapter 9 - Getting Started

Part1115minsFeb 25,2019

Chapter 10 - Still Want More

Part128minsFeb 25,2019

Chapter 11 - Epilogue

Transcript
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रॅाकी के द्वारा लिखित पुस्तक रिकॅार्ड की प्रस्तावना इसकी बहुत जरूरत है । क्या स्कूल बच्चों को असली जिन्दगी के लिए तैयार करता है? मेरे मम्मी डैडी कहते थे मेहनत से पढो और अच्छे नंबर लूँ क्योंकि ऐसा करोगे तक अच्छी तनख्वाह वाली नौकरी मिलेगी । उनके जीवन का लक्ष्य यही था कि मेरी बडी बहन और मेरी कॉलेज की शिक्षा पूरी हो जाएगी । उनका मानना था की अगर कॉलेज की शिक्षा पूरी हो गई तो हम जिंदगी में ज्यादा कामयाब हो सकें । जब मैंने उन्नीस सौ चौहत्तर में अपना डिप्लोमा हासिल किया, फॅस के साथ ग्रेजुएट हुई और अपनी कक्षा में काफी ऊंचे स्थान पर रही तो मेरे मम्मी डैडी का लक्ष्य पूरा हो गया । ये है उनके जिंदगी की सबसे बडी उपलब्धि थी । मास्टर प्लान के हिसाब से मुझे एक फॅार्म में नौकरी भी मिल गई । अब मुझे उम्मीद थी एक लंबे करियर और कम उम्र में रिटायरमेंट की । मेरे पति माइकल भी इसी रास्ते पर चले थे । हम दोनों ही बहुत मैं परिवारों से आए थे तो बहुत अमीर नहीं । माइकल ने ओनर्स के साथ ग्रेजुएशन किया था । एक बार नहीं बल्कि दो बार पहली बार इंजीनियर के रूप में और फिर लास्ट फोन से । उन्हें जल्दी ही पेटेंट नाम में विशेषज्ञता रखने वाली वाशिंगटन देसी ही एक मान्य मिलाकर में नौकरी मिल गई और इस तरह उन का भविष्य सुनहरा लग रहा था । उनके करियर करना साथ साथ था और यह बात थी कि वे भी जल्दी रिटायर हो सकते हैं । हालांकि हम दोनों ही अपने करियर में सफल रहे हैं परन्तु हम तो सोचते थे हमारे साथ ठीक पैसा ही नहीं हुआ । हमने कई बार फॅमिली हालांकि हर बार नौकरी बदलने के कारण सही थे परन्तु हमारे लिए किसी ने भी पेंशन योजना में निवेश नहीं किया । हमारे रिटायरमेंट फंड हमारे खुद के लगाए पैसों से बढ रहे थे । हमारे शादी बहुत सफल रही और हमारे तीन बच्चे हैं । उनमें से दो कॉलेज में हैं और तीसरा भी हाई स्कूल में भी आई है । हमने अपने बच्चों को सबसे अच्छी शिक्षा दिलाने में बहुत सा पैसा लगाया । उन्नीस सौ में एक दिन मेरा बेटा स्कूल से घर लौटा । स्कूल से उसका मुंह हो गया था । वहाँ पढाई से हो चुका था । मैं उन विषयों को पढने में इतना ज्यादा समय क्यों बर्बाद हूँ जो असली जिन्दगी में मेरे काम में नहीं आएगी । उसने विरोध किया । बिना सोचे विचारे ही मैंने जवाब दिया क्योंकि अगर तुम्हारे अच्छे नंबर नहीं आए तो तुम कभी कॉलेज नहीं जाता हूँ, चाहे मैं काले हो या नहीं हूँ । उसने जवाब दिया, मैं अमीर बन कर दिखाऊंगा । अगर तुम कॉलेज से ग्रेजुएट नहीं होगी तो तो मैं कोई अच्छी नौकरी नहीं मिलेगी । मैंने एक माँ की तरह चिंतित और आतंकित होकर कहा, बिना अच्छी नौकरी के तुम किस तरह अमीर बनने के सपने देख सकते हो? मेरे बेटे ने मुस्कराकर अपने सिर को बोरियत भरे अंदाज में हिलाया । हमें ऐसा कई बार पहले भी कर चुके थे । उसने अपने सिर कुछ हो गया और अपनी आंखें घुमाने लगा । मेरी समझदारी भरी चला । एक बार फिर उसके कानों के भीतर नहीं गई थी । हालांकि वो स्मार्ट और प्रबल इच्छा शक्ति वाला युवक था परन्तु नंबर और साले नहीं था । मम्मी उसने बोलना शुरू किया और भाषण सुनने के बारे में मेरी थी । समय के साथ चलिए आपने चारों तरफ देखिए सबसे अमीर लोग अपनी शिक्षा के कारण कितनी अहमियत नहीं बनी है । माइकल जॉर्डन और मैं दोनों को देखिए यहाँ तक के बीच में हार्ड छोड देने वाले बिल गेट्स ने । माइक्रोसॉफ्ट क्या आज भी अमेरिका के सबसे अमीर रखती है और अभी उनकी उम्र भी तीस से चालीस के बीच नहीं है और उस देश वाली पिक्चर के बारे में तो आपने सुना ही होगा जो हर साल चालीस लाख डालर कमाता है जबकि उस पर दिमागी तौर पर कमजोर होने का लेबल लगा हुआ है । हम दोनों काफी समय तक चुप रहे । अब मुझे समझ में आने लगा था कि मैं अपने बच्चों को वही सलाह दे रही थी तो मेरे माता पिता ने मुझे दी थी । हमारे चारों तरफ की दुनिया बदल रही थी परंतु हमारी सलाह नहीं बदली । अच्छी शिक्षा और अच्छे ग्रेड्स हासिल करना अब सफलता की गारंटी नहीं रहेंगे और हमारे बच्चों के अलावा यह बात किसी की समझ में नहीं आई थी । मम्मी उसने कहा मैं आपकी और की तरह कडी मेहनत नहीं करना चाहता हूँ । आपको काफी पैसा मिलता है और हम एक शानदार घर में रहते हैं जिसमें बहुत ही कीमती सामान हैं । अगर मैं आपकी सलामन होगा तो मेरा हाल भी आपकी तरह होगा । मुझे ज्यादा मेहनत करनी पडेगी ताकि मैं और जाॅर्ज में डूब जाऊँ । वैसे भी आज की दुनिया में नौकरी की सुरक्षा तो बच्चे नहीं, मैं जानता हूँ कि छोटे और सही आकार की फर्म कैसी होती है । मैं यह भी जानता हूँ कि आज के दौर में कालेज के स्नातकों को कम तनख्वाह मिलती है । जब की आपके जमाने में उन्हें ज्यादा आतंकवाद मिला करती थी, डॉक्टर को देखिए, वे अब उतना पैसा नहीं कमाते जितना पहले कभी कमाया करते थे । मैं जानता हूँ मैं रिटायरमेंट के लिए सामाजिक सुरक्षा कंपनी कैंसर पर भरोसा नहीं कर सकता है । अपने सवालों के मुझे नहीं जवाब चाहिए है, सही था । उसे नए जवाब चाहिए थे और मुझे मेरे माता पिता की सलाह उन लोगों के लिए सही हो सकती थी तो उन्नीस सौ सैंतालीस के पहले पैदा हुए थे । पर ये है उन लोगों के लिए विनाशकारी साबित हो सकती थी, जिन्होंने तेजी से बदल रही दुनिया में जन्म लिया था । अब मैं अपने बच्चों से यह सीधी सी बात नहीं कह सकती थी । स्कूल जो अच्छे ग्रेड हासिल करूँ और किसी सुरक्षित नौकरी की तलाश करो । मैं जानती थी कि मुझे अपने बच्चों की शिक्षा को सही दिशा देने के लिए नए तरीके की खोज कर नहीं हुई । एक माँ और एक अकाउंट होने के नाते मैं इस बात से परेशान थी । स्कूल में बच्चों को धन संबंधी शिक्षा या वित्तीय शिक्षा नहीं दी जाती है । हाई स्कूल खत्म होने से पहले ही आज के युवाओं के पास अपना क्रेडिट कार्ड होता है । यह बात अलग है कि उन्होंने कभी धन संबंधी पाठ्यक्रम में भाग नहीं लिया होता है और उन्हें यह भी नहीं पता होता कि इसे किस तरह निवेश किया जाता है । इस बात का ज्ञान तो दूर की बात है कि क्रेडिट कार्ड पर चक्रवर्ती ब्याज की गणना किस तरह की जाती है । इसे आसान भाषा में कहें तो उन्हें धन संबंधी शिक्षा नहीं मिलती और यह ज्ञान भी नहीं होता कि पैसा किस तरह काम करता है । इस तरह से उस दुनिया का सामना करने के लिए कभी तैयार नहीं हो पाते जो उनका इंतजार कर रही है । एक ऐसी दुनिया जिसमें बचत से ज्यादा मैं तो खर्च को दिया जाता है । जब मेरा सबसे बडा बेटा कॉलेज की शुरूआती दिनों में अपने क्रेडिट कार्ड को लेकर कर्ज में डूब गया तो मुझे उसके क्रेडिट कार्ड को नष्ट करने में उसकी मदद करनी पडेगी । साथ ही मैं ऐसी तरकीब भी खोजने लगी जिससे मेरे बच्चों में पैसे की समझा सके । पिछले साल एक दिन मेरे पति ने मुझे अपने ऑफिस से फोन किया । मेरे सामने एक सज्जन बैठे हैं और मुझे लगता है कि तुम उनसे मिलना चाहूँगी । उन्होंने कहा, उनका नाम रॉबर्ट कियोसाकी है । वे एक व्यवसायी और निवेशक हैं तथा वाॅक उत्पाद का पेटेंट करवाना चाहते हैं । मुझे लगता है की तो मैं इसी चीज की तलाश कर रही थी जिसकी मुझे चला मेरे पति माइक रॉबर्ट कियोसाकी द्वारा बनाई जा रहे नहीं ऍम ऍसे इतने प्रभावित थे कि उन्होंने इसके परीक्षण में हमें बुलवा लिया । यह ऍम था इसलिए मैंने स्थानीय विश्वविद्यालय में पढ रही अपनी उन्नीस वर्षीय बेटी से था कि क्या वह मेरे साथ चलेगी और वह तैयार होगी । इस खेल में हम लगभग पंद्रह लोग थे जो तीन समूहों में विभाजित थे । माइक सही थे । मैं इसी तरह ऍम उत्पाद की खोज कर रही थी । यह किसी रंगीन मोनोपॉली बोर्ड की तरह लग रहा था जिसके बीच में एक बडा सा सुबह था परन्तु मोनोपली से यह इस तरह अलग था कि इसमें दो रास्ते थे एक अंदर और दूसरा बाहर खेल का लक्ष्य था अंदर वाले रास्ते से बाहर निकलना जिसे रावर्ट चूहा दौड गए थे और बाहर ही रास्ते पर पहुंचना या तेज रास्ते पर जाना । रॉबर्ट के मुताबिक तेरे रास्ता हमें यह बताता है कि असली जिन्दगी में अमीर लोग किस तरह पैसे का खेल खेलते हैं । रावत के हमें चूहा तोड के बारे में बताया अगर आप किसी भी औसत रूप से शिक्षित, कडी मेहनत करने वाले आदमी की जिंदगी को देखें । उसमें आपको एक सही सफर देखेगा । बच्चा पैदा होता है, स्कूल जाता है, माता पिता खुश हो जाते हैं क्योंकि बच्चे को स्कूल में अच्छे नंबर मिलते हैं और उसका दाखिला कालेज में हो जाता है । बच्चा स्नातक हो जाता है और फिर योजना के अनुसार काम करता है । वह किसी आसान, सुरक्षित नौकरियाँ, करियर की तलाश करता है । बच्चे को ऐसा ही काम मिल जाता है । शॅल बन जाता है या वैसे ना मैं करती हो जाता है या फिर मैं सरकारी नौकरी करने लगता है । बच्चा पैसे कमाता है, उसके पास थोक में क्रेडिट कार्ड आने लगते हैं और अगर अब तक उसने खरीददारी करना शुरू नहीं किया है तो अब जमकर खरीदारी शुरू हो जाती है । खर्च करने के लिए पैसे पास में होते हैं तो उन जगहों पर जाता है जहाँ उसकी उम्र के ज्यादा नौजवान जाते हैं, लोगों से मिलते हैं, डेटिंग करते हैं और कभी कबार शादी भी कर लेते हैं । अब जिंदगी में मजा आ जाता है क्योंकि आजकल पुरुष और महिलाएं दोनों नौकरी करते हैं । दो तनख्वाह बहुत सुखद लगती है । पति पत्नी को लगता है कि उनकी जिंदगी सफल हो गई हैं । उन्हें अपना भविष्य सुनहरा नजर आता है । अब घर का टेलीविजन खरीदने का फैसला करते हैं । छुट्टियाँ मनाने कहीं चले जाते हैं और फिर उनके बच्चे हो जाते हैं । बच्चों के साथ उन के खर्चे भी बढ जाते हैं । खुशहाल पति पत्नी सोचते हैं कि ज्यादा पैसा कमाने के लिए अब उन्हें ज्यादा मेहनत करना चाहिए । उनका करियर अब उनके लिए पहले से ज्यादा मायने रखता है । वे अपने काम में ज्यादा मेहनत करने लगते हैं ताकि उन्हें प्रमोशन मिल जाएंगे या उनकी तरफ आगे बढ जाएगा । तनख्वाह पडती है और उसके साथ दूसरा बच्चा भी पैदा हो जाता है । अब उन्हें एक बडे घर की जरूरत नहीं होती । वे नौकरी में और भी ज्यादा मेहनत करते हैं । बेहतर कर्मचारी बन जाते हैं और ज्यादा मन लगाकर काम करने लगते हैं । ज्यादा विशेषज्ञता हासिल करने के लिए वे एक बार फिर किसी स्कूल में जाते हैं ताकि मैं ज्यादा पैसा कमा सकें । हो सकता है कि वे दूसरा काम भी खोज नहीं । उनकी आमदनी बढ जाती है परन्तु ओसाम देने पर उन्हें इनकम टैक्स भी चुकाना पडता है । यही नहीं उन्होंने जो बडा घर खरीदा है उस पर भी टैक्स देना होता है । इसके अलावा उन्हें सामाजिक सुरक्षा काॅस्ट हो चुका नहीं है । इसी तरह बहुत से टैक्स चुकाते चुकाते उनके तनख्वाह हो जाती है । वे अपनी बडी हुई तनख्वा लेकर घर आते हैं और हैरान होते ही इतना सारा पैसा अच्छा कहाँ चला जाता है । भविष्य के लिए बचत के हिसाब से भी कुछ म्यूचलफंड भी खरीद लेते हैं और अपने क्रेडिट कार्ड से घर का किराना खरीदते हैं । उनके बच्चों की उमर अब पांच छह साल हो जाती है । यह चिंता उन्हें सिखाने लग गया कि बच्चों के कॉलेज की शिक्षा के लिए भी बहुत जरूरी है । इसके साथ ही उन्हें अपने रिटायरमेंट के लिए पैसा बचाने की चिंता भी सताने लगती है । पैंतीस साल पहले पैदा हुए यह खुशहाल दंपति आपने नौकरी के बाकी दिन चूहा दौड में फस कर दिखाते हैं । वे अपनी कंपनी के मालिकों के लिए काम करते हैं, सरकार को टैक्स चुकाने के लिए काम करते हैं और बैंक में आपने गिरवी संपत्ति तथा क्रेडिट कार्ड के कर्ज को चुकाने के लिए काम करते हैं । फिर भी अपने बच्चों को यही सलाह देते हैं कि उन्हें मन लगाकर पढना चाहिए, अच्छे नंबर लाना चाहिए और किसी सुरक्षित नौकरी की तलाश करना चाहिए । पैसे के बारे में कुछ भी नहीं देखते हैं और इसलिए जिंदगी भर कडी मेहनत करते रहते हैं । यह प्रक्रिया पीढी दर पीढी चलती है इसे तो हाथ तोड कहते हैं । सुबह दौड से निकलने का एक ही तरीका है और वह यह है आप अकाउंट और इन्वेस्टमेंट दोनों क्षेत्रों में निपट हो जाएगी । दिक्कत ये है कि इन दोनों ही विषयों को बोरिंग और कठिन माना जाता है । मैं खुद एक सीपीएम और मैंने फॅार्म के लिए काम किया है । मुझे यह देखकर ताज्जुब हुआ कि रावत ने इन दोनों बोरियत और कठिन विषयों को सीखना इतना रोचक, सरल और रोमांचक बना दिया था । सीखने की प्रक्रिया इतनी अच्छी तरह से छुपा ली गई थी कि जब हम सुबह दौड से बाहर निकलने के लिए जी जान लगा रहे थे तो हमें यह बिहानी नहीं रहा कि हम कुछ सीख रहे थे । शुरू में तो हमें एक नए शैक्षणिक खेल का परीक्षण कर रहे थे परन्तु जल्दी ही इस खेल में मुझे और मेरी बेटी को मजा आने लगा । खेल के दौरान हम दोनों ऐसे विषयों पर बात कर रहे थे जिनके बारे में हमने पहले कभी आती नहीं । एक लेखापाल होने के कारण इनकम स्टेटमेंट और पहले सीट से जुडा खेल खेलने में मुझे कोई परेशानी नहीं हुई । मैंने खेल के नियम और इसके बारे क्या समझाने में अपनी बेटी और दूसरे लोगों की मदद भी । उस रोज मैं सुबह और से सबसे पहले बाहर निकली और केरल में ही बाहर निकल पाई । बाहर निकलने में मुझे पचास मिनट का समय लगा । हालांकि खेल लगभग तीन घंटे तक चला । मेरी टेबल पर एक बैंकर बैठा था । इसके अलावा एक व्यवसायी था और एक कंप्यूटर प्रोग्रामर मिलेगा । मुझे यह देखकर बहुत हैरानी हुई कि इन लोगों को अकाउंटिंग या इन्वेस्टमेंट के बारे में इतनी कम जानकारी है, जबकि ये विषय उनकी जिंदगी में कितने ज्यादा अहमियत रखते थे । मेरे मन में यह सवाल भी उठ रहा था कि वे असल जिंदगी में अपने पैसे देने के कारोबार को कैसे संभालते होंगी? मैं समझ सकती थी मेरी उन्नीस साल के बेटे क्यों नहीं समझ सकते हैं । पर ये लोग तो उससे दोगुनी उम्र के थे और उन्हें ये बात समझ में आनी चाहिए । तो वहाँ से बाहर निकलने के बाद मैं दो घंटे तक मेरी बेटी और इन शिक्षित अमीर व्यक्तियों को पासा फेंकते और अपना बाजार पहला देखती रही । हालांकि मैं खुश थे कि वे लोग कुछ नया सीखते हैं, लेकिन मैं इस बात से बहुत परेशान और विचलित थी । वैसे लोग समझ ऍम हिंदुओं के बारे में कितना कम जानते थे । उन्होंने अपने इनकम स्टेटमेंट और अपने बैलेंस सीट के आपसी संबंध को समझने में भी बहुत समय लगाया । अपनी संपत्ति खरीदते और बेचते से मैं उन्हें ध्यान ही नहीं रहा कि हर सोते में उनकी महीने की आमदनी पर असर पड रहा है । मैंने सोचा असल जिंदगी में ऐसे करोडों लोग होंगे तो पैसे के लिए सिर्फ इसलिए परेशान हो रही हैं क्योंकि उन्होंने ये दोनों में से कभी नहीं पडेगी । मैंने मन में सोता भगवान का शुक्र है कि हमें मजा आ रहा है और हमारा लक्ष्य खेल में देखना है । तब खेल खत्म हो गया तो रॉबर्ट ने हमें पंद्रह मिनट तक कैसे पर चर्चा करने और इसकी समीक्षा करने के लिए कहा । मेरी टेबल पर बैठा व्यवसायिक कुछ नहीं था । उसे खेल पसंद नहीं आया था । मुझे यह सब जानने की कोई जरूरत नहीं है । उसने जोर से कहा, मेरे पास इन सबके लिए ॅ और वकील है जिन्हें ये सब मालूम है । रावट का जवाब था, क्या आपने गौर किया है कि इसे बहुत अकाउंटेंट है जो अमीर नहीं है और यही हाल बैंकर वकील स्टाक करो करो रियल एस्टेट ब्रोकर का भी है । बहुत कुछ जानते हैं और प्राइवेट लोग स्मार्ट होते हैं परंतु उनमें से ज्यादातर आमिर नहीं होते हैं क्योंकि हमारे स्कूल में वहाँ सब नहीं सिखाते तो अमीर लोग जानते हैं । इसलिए हम इन लोगों को सलाह देते हैं । परंतु एक दिन जब आप किसी हाइवे पर कार से जाते हैं, आप ट्रैफिक जाम में फंस जाते हैं । अब बाहर निकलने के लिए सच बताते हैं । जब आप अपने दाई तरफ देखते हैं तो वहाँ आप देखते हैं कि आपका अकाउंट भी उसी ट्रैफिक जाम में फंसा हुआ है । फिर आप बाई तरफ देखते हैं और आपको वहाँ का बैंकर भी उसी हाल में नजर आता है । इससे आपको हालत का अंदाजा हो जाएगा । कंप्यूटर प्रोग्रामर भी इस खेल से प्रभावित नहीं हुआ था । यह सीखने के लिए मैं फिर खरीद सकता हूँ । बैंकर जरूर प्रभावित हुआ था । मैंने स्कूल में एकाउंटिंग सीखा था परन्तु में अब तक यह नहीं समझ पाया था कि इसे असल जिंदगी में किस तरह काम में लाया जाएगा । अब मैं समझ गया हूँ मुझे तो हाथो हाथ से बाहर निकलने के लिए खुद को तैयार करने की जरूरत है परन्तु मेरी पुत्री के विचारों से मैं सबसे ज्यादा रोमांचित हुई । उन्होंने कहा, मुझे सीखने में बडा मजा आया । मैंने इस बारे में बहुत कुछ सीखा कि पैसा असली जिन्दगी में किस तरह काम करता है और इसका निवेश किस तरह करना चाहिए । फिर उसने आगे कहा, अब मैं जानती हूँ की मैं अपने काम करने के लिए किस तरह का व्यवसाय हूँ और यह व्यवसाय सुनने का कारण नौकरी की सुरक्षा है । उससे मिलने वाले फायदे या तनख्वाह नहीं होंगे । अगर मैं इस खेल में सिखाए जाने वाली बात है, ऐसे ही जाती हूँ तो मैं कुछ भी करने के लिए आजाद हूँ और वह सीखने के लिए आ जाता हूँ तो मैं दिल से सीखना चाहती हूँ । अभी तक मुझे उस खेल को सीखना पडता था जिससे मुझे नौकरी पाने में मदद मिलेगी । अब मैं यह खेल से जाती हूँ तो मुझे नौकरी की सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा की ज्यादा चिंता नहीं होगी । जैसे कि मेरी बहुत ही सहेलियों को होती है । खेल खत्म होने के बाद मुझे ओवर्ट से बात करने के लिए ज्यादा समय नहीं मिला । हमने उसकी योजना पर आगे बातें करने के लिए बाद में मिलने का फैसला किया । इतना तो मैं जानते थे कि इस खेल के बहाने गिरावट है । चाहते थे कि लोगों में पैसे की बेहतर समझ विकसित हो जाएगा । यही कारण था कि मैं उनकी योजनाओं के बारे में ज्यादा जानने के लिए उत्सुक थी । मेरे पति और मैंने रावत और उनके पत्री के साथ अगले आपने डिनर मीटिंग रख लेंगे । हालांकि यह हमारा पहला सामाजिक मेलजोल था । फिर भी मुझे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे हम एक दूसरे को वर्षों से जानते हो । हमने पाया कि हमें बहुत से बातें एक जैसी है । हमने बहुत से विषयों पर बातें खेलो, नाटको रेस्तरां हूँ और सामाजिक आर्थिक होगा । हमने बदलती हुई दुनिया के बारे में बातें की । हमने इस मुद्दे पर बहुत समय तक विचार किया कि ज्यादातर अमेरिकी कैसे अपने रिटायरमेंट के लिए बहुत कम पैसा बचा पाते हैं या बिलकुल नहीं बता पाते हैं । हमने सामाजिक सुरक्षा और मेडिकेयर की लगभग दिवालिया हालात पर भी चर्चा की । क्या हमारे बच्चों को साढे सात करोड लोगों के लिए रिटायरमेंट के लिए पैसा चुकाना होगा? हम हैरान है कि लोग पेंशन योजना के भरोसे बैठकर कितना बडा खतरा मोल ले रहे हैं । रावट की सबसे बडी चिंता यह थी कि अमीरों और गरीबों के बीच फासला लगातार बढता जा रहा है । ऐसा नहीं सिर्फ अमेरिका में हो रहा है बल्कि पूरी दुनिया में हो रहा है । राबर्ट्स शिक्षित और स्वनिर्मित व्यवसायी थे, दुनिया भर में निवेश कर चुके थे और पैंतालीस वर्ष की उम्र में रिटायर होने में सफल हो गए थे । वो काम इसलिए कर रहे थे क्योंकि उन्हें भी बडी चिंता थी जो मुझे अपने बच्चों को लेकर बता रही थी । वह जानते हैं कि दुनिया बदल चुकी है परंतु इसके बावजूद शिक्षा पद्धतियां बिल्कुल नहीं बदली । रावट के अनुसार बच्चे सालों तक दकियानूसी शिक्षा पद्धति में अपना समय गुजारते हैं और ऐसे विषय पढते हैं जो उनके जीवन में कभी भी, कहीं भी कम नहीं आने वाले हैं और ऐसी दुनिया के लिए तैयारी करते हैं जिसका अब नामोनिशान भी नहीं बचा है । आज आप किसी भी बच्चे को जो सबसे खतरनाक सलाह दे सकते हैं वह है स्कूल जो अच्छे नंबर लाऊ और सुरक्षित नौकरी ढूंढो । उन्होंने कहा, यह पुरानी चला है और यह खराब सलाह है । अगर आप यहाँ देख सकते हैं कि एसिया यूरो दक्षिण अमेरिका में क्या हो रहा है तो आप भी उतने ही चिंतित होंगी जितने की मैं । रावत के अनुसार यह पूरी चला है क्योंकि अगर आप चाहते हैं कि आप के बच्चे का भविष्य आर्थिक रूप से सुरक्षित हो तो आप पुराने नियमों के सारे नए खेल को नहीं खेल सकते हैं । यह बहुत खतरनाक होगा । मैंने उनसे पूछा कि पुराने नियमों से उन का क्या मतलब है । मेरी तरह के लोग अलग तरह के नियमों से खेलते हैं और आपकी तरह के लोग पुराने नियमों की लीग पर ही चलते रहते हैं । उन्होंने कहा, क्या होता ऍम स्टाफ काम करने की घोषणा करता है । लोगों को नौकरी से निकाल दिया जाता है । परिवार तबाह हो जाते हैं, बेरोजगारी बढ जाती है । हाँ पर तो कंपनी पर इसका क्या असर पडता है । खासकर जब वहाँ कंपनी स्टाॅल हो । जब स्टाप कम करने की घोषणा होती है तो उस टाइप की कीमतें बढ जाती है । मैंने कहा जब कंपनी तनख्वाह का खर्चा काम करती है तो बाजार इस बात को पसंद करता है । ऐसा सारे आप काम करने के लिए किया जाएगा या फिर कंप्यूटर के माध्यम से किया जाएगा । उन्होंने कहा, अब ठीक करेंगे और जब स्टार्ट की कीमतें बढती है तो मेरी तरफ से लोग यानी जिनके पास उस कंपनी के शेयर होते हैं वे ज्यादा अमीर हो जाते हैं । अलग तरह के नियमों से मेरा यही आशा है । कर्मचारी हारते हैं मालिक और निवेशक जीते हैं । रावत कर्मचारी और मालिक के बीच के फर्क को समझा रहे थे । यह फर्क था अपनी किस्मत पर खुद अपना नियंत्रण होना या फिर आपकी किस्मत पर किसी दूसरे का नियंत्रण होना । परन्तु ज्यादातर लोग यह नहीं समझ सकते हैं कि