पॉडकास्ट के फॉर्मेट्स

यदि आप भी पॉडकास्टिंग में अपना करियर तलाश रहे हैं, या पॉडकास्ट बनाने की सोच रहे हैं, तो आपने पॉडकास्ट के लिये अपना विषय तो चुन ही लिया होगा। यदि नहीं भी चुना है तो कोई बात नहीं। इस आर्टिकल में हम आपको बतायेंगे कि पॉडकास्ट के फॉर्मेट्स कितने होते हैं। पॉडकास्ट रिकॉर्ड करने से पहले आपको ये जान लेना चाहिये कि जिस तरीके का पॉडकास्ट आप बनायेंगे, उसे कहा क्या जाता है, या उस पॉडकास्ट के फॉर्मेट को क्या कहा जाता है। 

पॉडकास्ट होता क्या है, इस बात से तो हम अच्छी तरह वाकिफ हो चुके हैं । पॉडकास्ट आवाज़ के माध्यम से दुनिया तक पहुंचने का जरिया कहा जा सकता है। सिर्फ बोलकर हम अपनी बात दूसरों तक पहुंचा सकते हैं। सिर्फ बात ही नहीं पहुंचा सकते, बल्कि अपना करियर भी पॉडकास्टिंग के क्षेत्र में बना सकते हैं। पॉडकास्ट बनाने के काफी सारे तरीके होते हैं, जिन्हें पॉडकास्ट के फॉर्मेट कहा जाता है। वो दिन दूर नहीं है जब पॉडकास्ट भारत में भी अपनी एक नयी पहचान और लोकप्रियता हासिल कर लेगा।

फॉर्मेट चयन क्यों है जरूरी :

आप का लिसनर आपके कॉन्टेंट के इंतजार में रहेगा। यदि आप नया चैनल शुरू कर रहे हैं तो शुरूआत में हफ्ते दर हफ्ते या एक निश्चित समय पर कॉन्टेंट देना आप के लिये मुश्किल हो सकता है। अगर आप पहले हफ्ते अलग कॉन्टेंट दे रहे हैं, और दूसरे हफ्ते कोई और विषय पकड़ लिया तो ये आप के लिसनर्स को बिखेर देगा। आप को अपने लक्षित समूह को अपने साथ बांधना है तो आप के पॉडकास्ट का एक निश्चित फॉर्मेट होना जरूरी है। पॉडकास्ट के फॉर्मेट के साथ साथ एक खास समयावधि का भी ध्यान रखें। कोशिश करें कि एक तय समयसीमा के अंदर आप का कॉन्टेंट पब्लिश हो जाए।

अब हम आप को कुछ विशेष पॉडकास्ट के फॉर्मेट और उनके बारे में पूरी जानकारी देंगे। इनको ध्यान में रखकर यदि आप पॉडकास्ट बनाते हैं, तो जल्दी ही आप का चैनल प्रसिद्धि हासिल करेगा और साथ ही आप बन जाएंगे एक सफल पॉडकास्टर।

1. इन्टरव्यू पॉडकास्ट 

ये सबसे पारम्परिक पॉडकास्ट के फॉर्मेट में से एक है। इसमें एक होस्ट होता है जो पॉडकास्ट को मॉडरेट करता है और एक या एक से ज्यादा किसी विशेष मुद्दे के विशेषज्ञ होते हैं। होस्ट सवाल पूछता है और विशेषज्ञ जवाब देते हैं।

फायदा :

इसका सबसे सही फायदा यह है कि आप को इस पर ज्यादा मेहनत नहीं करनी। विशेषज्ञों के ऊपर सारा कॉन्टेंट होगा। आप को बस अपने सवाल तैयार रखने हैं। इसके अलावा क्योंकि इन्टरव्यू में ज्यादा क्रिएटिव होना जरूरी होता नहीं है, साथ ही बात चीत प्रवाह में चलती रहती है, तो आप को ज्यादा एडिटिंग करने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी।

नुकसान :

क्योंकि इन्टरव्यू जैसे फॉर्मेट के बहुत से पॉडकास्ट पहले से ही हैं, तो अपने लिसनर्स को ढूंढ़ने के लिए आप को काफी अनोखे और अलग आइडिया लेकर आना होगा।इसके अलावा आपको अपने विशेषज्ञों के समय के अनुसार अपने समय को एडजस्ट करना होगा। ऐसा भी हो सकता है कि कोई व्यक्ति इंटरव्यू का वादा करके अंत समय में मुकर जाए। इससे भी आपके पॉडकास्ट और आप के हौसले दोनों पर उल्टा प्रभाव पड़ेगा। आप का इन्टरनेट कनेक्शन भी सबसे बड़ी बाधा बन के सामने आ सकता है।

2. टॉक शो

talkshows

ऐसे शो सुनने में काफी अच्छे और सरल लगते हैं। सुनने वाले को इसमें अपना दिमाग नहीं लगाना पड़ता। वह होस्ट के साथ खुद को जुड़ा हुआ महसूस करता है। टॉक शो में होस्ट संगीत, थेरेपी, रिश्ते या किसी भी मुद्दे पर बातचीत करता है ,और लोग उसको गम्भीरता के साथ सुनते हैं।

फायदा :

भावनाओं से जुड़े कार्यक्रम में बोलने वाले को ज्यादा दिमाग नहीं लगाना होता। उससे बस अपना विषय और उसके मुख्य बिंदु चुनने होते हैं, और उसके बाद बोलना शुरू कर देना होता है। अगर वह उस विषय से ही भांति परिचित है तो वह। एक बेहतरीन पॉडकास्ट रिकॉर्ड कर लेगा। उसे इसमें ज्यादा समय देने की जरूरत नहीं रहेगी।

नुकसान :

टॉक शो बनाने के लिए आपको हमेशा क्रिएटिव रहना होगा। यदि आप हमेशा एक ही जैसा कॉन्टेंट बोलते रहेंगे तो लिसनर आपसे ऊब जाएगा। आपको अपने लिसनर को अपने चैनल से जोड़े रखने के लिए हर बार कुछ नया, कुछ अनोखा और पहले से कुछ बेहतर लेकर आना होगा।

3. कोर्सेज़

इस प्रकार के पॉडकास्ट के फॉर्मेट में एक से ज्यादा बोलने वाले होते हैं। लेकिन ये पॉडकास्ट सामान्य पॉडकास्ट की तुलना में ज्यादा सुगठित होते हैं। इसमें एक विशेष श्रोता वर्ग के लिए कॉन्टेंट तैयार किया जाता है, और एक ही विषय के अलग अलग पक्षों पर चर्चा की जाती है।

फायदा:

यदि आपके आसपास अलग अलग विषयों के काफी सारे जानकार हैं, तो आपको इसमें ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। कुछ ही समय में रेगुलर लिसनर आपको मिलने लगेंगे।

नुकसान :

क्योंकि एक विषय के कई सारे लिसनर आपके पास होंगे, तो आपको हर किसी के लिए कॉन्टेंट या हर किसी की समस्याओं का समाधान लाने के लिए विषय पर बहुत ज्यादा केंद्रित रहना होगा। कोर्सेज़ के प्रारूप में अलग-अलग तरह के लोग होने के कारण काफी सारे लिसनर्स को आप का कॉन्टेंट समझ ना आने की समस्या हो सकती है।

4. स्क्रिप्टेड फिक्शन 

इसमें पॉडकास्ट क्रियेटर को अपनी पसंद का कोई भी प्लॉट चुनना होता है और उसके ऊपर कहानियां सुनानी होती हैं। डरावनी, रोमांचक, रहस्यमयी या कैसी भी कहानियां उसी अंदाज में सुनाना वाकई रोचक और मनोरंजक फॉर्मेट है।

फायदा :

कहानी का सिर्फ एक तार सोचकर सारी कहानियां उसी के आसपास गढ़ देना ज्यादा मेहनत का काम नहीं है। साथ ही इसे करने में बाकियों की तुलना में ज्यादा मजा व दिलचस्पी आयेगी।

नुकसान :

इस तरह कहानी सुनाने में आपको रिकॉर्डिंग के बाद बहुत सारी एडिटिंग करनी होगी। लिसनर को जोड़े रखने के लिए कहानी में बहुत सी रचनात्मकता लेकर आनी होगी।

5. स्टोरी टेलिंग

कहानियां सुनना और सुनाना तो सबको पसंद होता है। यदि आप कहानियां सुनाने में दिलचस्पी रखते हैं तो स्टोरी टेलिंग का फॉर्मेट आपके पॉडकास्ट के लिए सबसे बेहतर रहेगा। बस कोई भी एक किस्सा यह कहानी सोचिए और उस पर बोलना शुरू करिए। कहानियां सुनाने के विभिन्न तरीकों को जानने के लिये यहां क्लिक करें।

फायदा :

आपको अपने कंटेंट को एक जैसा रखने की कोई बाध्यता नहीं है। आप हर दिन अलग-अलग विषय पर भी बोल सकते हैं। और लोग भी जीवन के अलग-अलग रंगों को सुनना पसंद करते है।

नुकसान :

इस बात की पूरी संभावना है कि जल्दी ही आपका कंटेंट लोगों को बोर करने लगेगा। इसलिए हमेशा किसी और विकल्प की तलाश में रहना समझदारी है।


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