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जमशेद जी टाटा | लेखिका - शालिनी अग्रवाल in hindi |  हिन्दी मे |  Audio book and podcasts

Story | 17mins

जमशेद जी टाटा | लेखिका - शालिनी अग्रवाल in hindi

AuthorShalini Agarwal
जमशेद जी टाटा के प्रभावी जीवन का सफर Author : Shalini Agarwal Voiceover Artist : Harish Darshan Sharma जमशेद जी टाटा | लेखिका - शालिनी अग्रवाल in Hindi, is one of our best biography stories available in Hindi in our catalog. This story is created by Shalini Agarwal. Shalini Agarwal is a prominent personality known for writing biography stories. Biography stories not just talk about the life of a person and his/her achievements but their struggles as well. A successful person is not just known for his luxurious life but due to his hard work. There are so many celebrities, sportspersons, and businessmen who have worked hard throughout their lives. And we get to learn a lot from their life. Hence, biography stories are of great help if you are seeking motivation to work hard. The inspiration we get from people is the stepping stones that lead us to a successful goal. If we apply the rules they’ve applied then we are sure to get what they achieved. We understand that our users emotionally connect with the audios more when it is in their language. Hence, we offer a variety of biography stories in different languages like Hindi, Gujarati, Telugu, Marathi, Bangla, etc. These biography stories are available for free and can be downloaded and saved on our app. And the best part is that you can access it while traveling, while working out in the gym, and doing anything, anywhere at any point of time be it early morning or late at night. So, stream, download, and enjoy the ad-free experience.जमशेद जी टाटा | लेखिका - शालिनी अग्रवाल हिंदी में, हमारी सूची में हिंदी में उपलब्ध हमारी सर्वश्रेष्ठ जीवनी कहानियों में से एक है । यह कहानी Shalini Agarwal द्वारा लिखी गई है। Shalini Agarwal जीवनी कहानियां सुनाने के लिए जाना जाने वाला एक प्रमुख व्यक्तित्व है । जीवनी कहानियां न सिर्फ किसी व्यक्ति के जीवन और उसकी उपलब्धियों के बारे में बात करती हैं बल्कि उनके संघर्षों के बारे में भी बात करती हैं । एक सफल व्यक्ति सिर्फ अपनी आलीशान जिंदगी के लिए नहीं बल्कि अपनी मेहनत के कारण जाना जाता है। ऐसी कई हस्तियां, खिलाड़ी और बिजनेसमैन हैं, जिन्होंने जिंदगी भर मेहनत की है। और हमें उनके जीवन से बहुत कुछ सीखने को मिलता है । इसलिए, जीवनी कहानियों बहुत मदद की है अगर आप कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरणा ढूंढ रहे हैं तो । प्रेरणा हमें लोगों के दृड़संकल्प व एक सफल लक्ष्य के लिए नेतृत्व रखने वालो से मिलती है। हम समझते हैं कि हमारे उपयोगकर्ता भावनात्मक रूप से ऑडियो के साथ अधिक कनेक्ट करते हैं जब यह उनकी भाषा में होता है। इसलिए, हम हिंदी, गुजरती, तेलुगू, मराठी, बांग्ला आदि जैसी विभिन्न भाषाओं में विभिन्न प्रकार की जीवनी कहानियां पेश करते हैं। ये जीवनी कहानियां मुफ्त में उपलब्ध हैं और हमारे ऐप पर डाउनलोड किए जा सकते हैं। और सबसे अच्छी बात यह है कि आप इसे यात्रा करते समय, जिम में काम करते समय, और कुछ भी काम करते समय, इसे किसी भी समय - सुबह जल्दी या देर रात में सुन सकते है । इसलिए, विज्ञापन-मुक्त अनुभव को स्ट्रीम करें, डाउनलोड करें और आनंद लें।
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किसी भी देश को आर्थिक आधार होते हैं- वहां के उद्योग और अपनी समझ और दूरदर्शिता से निष्ठापूर्वक अपना सम्पूर्ण योगदान देने वाले उद्योगपति! ऐसे ही एक दूरदर्शी और अभूतपूर्व सपने देखने और उन्हें सच कर दिखाने वाले एक व्यक्ति थे- जमसेतजी टाटा- जिन्हें हम जमशेद टाटा के नाम से भी जानते है! जमशेदजी टाटा का जन्म 3 मार्च 1839 में, गुजरात के नवसारी ज़िले में हुआ। उनके पिता का नाम नुसरवानजी और माता का नाम जीवनबाई टाटा था। वह उस पारसी समुदाय से था जो इरान में पारसी समुदाय के नरसंहार से जान बचा कर भारत आए थे। उनका परिवार गरीब, किंतु सम्मानित पारसी पादरी परिवार था। नुसरवांजी उनके परिवार के पहले व्यक्ति थे जिन्होंने अपने परिवार की परंपरा तोड़ते हुए व्यापार करने का निर्णय किया और मुम्बई जा कर निर्यात का काम शुरू करके, व्यापार जगत में कदम रखा। जमशेदजी का तेज़ दिमाग और बुद्धिमत्ता को पहचानते हुए उन्हें अपने समुदाय की पारंपरिक शिक्षा से अलग, आधुनिक शिक्षा दिलाने का फैसला किया और इसके लिए उन्हें मुम्बई ले गए। 14 साल की आयु में जमशेदजी टाटा ने मुम्बई के Elphinstone college में प्रवेश लिया। पढ़ाई के दौरान ही उनका विवाह हीराबाई डाबू से हुआ जिनसे उनकी दो संताने दोराबजी टाटा और रतनजी टाटा हुए। 1958 में वह Elphinstone college से ग्रीन स्कॉलर(जो आज की ग्रेजुएशन के बराबर है) हो कर निकले और उसी वर्ष अपने पिता के कारोबार से जुड़ गए। नुसरवांजी, चीन और ब्रिटेन के साथ पहले कपास और फिर जूट का कारोबार करते थे। जमशेदजी ने भी नौ वर्ष तक उनके साथ यही काम किया और कई बार विदेश भी गए ताकि वह बाज़ार को अच्छी तरह समझ सकें। 1969 तक जमशेदजी टाटा को छोटा व्यापारी और मुम्बई बाज़ार में पीछे के बेंच पर बैठने वाला माना जाता था। इस भ्रम को तोड़ने के लिए, और सदैव कुछ बेहतर करने की चाह रखने वाले, जमशेदजी को एक दिन विचार आया छुटपुट व्यवसाय करने की बजाय कोई ऐसा करोबार किया जाए, जिससे आगे बढ़ने के अवसर भी मिलें और देश आत्मनिर्भर बने, तरक्की हो और आधुनिक भारत के निर्माण में सहायक हो! वह एक लंबे समय से कपास के कारोबार से जुड़े थे, अतः कपड़ा व्यापार की समझ रखते थे। उन्हें Textile उद्योग जगत में ही किस्मत आज़माना बेहतर लगा। इसके पीछे एक मंशा यह भी थी कि इसकी बदौलत ब्रिटेन के शोषण चक्र से मुक्त हो पाएगा। 1968 में जमशेदजी ने चिंचपोकली में एक बंद पड़ी तेल मिल 21000/- रुपेय में खरीदी और उसे कॉटन मिल में बदला। इसका नाम था Alexander mill! 2 साल बाद, Alexander mill को मुनाफे के साथ बेच कर उससे भी बेहतर मिल बनाने की कोशिश में जुट गए। 1874 में डेढ़ लाख की पूंजी से उन्होंने नागपुर मे कॉटन मिल की स्थापना की, जिसका नाम रखा Central India Spinning, Weaving & Manufacturing Company.जब महारानी विक्टोरिया के भारत की साम्राज्ञी घोषित हुईं तो 1 जनवरी, 1877 में इसका नाम बदल कर Empress Mill कर दिया गया। उस समय, जब अधिकतर कपड़ा मिलें मुम्बई में थीं और मुम्बई को ही व्यापारिक केंद्र माना जाता था, जमशेदजी के नागपुर में मिल स्थापित करने के फैसले की कड़ी आलोचना हुई। एक निवेशक ने तो यहाँ तक कहा- “इस मिल में निवेश करने का मतलब है-ज़मीन खोद कर उसमें सोना दबा देना!” मगर, जमशेदजी दूरदर्शी थे- उन्होंने नागपुर को तीन कारणों से चुना था- एक तो कपास का उत्पादन आसपास के इलाकों में ही होता था, पानी और ईंधन प्रचुर मात्रा में उपलब्ध था और रेलवे जंक्शन समीप था। यही तीनों कारण उनके इस प्रयोग की सफलता के प्रमुख साधन बने और Empress mill टाटा समूह की नींव रखने वाली पहली बड़ी कंपनी बनी। जमशेदजी एक अलग ही व्यक्तित्व थे। उन्होंने न केवल कपड़ा बनाने के नए-नए तरीके अपनाए बल्कि, अपने कारखाने में काम करने वाले श्रमिकों का भी खूब ध्यान रखा। उनके भले के लिए जमशेदजी ने नई व बेहतर श्रम-नीतियाँ अपनाईं। इस मामले में भी उनका दृष्टिकोण समय से आगे का था। जब, वर्क-कल्चर यानि लोगों के अपने काम के प्रति निष्ठा और ज़़िम्मेदारी का एहसास न के बराबर था, कारखानों में कामगारों की उपस्थिति अकसर 10 से 20 प्रतिशत कम ही रहती थी, जमशेदजी ने श्रमिकों की ज़रूरतों के हिसाब से, सुविधाओं का ध्यान रखने वाली नीतियाँ- जैसे प्रोविडेंट फंड, दुर्घटना बीमा योजना, पेंशन योजना आदि अपनाईं। पहली बार मिल में वातायन (यानि कि- वेंटिलेशन) और उमस से बचने के उपाय करवाए. इनमें से कुछ सुधार तो इंग्लैंड में ‘फैक्ट्रीज एक्ट’ के लागू होने से पहले ही वह भारत में अमल में ले आये थे. पहली बार मजदूरों को बेहतर काम के लिए इनाम दिए जाने लगे जिनमें सोने-चांदी की घड़ियां और मेडल्स थे. उन्हें कपड़े बांटे जाने लगे. मजदूरों के लिए शौच और डिस्पेंसरी की व्यवस्था की गयी. प्रबंधकों को ट्रेनिंग के लिए फण्ड दिए गए. जमशेदजी ही ऐसे पहले उद्योगति थे जिन्होंने अपने कर्मियों के रहने के लिए आवास का इंतज़ाम किया था. श्रमिकों को भी जब बेहतर जीवन और अपने काम का उचित सम्मान मिला तो वे भी निष्ठापूर्वक कंपनी के लिए काम करने लगे। जमशेदजी ने सफलता को कभी अपनी जागीर नहीं माना, अपितु, वह कहते थे, यह सफलता उन सबकी थी, जो उनके साथ, या उनके लिए काम करते थे। जमशेदजी टाटा कहते थे- “हम दूसरों से अधिक निस्वार्थ, उदार या परोपकारी होने का दावा नहीं करते, लेकिन, हम सोचते हैं कि ठोस और ईमानदार व्यवसायिक सिद्धांतों पर चलकर, अपने शेयरधारकों के हितों को अपना हित मानते हैं। हम अपने कर्मचारियों के स्वास्थ्य व कल्याण को सफलता की मज़बूत नींव मानते है”। महाराष्ट्र में एक सफल व्यवसाय स्थापित करने के बाद, उन्होंने अमदावाद में एक और कपड़ा मिल की स्थापना की जिसका नाम रखा Advanced Mills.. Advanced इसलिए क्योंकि वह मिल कई मायनों में उस समय की सबसे आधुनिक मिल थी। अमदावाद शहर के बीच में यह मिल स्थापित कर, उन्होंने शहर के विकास का मार्ग खोला। जमशेदजी के अनेक क्रांतिकारी नेताओं के साथ संबंध थे, जिनमें दादाभाई नैरोजी और फिरोज़शाह मेहता प्रमुख थे, अतः, उनकी सोच से भी प्रभावित थे। उनका मानना था- आर्थिक स्वतंत्रता ही राजनीतिक स्वतंत्रता का आधार है”। वैसे तो स्वदेशी आंदोलन 1905 तक शुरू भी नहीं हुआ था, मगर, जमशेदजी की सोच और उनके आर्थिक स्वायत्तता के प्रयासों ने इसकी नींव बहुत पहले ही रख दी थी। इस तरह अपने काम और विचारों से उन्होंने एक सुदृढ़ व्यापार जगत की सम्भावनाएं बनाईं, और स्वतंत्रता संग्राम में अपना योगदान दिया। जमशेदजी का कहना था- “शक्ति के बिना और ज़रूरत पड़ने पर रक्षा करने के समर्थ हुए बिना स्वतंत्रता का समर्थन करना एक क्रूर भ्रम है। बड़े पैमाने पर औद्योगीकरण से, आर्थिक रूप से सक्षम होने पर, और आधुनिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रयोग से देश की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने से स्वतंत्रता स्वतः ही पाई जा सकती है”। अपनी Textile mill के लिए नई मशीनें लेने मैन्चेस्टर, लंदन गए, और वहां थॉमस कार्लाइल के एक सेमिनार में शामिल होने का अवसर मिला। कार्लाइल ने कहा था- “जिस देश में स्टील होगा, वहीं सोना होगा! यहीं, उनके मन में विचार आया कि देश को आर्थिक मज़बूती देने के लिए अब एक स्टील प्लांट की आवश्यकता है। यह बात जमशेदजी के हृदय में घर कर गई। उन्नीसवीं सदी के अंत में, जब, स्वतंत्रता संग्राम अपने चरम पर था, जमशेदजी टाटा के, भारत में इस्पात संयंत्र यानि कि स्टील प्लांट, लगाने का विचार भी लोगों को मूर्खतापूर्ण लग रहा था। उस समय, उन्हें हिम्मत देने वाला कोई नहीं था, और भय दिखाने वाले सब थे! “बहुत पैसे लग जाएंगे!” “बड़ी मशीनें चाहिए होंगी! कैसे संभव होगा!” “ब्रिटिश सरकार शत्रुतापूर्ण व्यवहार करेगी! सरकार के असहयोग से मुश्किलें बढ़ेंगी!” ऐसी ही बातों से, कभी उन्हें डराते, और कभी उनके सपने का मज़ाक बनाते! कहते हैं, ग्रेट इंडियन पेनिनसुलर रेलवे के चीफ कमिश्नर फ्रेडरिक अपकॉट ने तो यहाँ तक कह दिया कि “अगर टाटा का स्टील प्लांट लगा और छड़ें बनाने में सफल भी हो गया तो मैं उसकी बनाई सारी छड़ें खा जाऊंगा”। जमशेदजी ने आलोचना करने वालों की इन सब बातों से हताश न होते हुए अपने सपने को पूरा करने की ठान ली थी। जमशेदजी ने कहीं पढ़ा था कि नागपुर के समीप ही चंदा ज़िले, जिसे अब चंद्रपुर कहा जाता है, के पास एक गांव है- ‘लोहरा’ जहाँ सबसे बढ़िया लौह खनिज के भंडार हैं! उन्होंने बिना समय गंवाए खनिजों की खदान के लाइसेंस ले लिए। उसके बाद, झारखंड, जो उस समय बिहार का दक्षिणी भाग था, स्थित देश के सफल औद्योगीकरण के लिए उन्होंने इस्पात कारखानों की स्थापना की महत्त्वपूर्ण योजना बनायी। ऐसे स्थानों की खोज की जहाँ लोहे की खदानों के साथ कोयला और पानी सुविधा प्राप्त हो सके। अंततः उन्होंने बिहार के जंगलों में सिंहभूमि जिले में वह स्थान जो इस्पात की दृष्टि से बहुत ही उपयुक्त थे, खोज निकाला। कारखाना स्थापित करने के साथ ही उन्होंने अपने पुत्र दोराबजी टाटा से पहले उन्होंने वहां एक सुविधाजनक और सुनियोजित व्यवस्था करने को कहा जिसमें चौड़ी सड़कें, बिजली की व्यवस्था, मज़दूरों के परिवारों की सुविधा के लिए अस्पताल और स्कूल तक बनाने की योजना शामिल की। इस तरह उन्होंने एक अति विकसित औद्योगिक जगत की आधारशिला रखी। जमशेदजी ने जिस कार्य की नींव रखी, वह उसे पूरा न कर पाए मगर उनके बेटे दोराबजी टाटा ने उनके ही सिद्धांतों पर चलते हुए उनके अधूरे काम को पूरा किया और सन् 1912 में टाटा के प्रथम स्टील प्लांट में उत्पादन शुरू हुआ। तब किसी ने कभी यह सोचा भी नहीं होगा कि टाटा का स्टील प्लांट भविष्य में इतना सफल होगा कि टाटा की सफलता के सफर की नया अध्याय और भारत का आर्थिक संबल बन जाएगा। झारखंड का साकची गांव, जहां टाटा का पहला स्टील प्लांट लगा था, उसके पास जल्दी ही एक शहर बस गया। उनके अथक परिश्रम और योगदान को सम्मानित करते हुए तत्कालीन सरकार ने उसे जमशेदजी के नाम पर जमशेदपुर नाम दिया! उसे टाटानगर भी कहा जाता है। जमशेदजी अभी अपनी इस प्रारंभिक सफलता से संतुष्ट नहीं थे। स्टील प्लांट के अलावा उन्होंने अपने जीवन में तीन और बड़े काम करने का ध्येय रखा था- एक आलिशान होटल, जल-विद्युत संयंत्र यानि कि- hydroelectric power plant, और भारतीय विज्ञान संस्थान! जमशेदजी, शिक्षा को ले कर बहुत उत्साहित थे। एफ़॰आर॰ हैरिस ने जमशेदजी के जीवन पर लिखी किताब ‘क्रॉनिकल ऑफ़ हिज लाइफ़’ में लिखा है, ‘हालांकि जमशेदजी एक उद्योगपति थे पर पहले वे एक स्कॉलर थे। . वह जानते थे कि अगर भविष्य में भारत को विश्व शक्ति बनना है तो उत्तम शैक्षिक संस्थानों की स्थापना कर, भारतीय छात्रों की उचित अवसर देने होंगे। उस समय इंडियन सिविल सर्विसेज के लिए बहुत कम भारतीय छात्रों का चयन हो पाता था। रूसी लाला अपनी किताब –“द लाइफ एंड टाईम्स ऑफ जमशेद टाटा” में लिखा कि जमशेदजी ने उस समय ब्रिटिश सरकार को पत्र लिखते हुए उन्हें इस बात पर राज़ी किया कि सिविल सर्विसेज की परीक्षाएं लंदन के साथ-साथ भारत में भी हों। 1892 मे उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए प्रयास शुरू किए और मेधावी छात्रों को छात्रवृत्ति देने के लिए कोष की स्थापना की। ऐसा कहते हैं कि उस समय लगभग सभी छात्र टाटा की छात्रवृत्ति की सहायता से ही उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे थे। इन छात्रों में से कई देश में शीर्ष पदों पर भी पहुंचे या उन्होंने बड़ी-बड़ी उपलब्धियां हासिल की थीं. जैसे: डॉ जीवराज मेहता जो गुजरात के मुख्यमंत्री बने, भौतिक विज्ञानी डॉ॰ रजा रमन्ना, मशहूर खगोल वैज्ञानिक डॉ॰ जयंत नार्लीकर और डॉ॰ जमशेद ईरानी (जो बाद में टाटा स्टील के मैनेजिंग डायरेक्टर बने). शिक्षा के प्रति उनका यही उत्साह, बैंगलुरू में Indian Institutions of research and education in science and engineering का आधार बनी। इस योजना पर काम कि शुरुआत 1896 में करते हुए जमशेदजी ने अपनी तीस लाख की सम्पत्ति के निवेश का प्रावधान रखा और स्वामी विवेकानंद जी को पत्र लिख कर उनसे इसका नेतृत्व करने की प्रार्थना की। दुर्भाग्य से 1902 मे स्वामी जी की मृत्यु हो गई जिसके बाद, उनकी शिष्या निवेदिता, उनके इस प्रयास की समर्थक बनीं। जमशेदजी के अथक प्रयासों और उनकी योजना से प्रभावित हो कर मैसूर के राजा ने 375 एकड़ भूमि और पाँच लाख रुपये दिए साथ ही हर महीने 50 हज़ार का अतिरिक्त अनुदान भी निश्चित किया। जमशेदजी की सोच और कृष्ण राजा वाडियार- IV के सहयोग से इसकी स्थापना, जमशेदजी की मृत्यु के पांच साल बाद सन् 1909 में हुई। इसे लोग टाटा इंस्टीट्यूट के नाम से भी जानते हैं। उनकी महत्वाकांक्षा के मूल में देश की स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता की तीव्र इच्छा निहित थी। इसी के तहत उनकी दूसरी इच्छा थी जल-विद्युत संयंत्र की स्थापना- जिसकी ज़रूरत को महसूस करते हुए उसकी योजना पर काम करना तो उन्होंने बहुत पहले शुरू कर दिया था, किन्तु अपने जीवनकाल में उसे पूरा न कर सके। उनका यह सपना भी उनकी आने वाली पीढ़ियों ने साकार किया और मुम्बई के पश्चिमी घाट से इस परियोजना का शुभारंभ किया, जिसका मुख्य उद्देश्य था मुम्बई को रोशन करना। कपड़ा उद्योग की सफलता के सिवा अपने जीवनकाल में जमशेदजी का एक ही सपना पूरा हुआ- वह था एक शानदार होटल का निर्माण! कहते हैं, जमशेदजी को यह होटल बनाने का ख्याल इसलिए आया क्योंकि एक बार उन्हें लंदन के वॉटसन होटल में जाने से रोक दिया था क्योंकि वह सिर्फ ‘गोरों’ यानि की ब्रिटिशर्स के लिए था। हालांकि बाद में यह कहा गया कि ताजमहल पैलेस इसलिए बनाया ताकि भारतीय भी राजसी अनुभव पा सकें जो कि मुम्बई दर्शन के लिए आने वालों के लिए यादगार रहे! वह होटल, जो आज भी सिर्फ मुम्बई ही नहीं बल्कि पूरे भारत की शान है- THE TAJ MAHAL PALACE के नाम से जाना जाता है। इसकी नींव स्वयं जमशेदजी ने गेटवे ऑफ इंडिया के बनने से पहले सन् 1898 में रखी और 16 दिसंबर 1903 में इसका उद्घाटन किया। मुम्बई के कोलाबा में स्थित यह बॉम्बे पोर्ट पर पहुंचने वाले जहाज़ों को नज़र आने वाला पहला दृश्य था। ताज महल पैलेस वह पहली इमारत थी, जो पूर्ण रूप से बिजली से रोशन थी। उसकी अनोखी और विशाल सीढ़ियाँ जिन्हें Floating stairs कहा जाता है, आज भी आकर्षित करती हैं। एशिया में यह अपनी तरह का अकेला और अपने अनोखे और भव्य वास्तु के लिए यह आज भी प्रसिद्ध है और मिसाल माना जाता है। जमशेदजी जर्मनी गए थे, जहां उनकी तबीयत खराब हुई और 19 मई 1904 को मात्र पैंसठ वर्ष की आयु में उनकी मृत्यु हो गई। उनकी मृत्यु न सिर्फ उद्योग जगत के लिए एक हानि थी, बल्कि देश ने एक विचारशील व्यक्तित्व खोया था। लेकिन अपने जीवन में उन्होंने जो सिद्धांत अपनाए और जिन कामों की नींव रखी, वह भारत को औद्योगीकरण की राह पर ले आए और गुलामी की पीड़ा झेलते भारत को स्वाभिमानी और सशक्त आधुनिक भारत का सपना देखने की हिम्मत दी। उन्हीं सिद्धांतों पर चलते हुए, उनकी आने वाली पीढ़ियों ने उनके अधूरे कामों को पूरा किया। इस तरह, टाटा भारत का पहला औद्योगिक घराना बना। आज, चाहे वह टाटा स्टील हो या कार, ट्रक हों या सेना के लिए टैंक, पॉवर हो या सॉफ्टवेयर, नमक हो या चाय, टाटा किसी न किसी रूप में हर भारतीय के जीवन से जुड़ा है! टाटा समूह के साथ काम करने वाले हर व्यक्ति को भी सबसे पहले यही कहा जाता है- “हम किसी न किसी तरह से हर भारतीय के जीवन को प्रभावित करते हैं और हमारे कारोबार के बुनियाद में केवल निजी मुनाफा नहीं अपितु समाज की भलाई भी है”। यही वह मूल्य हैं जिनके दम पर ही टाटा समूह भारत का सबसे बड़ा, और अमीर ही नहीं विश्वसनीय भी है- इन्हीं मूल्यों के संस्थापक थे- जमशेदजी नुसरवांजी टाटा।

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जमशेद जी टाटा के प्रभावी जीवन का सफर Author : Shalini Agarwal Voiceover Artist : Harish Darshan Sharma जमशेद जी टाटा | लेखिका - शालिनी अग्रवाल in Hindi, is one of our best biography stories available in Hindi in our catalog. This story is created by Shalini Agarwal. Shalini Agarwal is a prominent personality known for writing biography stories. Biography stories not just talk about the life of a person and his/her achievements but their struggles as well. A successful person is not just known for his luxurious life but due to his hard work. There are so many celebrities, sportspersons, and businessmen who have worked hard throughout their lives. And we get to learn a lot from their life. Hence, biography stories are of great help if you are seeking motivation to work hard. The inspiration we get from people is the stepping stones that lead us to a successful goal. If we apply the rules they’ve applied then we are sure to get what they achieved. We understand that our users emotionally connect with the audios more when it is in their language. Hence, we offer a variety of biography stories in different languages like Hindi, Gujarati, Telugu, Marathi, Bangla, etc. These biography stories are available for free and can be downloaded and saved on our app. And the best part is that you can access it while traveling, while working out in the gym, and doing anything, anywhere at any point of time be it early morning or late at night. So, stream, download, and enjoy the ad-free experience.जमशेद जी टाटा | लेखिका - शालिनी अग्रवाल हिंदी में, हमारी सूची में हिंदी में उपलब्ध हमारी सर्वश्रेष्ठ जीवनी कहानियों में से एक है । यह कहानी Shalini Agarwal द्वारा लिखी गई है। Shalini Agarwal जीवनी कहानियां सुनाने के लिए जाना जाने वाला एक प्रमुख व्यक्तित्व है । जीवनी कहानियां न सिर्फ किसी व्यक्ति के जीवन और उसकी उपलब्धियों के बारे में बात करती हैं बल्कि उनके संघर्षों के बारे में भी बात करती हैं । एक सफल व्यक्ति सिर्फ अपनी आलीशान जिंदगी के लिए नहीं बल्कि अपनी मेहनत के कारण जाना जाता है। ऐसी कई हस्तियां, खिलाड़ी और बिजनेसमैन हैं, जिन्होंने जिंदगी भर मेहनत की है। और हमें उनके जीवन से बहुत कुछ सीखने को मिलता है । इसलिए, जीवनी कहानियों बहुत मदद की है अगर आप कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरणा ढूंढ रहे हैं तो । प्रेरणा हमें लोगों के दृड़संकल्प व एक सफल लक्ष्य के लिए नेतृत्व रखने वालो से मिलती है। हम समझते हैं कि हमारे उपयोगकर्ता भावनात्मक रूप से ऑडियो के साथ अधिक कनेक्ट करते हैं जब यह उनकी भाषा में होता है। इसलिए, हम हिंदी, गुजरती, तेलुगू, मराठी, बांग्ला आदि जैसी विभिन्न भाषाओं में विभिन्न प्रकार की जीवनी कहानियां पेश करते हैं। ये जीवनी कहानियां मुफ्त में उपलब्ध हैं और हमारे ऐप पर डाउनलोड किए जा सकते हैं। और सबसे अच्छी बात यह है कि आप इसे यात्रा करते समय, जिम में काम करते समय, और कुछ भी काम करते समय, इसे किसी भी समय - सुबह जल्दी या देर रात में सुन सकते है । इसलिए, विज्ञापन-मुक्त अनुभव को स्ट्रीम करें, डाउनलोड करें और आनंद लें।